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Bijnor News: नींदडू - हर वयस्क मुसलमान पर फर्ज है रोजे

Thu, 23 Mar 2023 12:19 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Thu, 23 Mar 2023 12:19 AM IST
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Fasting is obligatory on every adult Muslim
-नींदडू के मुफती अशरफ।
- मुस्लिम विद्वान बोले - रमजान का मुबारक महीना बड़ी रहमतों और बरकतों वाला है
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फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
नींदडू। रमज़ान महीने के रोज़े हर वयस्क मुसलमान मर्द और औरत के ऊपर फ़र्ज़ है। रोज़ा इस्लाम का तीसरा स्तंभ है। रमजान का मुबारक महीना बड़ी रहमतों और बरकतों वाला है। इसमें नफिल का सवाब (पुण्य) फ़र्ज़ के बराबर एवं फ़र्ज़ का सवाब 70 गुना मिलता है।
सऊदी अरब में बृहस्पतिवार काे पहला रोज़ा है। भारत में बृहस्पतिवार की रात से तरावीह की नमाज शुरु हो जाएगी और शुक्रवार को पहला रोजा रखा जाएगा। इस्लाम में इस महीने की बड़ी फ़ज़ीलत बताई गई है। उलमा-ए-कराम रोज़ा रखने के सवाब और नहीं रखने के गुनाह (पाप) से लोगों को अवगत कराते हैं। मुफ्ती मोहम्मद अशरफ मजाहिरी ने बताया कि रमजान सब्र का महीना है। दिन में रोजा रखा जाता है। रोजे की हालत में खाना, पीना तथा सहवास करना वर्जित है। रोजे में अल्लाह तआला की तरह न खाने पीने की सिफ़त (विशेषता) मौजूद है। इसमें खूब इबादत करनी चाहिए तथा गुनाहों से बचना चाहिए।
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मुफ्ती मुजम्मिल हुसैन कासमी ने बताया कि रमजान के रोजे फर्ज हैं। इसी महीने में शब-ए-कद्र होती है। इस रात की इबादत हजार महीनों की इबादत से बेहतर है। इफ्तारी कराना और फकीरों व जरूरतमंदों की मदद करना सवाब है। इस महीने में जन्नत के दरवाजे खोल, जहन्नुम के बंद और शैतान को कैद कर दिया जाता है।
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मुफ्ती मोहम्मद कासिम ने नबी के हवाले से बताया कि रमजान का पहला अशरा (10 दिन) रहमत, दूसरा अशरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से मुक्ति का होता है। इस महीने की कद्र करें। रोजा रखने के अलावा पाबंदी से नमाज पढ़ें, अल्लाह का जिक्र करें, खैरात करें और कुरआन पाक की तिलावत करें।


मुफ्ती सदाकत हुसैन ने बताया कि रमजान में अल्लाह की खास रहमतें नाजिल होती हैं। इसका एहतराम करना चाहिए। रोजा हर बालिग और अकलमंद पर फर्ज है। बिना किसी दिक्कत के रोजा छोड़ना बड़ा गुनाह है। झूठ, चुगली और दूसरों की बुराई समेत हर प्रकार के गुनाह से बचना चाहिए। रमजान रोजे का वक्त नेकियां करने में गुजारें।
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