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Bijnor News: फूस और टिन के तख्तों से बेरहम मौसम का मुकाबला
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बरूकी क्षेत्र के गांव शादीपुर में खस्ताहाल रघुवीर भईयार का मकान। संवाद
- पात्र होने के बावजूद नहीं मिल पाया प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ
- तीन दिन तक हुई बारिश में जान की खैर मनाते रहे परिवार
अनुराधा सिंह
बरूकी। जो उलझकर रह गई फाइलों के जाल में, गांव तक वो रोशनी आएगी कितने साल में? प्रख्यात कवि अदम गोंडवी की सरकारी योजनाओं के हाल पर लिखी यह पंक्ति आज भी मौजू है। किरतपुर ब्लाॅक के गांव शादीपुर के दो परिवारों के पात्र होने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया। ये लोग फूस के छप्पर और टिन के तख्तों से बेरहम मौसम का मुकाबला कर रहे हैं। तीन दिन तक लगातार हुई बारिश के दौरान घर का हर सदस्य जान की खैर मनाता रहा।
खुले में रहने को मजबूर असिया का पूरा परिवार
गांव शादीपुर में पश्चिम की ओर विधवा असिया प्रजापति अपने दो बेटों और उनके परिवार के साथ रहती है। उन्होंने कच्ची दीवारें बनाकर उस पर टिन डाल रखी है। खाना एक छप्पर के नीचे बनता है। मिट्टी के बर्तन बनाकर तथा कभी कभार सब्जी बेचकर असिया के दोनों पुत्र परिवार का गुजारा करते हैं। बड़े पुत्र राजाराम ने बताया कि महंगाई के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई और अन्य खर्च भी मुश्किल से पूरे हो पाते हैं। मकान बनाने के लिए रकम कहां से लाएं। दीवारों पर टिन डालकर उसमें सामान रखा हुआ है। उन्हें और बच्चों को ज्यादातर खुले में सोना पड़ता है। मौसम खराब होने पर जैसे-तैसे समय काटते हैं। गांव और आसपास के क्षेत्र में गुलदार का भी शोर मचता रहता है। वह किसी तरह अपने बच्चों के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।
लकड़ियों की टेक पर रूकी है जिंदगी
गांव शादीपुर के रघुवीर भुइयार का कड़ियों की छत का कमरा था। इसकी कई कड़ियां चार साल पहले गिर गईं थीं। कमरे का आधे से ज्यादा हिस्सा गिर चुका है, बाकि को बल्लियों की टेक लगाकर रोक रखा है। रघुवीर अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ अपने भाई के हिस्से वाले कमरे में रह रहे हैं। इस कमरे की कड़ियों को भी बल्लियां लगाकर रोक रखा है। रघुवीर बताते हैं कि कमरे में घुसने की हिम्मत नहीं होती। सोने और खाना बनाने तक के लिए जगह नहीं है। टूटे हुए कमरे पर फूस का छप्पर डालकर उसके नीचे चूल्हा रखकर खाना बनाते हैं। बारिश के दौरान कब हादसा हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसके बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका।
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वर्तमान में आवास योजना के लिए सर्वे सूची तैयार हो रही है। जो भी पात्र परिवार हैं उनका नाम इस सूची में शामिल कराया जाएगा। - मोहित कुमार, पंचायत सचिव
प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना का सर्वे चल रहा है। जरूरत मंद पात्रों का आवास सुविधा के लिए नियमानुसार चयन किया जाएगा। - कुंवर बहादुर सिंह, एसडीएम नजीबाबाद
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- तीन दिन तक हुई बारिश में जान की खैर मनाते रहे परिवार
अनुराधा सिंह
बरूकी। जो उलझकर रह गई फाइलों के जाल में, गांव तक वो रोशनी आएगी कितने साल में? प्रख्यात कवि अदम गोंडवी की सरकारी योजनाओं के हाल पर लिखी यह पंक्ति आज भी मौजू है। किरतपुर ब्लाॅक के गांव शादीपुर के दो परिवारों के पात्र होने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया। ये लोग फूस के छप्पर और टिन के तख्तों से बेरहम मौसम का मुकाबला कर रहे हैं। तीन दिन तक लगातार हुई बारिश के दौरान घर का हर सदस्य जान की खैर मनाता रहा।
खुले में रहने को मजबूर असिया का पूरा परिवार
गांव शादीपुर में पश्चिम की ओर विधवा असिया प्रजापति अपने दो बेटों और उनके परिवार के साथ रहती है। उन्होंने कच्ची दीवारें बनाकर उस पर टिन डाल रखी है। खाना एक छप्पर के नीचे बनता है। मिट्टी के बर्तन बनाकर तथा कभी कभार सब्जी बेचकर असिया के दोनों पुत्र परिवार का गुजारा करते हैं। बड़े पुत्र राजाराम ने बताया कि महंगाई के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई और अन्य खर्च भी मुश्किल से पूरे हो पाते हैं। मकान बनाने के लिए रकम कहां से लाएं। दीवारों पर टिन डालकर उसमें सामान रखा हुआ है। उन्हें और बच्चों को ज्यादातर खुले में सोना पड़ता है। मौसम खराब होने पर जैसे-तैसे समय काटते हैं। गांव और आसपास के क्षेत्र में गुलदार का भी शोर मचता रहता है। वह किसी तरह अपने बच्चों के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।
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लकड़ियों की टेक पर रूकी है जिंदगी
गांव शादीपुर के रघुवीर भुइयार का कड़ियों की छत का कमरा था। इसकी कई कड़ियां चार साल पहले गिर गईं थीं। कमरे का आधे से ज्यादा हिस्सा गिर चुका है, बाकि को बल्लियों की टेक लगाकर रोक रखा है। रघुवीर अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ अपने भाई के हिस्से वाले कमरे में रह रहे हैं। इस कमरे की कड़ियों को भी बल्लियां लगाकर रोक रखा है। रघुवीर बताते हैं कि कमरे में घुसने की हिम्मत नहीं होती। सोने और खाना बनाने तक के लिए जगह नहीं है। टूटे हुए कमरे पर फूस का छप्पर डालकर उसके नीचे चूल्हा रखकर खाना बनाते हैं। बारिश के दौरान कब हादसा हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसके बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका।
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वर्तमान में आवास योजना के लिए सर्वे सूची तैयार हो रही है। जो भी पात्र परिवार हैं उनका नाम इस सूची में शामिल कराया जाएगा। - मोहित कुमार, पंचायत सचिव
प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना का सर्वे चल रहा है। जरूरत मंद पात्रों का आवास सुविधा के लिए नियमानुसार चयन किया जाएगा। - कुंवर बहादुर सिंह, एसडीएम नजीबाबाद