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Bijnor News: जिले में अभी भी 37 गांवों में बाढ़ के हालात
Tue, 12 Aug 2025 12:26 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 12 Aug 2025 12:26 AM IST
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धामपुर के मोहल्ला बाड़वान में सेंट मैरी स्कूल मार्ग पर भरा इकड़ा नदी का पानी स्रोत संवाद
- फोटो : रानी की सराय से ऊंजी गोदाम मार्ग पर बना गड्ढ़ा। संवाद
बिजनौर। इस बार जिले की नदियों का पहाड़ों की बारिश से जलस्तर बढ़ गया। मालन, खो और गंगा ने सबसे ज्यादा नुकसान किया। आंकड़ों की बात करें तो तीन दिन पहले तक जिले के 45 गांवों में बाढ़ के हालात थे। हालांकि जलस्तर घटा तो प्रभावित गांवों की संख्या घटकर अब 37 रह गई हैं।
जिले में पिछले दस दिनों से बाढ़ के हालात हैं। बिजनौर, चांदपुर और धामपुर तहसील इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो बाढ़ में अब तक 178 मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और 37 गांव अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। इस आपदा में 2836 परिवार हैं, जो बाढ़ पीड़ितों की श्रेणी में है। करीब साढ़े 12 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। अभी तक एनडीआरएफ और एसडीआरएफ द्वारा 600 लोगों को जलभराव वाले स्थानों से रेस्क्यू किया जा चुका है। संवाद
तटबंध टूटने से बढ़ी परेशानी
जिले में सबसे पहले रावली क्षेत्र में मालन का तटबंध टूटा और दस से ज्यादा गांवों और मेरठ-पौठी हाईवे तक पर भारी भर गया। वहीं नहटौर के पास भी तटबंध टूटने से पूरा मार्ग बंद हो गया और पानी नहटौर की ओर बढ़ गया था। शेरकोट के पास भी यहीं हुआ। सबसे ज्यादा नुकसान की बात करें तो मालन, गांगन, इकड़ा, गंगा में आई बाढ़ ने किया है।
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ऐसी नदियां, जिनमें हर साल आती है बाढ़
जिले में पहाड़ों से उतरकर पहली बार मैदान में आने वाली करीब 16 नदियां हैंं। बरसात में मैदान के अलावा पहाड़ों पर भी बारिश होने से गंगा मालन, खो, गागन, रामगंगा, बनौली, रतनाल, कोटावाली, ऊनी, नकटा, गूला, फीका, धारा, पीली, लकड़ियान और बान नदी में का जलस्तर बढ़ जाता है।
दो दशक में इन गांवों का मिट गया अस्तित्व
पिछले दो दशकों की बात करें तो बिजनौर तहसील के ही गांव मतवाली, सौपुरी, भगवतीपुर, इच्छावाला, मुर्शदाबाद, मोहनपुर भी गंगा की तेज धारा में बह गए। भगवतीपुर, इंच्छावाला, मुर्शदाबाद आदि आधा दर्जन गांव धारा के उस पार चले गए और अब गैर आबाद हैं। साल 2001 में भी जनपद का गांव सुक्खापुर भी पानी में बह गया। तत्कालीन डीएम ने सुक्खापुर के ग्रामीणों को नए स्थान पर बसाया, तो ग्रामीणों ने गांव का नाम भी डीएम के नाम पर ‘मार्कंडेपुरम’ रखा था। इससे पहले साल 1957 में चांदपुर तहसील का गांव नांदनौर गंगा में बह गया था। इस गांव को खानपुर में आबाद किया गया था। इसके बाद चांदपुर तहसील के गांव जाफराबाद और जहांगीरपुर गांव भी गंगा में जलसमाधि ले चुके थे। इसके बाद वर्ष 1964 में आई गंगा की बाढ़ में विदुरकुटी के सामने आबाद गांव भुआ, बेला, शेरपुर, लीलावली, हरिपुर, श्रीजीपुर, गांवड़ी, खेड़ा, धूधली खादर गंगा में डूब गए थे।
बाढ़ के हालातों पर नजर बनी हुई है। 1850 लोगों को अब तक राहत सामग्री बांटी जा चुकी है। जलस्तर घटने के साथ ही हालात सुधर रहे हैं।
-जसजीत कौर, डीएम बिजनौर
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जिले में पिछले दस दिनों से बाढ़ के हालात हैं। बिजनौर, चांदपुर और धामपुर तहसील इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो बाढ़ में अब तक 178 मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और 37 गांव अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। इस आपदा में 2836 परिवार हैं, जो बाढ़ पीड़ितों की श्रेणी में है। करीब साढ़े 12 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। अभी तक एनडीआरएफ और एसडीआरएफ द्वारा 600 लोगों को जलभराव वाले स्थानों से रेस्क्यू किया जा चुका है। संवाद
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तटबंध टूटने से बढ़ी परेशानी
जिले में सबसे पहले रावली क्षेत्र में मालन का तटबंध टूटा और दस से ज्यादा गांवों और मेरठ-पौठी हाईवे तक पर भारी भर गया। वहीं नहटौर के पास भी तटबंध टूटने से पूरा मार्ग बंद हो गया और पानी नहटौर की ओर बढ़ गया था। शेरकोट के पास भी यहीं हुआ। सबसे ज्यादा नुकसान की बात करें तो मालन, गांगन, इकड़ा, गंगा में आई बाढ़ ने किया है।
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ऐसी नदियां, जिनमें हर साल आती है बाढ़
जिले में पहाड़ों से उतरकर पहली बार मैदान में आने वाली करीब 16 नदियां हैंं। बरसात में मैदान के अलावा पहाड़ों पर भी बारिश होने से गंगा मालन, खो, गागन, रामगंगा, बनौली, रतनाल, कोटावाली, ऊनी, नकटा, गूला, फीका, धारा, पीली, लकड़ियान और बान नदी में का जलस्तर बढ़ जाता है।
दो दशक में इन गांवों का मिट गया अस्तित्व
पिछले दो दशकों की बात करें तो बिजनौर तहसील के ही गांव मतवाली, सौपुरी, भगवतीपुर, इच्छावाला, मुर्शदाबाद, मोहनपुर भी गंगा की तेज धारा में बह गए। भगवतीपुर, इंच्छावाला, मुर्शदाबाद आदि आधा दर्जन गांव धारा के उस पार चले गए और अब गैर आबाद हैं। साल 2001 में भी जनपद का गांव सुक्खापुर भी पानी में बह गया। तत्कालीन डीएम ने सुक्खापुर के ग्रामीणों को नए स्थान पर बसाया, तो ग्रामीणों ने गांव का नाम भी डीएम के नाम पर ‘मार्कंडेपुरम’ रखा था। इससे पहले साल 1957 में चांदपुर तहसील का गांव नांदनौर गंगा में बह गया था। इस गांव को खानपुर में आबाद किया गया था। इसके बाद चांदपुर तहसील के गांव जाफराबाद और जहांगीरपुर गांव भी गंगा में जलसमाधि ले चुके थे। इसके बाद वर्ष 1964 में आई गंगा की बाढ़ में विदुरकुटी के सामने आबाद गांव भुआ, बेला, शेरपुर, लीलावली, हरिपुर, श्रीजीपुर, गांवड़ी, खेड़ा, धूधली खादर गंगा में डूब गए थे।
बाढ़ के हालातों पर नजर बनी हुई है। 1850 लोगों को अब तक राहत सामग्री बांटी जा चुकी है। जलस्तर घटने के साथ ही हालात सुधर रहे हैं।
-जसजीत कौर, डीएम बिजनौर