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फसलों के अवशेष न जलाएं किसान

Fri, 22 Oct 2021 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 12:03 AM IST
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Farmers should not burn crop residues
फसलों के अवशेष न जलाएं किसान
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नगीना। कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के वैज्ञानिकों द्वारा ग्राम अगरी ब्लॉक हल्दौर में फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने कहा कि किसान पराली, गन्ने की पत्तियां और अन्य अवशेषों को न जलाएं। इनको जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है।

डॉ. केके सिंह ने कहा कि वातावरण प्रदूषित होने के कारण इसका प्रभाव आम जनमानस पर पड़ता है। फसलों के अवशेषों को किसान यांत्रिक या जैविक माध्यम से खेत में समाहित करें। मृदा की उर्वरकता में वृद्धि होने के साथ ही वातावरण भी प्रदूषित नहीं होगा। जो किसान सरसों, गेहूं की बुवाई करने जा रहे हैं, वे गेहूं की बायोफोर्टीफाइड प्रजातियां प्रयोग में लाएं, क्योंकि ये प्रजातियां अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ इसमें हमारे शरीर के लिए आवश्यक जिंक, प्रोटीन, आयरन की मात्रा भरपूर मात्रा में प्रदान करतीं हैं। गेहूं की प्रजातियों में डीबीडब्ल्यू - 187, डीबीडब्ल्यूबीबीडब्ल्यू 303 और एचडी 3226 जैसी अधिक उत्पादकता वाली प्रजातियों का प्रयोग करें। योगेन्द्र पाल सिंह ने किसानों को जैविक खेती की जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता शूरवीर सिंह ने की।
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