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कलक्ट्रेट पर किसानों ने किया कब्जा, अफसरों से नोकझोंक

Thu, 14 Feb 2019 11:40 PM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर Published by: Deepak Sharma Updated Thu, 14 Feb 2019 11:40 PM IST
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Farmers took control over the Collectorate
बिजनौर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए कलक्ट्रेट जाते भाकियू कार्यकर्ता। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में  गन्ना बकाया भुगतान सहित कई समस्याओं को लेकर किसानों ने कलक्ट्रेट पर कब्जा कर लिया। बारिश के दौरान भारी संख्या में किसान नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। किसानों को बरामदे में घुसने से रोकने पर जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह की एसडीएम व सीओ सिटी से तीखी नोकझोंक हुई। किसान भी पुलिसवालों से भिड़ पड़े। कुछ किसानों पुलिसकर्मियों के डंडे भी छीन लिए और कलक्ट्रेट में महापंचायत करने बैठ गए। किसानों के दबाव में पुलिस ने वेव ग्रुप की बिजनौर चीनी मिल पर छापा मारा, लेकिन वहां कोई अधिकारी नहीं मिला। जिलाध्यक्ष ने कहा अब या तो भुगतान होगा या संग्राम।
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बारिश के बीच किसान गांव रशीपुर गढ़ी के चौराहे पर एकत्र हुए। बारिश के बाद भी भारी संख्या में जिलेभर से किसान आए। इसके बाद बारिश में ही किसान नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने बारिश से बचने के लिए कलक्ट्रेट में बरामदे में जाने की कोशिश की तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह व किसानों की एसडीएम बृजेश कुमार, सीओ सिटी महेश कुमार व पुलिसकर्मियों से तीखी नोकझोंक हुई। किसान कलक्ट्रेट परिसर में धरना देकर बैठ गए और महापंचायत शुरू कर दी। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने किसानों के सिर पर लाठी घुमाने की कोशिश की तो किसानों व पुलिसकर्मियों धक्कामुक्की हुई। किसानों ने उनसे लाठी छीन ली। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के बेटे गौरव टिकैत ने कहा कि बाबा टिकैत कहते थे कि किसान को अपनी आवाज उठाना और दुश्मन को पहचानना सीखना होगा। किसान आवाज तो उठाने लगा है लेकिन अपने दुश्मन को अब भी नहीं पहचान पा रहा है। कहा कि 14 जनवरी को मुरादाबाद कमिश्नर ने 14 फरवरी तक समस्त बकाया भुगतान कराने का वादा किया था। लगता है कि मिल वाले कमिश्नर से भी ऊपर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन पीछे हटे, किसान मिल वालों से खुद ही भुगतान ले लेगा। कहा कि किसान को अपना भुगतान लेने के लिए बच्चों की शादी के कार्ड लेकर गन्ना अधिकारी के कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि प्रशासन ने किसानों को बरामदे में घुसने सेे रोका है। अब किसान डीएम को उनके कार्यालय और आवास में नहीं घुसने देंगे। अब या तो प्रदेश में भुगतान होगा या संग्राम। उन्होंने कहा कि नजीबाबाद के सीओ ने किसानों को कलक्ट्रेट में घुसने से रोका है। नजीबाबाद सीओ को एसपी सस्पेंड करें। कहा कि किसान कलक्ट्रेट में आत्मदाह करने या लाठी खाने नहीं आए हैं। किसान की आवाज को प्रशासन दबा नहीं सकेगा। किसानों ने अधिकारियों को तीन बजे तक कलक्ट्रेट बुलाया। अधिकारियों को आने में कुछ देर हो गई तो किसान भड़क गए। किसानों ने कलक्ट्रेट गेट पर ताला लगाने के लिए ताला मंगवा लिया। एडीएम वित्त एवं राजस्व अवधेश मिश्र, एसडीएम बृजेश कुमार, सीओ सिटी महेश कुमार, जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह किसानों के बीच पहुंचे। एडीएम ने बताया कि सभी मिलों ने 117 करोड़ का भुगतान दिया है। कहा कि वेव ग्रुप की मिलों का पिछले साल का भुगतान भी जल्दी कराया जाएगा। इस पर राकेश टिकैत ने वेव ग्रुप के मिल अधिकारियों को किसानों के बीच बुलाने को कहा। मिल अधिकारियों को फोन किया तो बिजनौर मिल के अफसरों ने फोन नहीं उठाए। इस पर सीओ ने एक पुलिस टीम मिल भेजी, लेकिन वहां भी कोई मिल अफसर नहीं मिला। किसानों ने मिल वालों के आने के बाद ही वार्ता का प्रस्ताव रखा। धरने की अध्यक्षता मोहम्मद यामीन व संचालन कुलदीप सिंह ने किया। धरने में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धर्मवीर धनकड़, प्रदेश महासचिव रामौतार सिंह, मंडल महासचिव अतुल कुमार, मीडिया प्रभारी संदीप त्यागी, धीर सिंह बालियान, सुरेंद्र सिंह, समरपाल सिंह, दीपक तोमर, सुनील प्रधान, बलराम सिंह, राकेश प्रधान, जसवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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‘अब नहीं रहा मंगल पांडे वाला खून’
किसानों ने कलक्ट्रेट में हुए लाठीचार्ज पर पुलिसकर्मियों पर जमकर निशाना साधा। कहा कि पुलिसवाले भी उनके ताऊ के बेटे हैं। कहा कि किसान परिवार से होने के बाद भी पुलिसवालों ने किसानों पर लाठी चला दी। कहा कि अब पुलिस में मंगल पांडे वाला खून नहीं रह गया है जो अत्याचार के खिलाफ खौलता है।
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मैदान फतह करने वाला कर्नल अच्छा
किसानों ने लाठीचार्ज पर किसान नेताओं को भी खरीखोटी सुनाई। कहा कि मैदान फतह करने वाला कर्नल अच्छा होता है न कि फौज को मरवाने वाला कर्नल। भाकियू के सभी पदाधिकारी मैदान फतह कराने वाले कर्नल हैं।
किसानों पर बंदूकों का ठहरा
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी मिल अधिकारियों पर कार्रवाई न करने पर किसानों ने रोष जताया। कहा कि लाला को पुलिस ने पकड़ा नहीं और किसानों पर बंदूकों का पहरा बैठा दिया गया है, लेकिन अब किसान किसी से रुकने वाले नहीं है।

प्रशासन से वार्ता में यह हुआ निर्णय
बिजनौर। प्रशासन से वार्ता के बाद भाकियू की महापंचायत करीब छह बजे खत्म हुई। भाकियू के मीडिया प्रभारी संदीप त्यागी के अनुसार प्रशासन ने 150 करोड़ का भुगतान करा दिया है। शेष समस्त भुगतान 25 फरवरी तक कराने का आश्वासन दिया है। इस संबंध में एडीएम वित्त एवं राजस्व ने गन्ना सचिव से बात की है। एडीएम वित्त एवं राजस्व, डीसीओ ने 25 फरवरी तक वेव ग्रुप की मिलों का पिछला समस्त बकाया भुगतान करने के बारे में लिखकर दिया है। साथ ही बिलाई मिल से भी 25 फरवरी तक 40 करोड़ का भुगतान कराने की बात कही है। अगर 25 फरवरी तक भुगतान नहीं किया गया तो 28 फरवरी को फिर से महापंचायत होगी। जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने बताया कि जिले की पुलिस लाठी के बल पर किसानों को कलक्ट्रेट में आने से रोकना चाहती है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसपी और नजीबाबाद के सीओ का भाकियू घेराव करेगी।

नहीं मिले अधिकारी तो स्टेनो को उठा लाए
प्रशासन के साथ वार्ता में मिल के अधिकारियों को भी बुलाया गया था। बिजनौर, चांदपुर चीनी मिल अफसरों ने अधिकारियों के फोन ही नहीं उठाए। पुलिस गई तो मिल में अधिकारी मिले भी नहीं। इस पर पुलिस स्टेनो आदि को ही उठा लाई और किसानों के बीच बैठा दिया।

प्रशासन ने चीनी मिलों से इतना कराया भुगतान
किसानों के अनुसार प्रशासन ने बृहस्पतिवार को बिजनौर, चांदपुर, बिलाई चीनी मिल से पांच-पांच, स्योहारा मिल से 20 करोड़, नजीबाबाद से 5.86, बहादरपुर से 14.14, बुंदकी मिल से 13.79 व धामपुर मिल से 26.17 करोड़, बरकातपुर मिल सेे 20 करोड़ का भुगतान कराया। इसके अलावा बुंदकी मिल द्वारा 18 करोड़, अफजलगढ़ मिल द्वारा छह करोड़ और धामपुर मिल द्वारा दस करोड़ का भुगतान शुक्रवार को किया जाएगा। कुल करीब 150 करोड़ का भुगतान कराया जाएगा।

फोन बंद कर भूमिगत हो गए मिल अफसर
बिजनौर में गन्ना बकाया भुगतान पर किसानों के रोष को देखते हुए वेव ग्रुप के सभी अधिकारी बुधवार को ही भूमिगत हो गए थे। उन्होंने अपछने नंबर भी बंद कर लिए। पुलिस रात भर ग्रुप के अधिकारियों में जिले व अमरोहा में छापेमारी करती रही, लेकिन कोई नहीं मिला। पुलिस की छापेमारी से मिल कर्मचारियों में हड़कंप मचा रहा।

वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल पर किसानों का पिछले साल का 62 करोड़ रुपया बकाया है। सॉफ्ट लोन न मिलने तक मिल अधिकारियों ने भुगतान से हाथ खड़े कर रखे हैं। मिल अधिकारी ऐसी स्थिति में किसानों के बीच जाने से भी बच रहे हैं। बृहस्पतिवार को होने वाली महापंचायत को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी मिल वालों से बात करना चाहते थे। अधिकारियों ने मिल अफसरों को फोन किए तो मिल अफसरों ने फोन नहीं उठाए और बाद में नंबर बंद कर दिया। मिल अफसर भूमिगत हो गए। इससे प्रशासनिक अधिकारी भी हैरत में रह गए। उन्होंने मिल अधिकारियों की तलाश में चांदपुर व बिजनौर मिल में पुलिस भेजी, लेकिन वहां कोई अधिकारी नहीं मिला। इसके बाद कर्मचारियों से जानकारी लेकर अधिकारियों के हर संभावित ठिकाने पर जिले भर में छापेमारी की गई, लेकिन मिल का कोई भी अफसर हाथ नहीं आया। फिर पुलिस को अमरोहा में मंडी धनौरा क्षेत्र में भेजा गया लेकिन वहां भी कोई नहीं मिला। पंचायत खत्म होने के बाद भी मिल अधिकारियों के नंबर बंद रहे। मिल अफसरों के नंबर बंद होने पर स्टेनो आदि के हाथ में ही बृहस्पतिवार को मिलों की कमान रही। पंचायत में वार्ता के समय जब किसानों ने मिल वालों को बुलाने को कहा तो पुलिसकर्मी भी एक दूसरे का मुंह देखने लगे। बाद में मिलों के स्टेनो, क्लर्क को ही महापंचायत में लाया गया।
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