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गन्ने से ज्यादा मुनाफा देगी अमरूद की खेती

Sun, 03 Mar 2019 11:37 PM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर Published by: Deepak Sharma Updated Sun, 03 Mar 2019 11:37 PM IST
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Farming of guava will give more profit than sugarcane
बिजनौर में बिकता पंत प्रभात प्रजाति का अमरूद। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में गन्ने से किसानों का मोहभंग करने के लिए अब उद्यान विभाग किसानों को बागवानी के लिए प्रेरित करेगा। अमरूद की खेती किसानों को गन्ने से भी ज्यादा लाभ दे सकती है। उद्यान विभाग को पहली बार शासन की ओर से 20 हेक्टेयर जमीन में अमरूद बोने का लक्ष्य दिया गया था। अमरूद की खेती अब परंपरागत के बजाए सघन पद्धति   से कराई जाएगी। इससे किसानों   को मोटा मुनाफा होगा। अमरूद की नई प्रजाति श्वेता, ललित, पंत प्रभात व हिसार सफेदा किसानों   को मालामाल करेंगे।
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जिले के किसानों ने गन्ना उत्पादन में रिकॉर्ड कायम कर दिए हैं। गन्ने से किसानों ने बंपर पैदावार करके बंपर कमाई की है, लेकिन बंपर पैदावार के किसान मिलों और किसानों दोनों को ही झेलने   पड़ रहे हैं। चीनी के दाम धड़ाम हो चुके हैं और किसानों को भुगतान के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। चीनी मिलों को भी चीनी बेचने के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे हैं।   शासन की मंशा है कि किसानों   को दूसरी फसलों विशेषकर बागवानी की ओर प्रेरित किया जाए। इसके लिए शासन ने पहली बार जिले में केले, अमरूद आदि की बागवानी के लिए प्रेरित करने का निर्णय लिया है।
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जिले में कई साल के बाद अमरूद की बागवानी कराने के लिए सब्सिडी की व्यवस्था की  गई है। शासन ने जिले में 20 हेक्टेयर जमीन में अमरूद बोने का लक्ष्य दिया था, जिले उद्यान  विभाग ने पूरा कर लिया है। किसानों को सघन खेती से बागवानी  कराई जा रही है। इसमें फायदा पहले से ज्यादा होगा।
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एक हेक्टेयर में लगते हैं 1667 पौधे
परंपरागत बागवानी में एक हेक्टेयर जमीन में 278 पेड़ लगाए जाते थे। पेड़ की लाइन और आपस में छह मीटर तक का अंतर होता था। नई प्रजाति में अमरूद की लाइन से लाइन की दूरी तीन मीटर तथा आपस में दूरी दो मीटर भी रखी जा रही है। इस पद्धति से एक हेक्टेयर जमीन में 1667 तक पेड़ लगाए जा सकते हैं। परंपरागत खेती में एक पेड़ पर एक क्विंटल तक अमरूद आ जाता है। यानि एक हेक्टेयर जमीन में 278 क्विंटल तक माल निकल सकता है, जबकि सघन पद्धति में 555 क्विंटल से 833 क्विंटल तक माल निकलता है। इससे किसानों का मुनाफा बहुत बढ़ जाता है।
यह है सघन पद्धति
परंपरागत बागवानी में अमरूद के पेड़ की छंटाई नहीं होती। पेड़ बढ़ने पर जड़ों से लिया जाने वाला पोषण पूरे पेड़ में बंटता है और फल का आकार धीरे-धीरे बहुत घट जाता है। सघन पद्धति में पेड़ की छंटाई होती रहती है। इससे जड़ द्वारा दिया गया पोषण कम हिस्सों में जाता है। इससे फल का आकार सदैव एक सा रहता है।

वैज्ञानिक प्रजाति तैयार
अमरूद की नई प्रजाति वैज्ञानिकों ने विकसित की हैं। अमरूद की श्वेता, ललित, पंत प्रभात व हिसार सफेदा बंपर पैदावार देते हैं। इनका एक अमरूद 400 ग्राम तक वजन का रहता है। एक बीघा जमीन में औसतन अमरूद और गन्ना 60 क्विंटल तक निकलते हैं। किसान का गन्ना 3.25 रुपये प्रति किलो और अमरूद 50 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। इससे आमदनी का अंदाजा किसान खुद लगा सकते हैं।

 
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