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भूख से हारकर ही हाथ आएगी मादा गुलदार

Sun, 05 Jan 2020 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2020 11:30 PM IST
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Female guldar will come in hand only after losing its appetite
भूख से हारकर ही हाथ आएगी मादा गुलदार
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बिजनौर। मादा गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग ने उसकी भूख को अपना हथियार बनाया है। उसे पकड़ने के लिए चार पिंजरों में बकरी बांधी गई हैं। गुलदार की रोज की खुराक छह से सात किलो मांस होता है। अगर शिकार न हो तो गुलदार केवल दस दिन तक ही भूखा रह सकता है। इसके बाद इसे पेट भरने के लिए मांस चाहिए ही होता है।
मादा गुलदार ने गांव मोहंडिया में 26 दिसंबर को शफीक को मारा था। गुलदार शफीक को खींचकर गन्ने के खेत में ले गई थी। लेकिन तभी किसान मौके पर पहुंच गए थे। गुलदार शफीक के शव को खा नहीं पाई थी। इसके बाद से मोहंडिया में ही गुलदार का ठिकाना है। दिन में गुलदार की सक्रियता न के बराबर है। रात में ही मादा गुलदार निकलती है। गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग को उसकी भूख का ही सहारा है। गुलदार हर सात या आठ दिन बाद शिकार करता है। गुलदार को पेट भरने के लिए हर रोज छह से सात किलो मांस की जरूरत होती है। मांस न मिलने की स्थिति में वह ज्यादा से ज्यादा दस दिन तक ही भूखा रह सकता है। अगर मांस न मिले तो शिकार करना गुलदार की मजबूरी बन जाती है।
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अगर गुलदार किसी जानवर का शिकार कर ले तो उसे काफी समय तक वह खा सकता है। दिन में मादा गुलदार मोहंडिया के खेत से कम ही निकल रही है। रात को वह कुछ ही देर के लिए बाहर आती है। इसलिए उसके हाल फिलहाल में कोई बड़ा शिकार करने की संभावना कम ही है। गुलदार को पेट भरने के लिए मांस की जरूरत होती है। मांस चाहे कितना भी सड़ा हुआ हो, उससे बदबू आ रही हो या फिर उसमें कीड़े पड़ रहे हों, गुलदार उसे खा लेता है। उसे ताजे मांस से ज्यादा लेना देना नहीं होता है। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के मुताबिक गुलदार जल्दी पकड़े जाने की संभावना है। इस दौरान गांव वाले पूरी तरह सावधान रहें। खेतों में काम करते समय पूरी एहतियात बरतें।
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बकरी के बोलने पर ही पिंजरे के पास आएगा गुलदार
गुलदार की सूंघने की ताकत सामान्य इंसान से थोड़ी ही ज्यादा होती है। उसे पकड़ने के लिए पिंजरे में बकरी बांधी गई है। लेकिन गुलदार बकरी की गंध सूंघ नहीं सकता है। बकरी के बोलने पर ही वह पिंजरे की ओर आएगा। अगर बकरी रात को सो जाएगी तो गुलदार के पिंजरे की ओर आने की संभावना बहुत कम होगी। उसे मांस की ओर आकर्षित करने को ही सड़ा हुआ मांस पिंजरों के आसपास डाला जा रहा है।

केवल एक इंसानी शिकार खाया
गुलदार ने सबसे पहले गांव नवादा निवासी शिमला देवी को 27 नवंबर को मारा था। दस दिसंबर को गांव सराय आलम निवासी चमन को मारा। दोनों को खेत में मारा, लेकिन उन्हें खाया नहीं। 16 दिसंबर को गुलदार गांव अकबरपुर चौगांवा निवासी चेतन को गांव से उठा ले गया था। जंगल से चेतन का शव मिला था। गुलदार ने उसके शव को मुंह के पास से खाया था। इसके बाद गुलदार ने 25 दिसंबर को गांव असगरपुर में शानू व 26 दिसंबर को मोहंडिया में शफीक को मारा। गांव वालों के तुरंत मौके पर आ जाने पर गुलदार उन्हें नहीं खा सका।
वन विभाग की गाइड लाइन
- खेतों में कम से कम 20 व्यक्तियों के समूह में हांका लगाएं।
- खेतों में कम से कम पांच व्यक्तियों के समूह में जाएं।
- छोटे बच्चों को स्कूल, खेल के मैदान, बाजार आदि में बड़ों की निगरानी में भेजें।
- मोबाइल/रेडियो के जरिए लगातार आवाज करें।
- खड़े होकर गन्ना काटने की व्यवस्था करें। गुलदार सामान्यत: बैठे हुए व्यक्ति पर हमला करता है।
- गुलदार के पूर्वाभास के लिए खेतों में कुत्तों को साथ ले जाएं।
- खेतों में काम करते समय हेलमेट व नेकपैड पहनें।
- रात में खेतों की सुरक्षा के लिए मचान पर ही रहें।
- रात में फसलों की सिंचाई के लिए न जाएं।
- खेतों में गुलदार दिखने पर पास की वन चौकी पर संपर्क करें।
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