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फूलों की खेती में किसानों को नुकसान, लागत बरकरार आमदनी जीरो
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फूलों की खेती में किसानों को नुकसान
बिजनौर। लॉकडाउन में किसानों को खेती की पूरी छूट मिलने के बाद भी फूलों की खेती करने वालों भारी को नुकसान हुआ है। कभी बड़े बड़े नेताओं के मंचों और शादी समारोहों को सुंदर बनाने और महकाने वाले फूल अब कूड़ी पर डालने पड़ रहे हैं। जिले में अगर फूलों से सेंट बनाने वाली प्रोसेसिंग यूनिट होती तो किसानों को इतना नुकसान न होता।
वेस्ट यूपी में जरबेरा, गुलाब, ग्लेडियोलस, कारनेशन, गेंदा आदि फूलों का उत्पादन किया जाता है। दिल्ली में इन फूूलों की बहुत डिमांड है। इसके अलावा जिले में होने वाले विवाह व अन्य कार्यक्रमों में भी इन फूलों की बड़े पैमाने पर खपत होती है। लेकिन लॉकडाउन में शादी, समारोह, धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम बंद हैं। फूलों की खपत जीरो हो गई है। जिले में दस किसान पॉली हाउस में फूलों की खेती करते हैं। इसके अलावा भी सैकड़ों हेक्टेयर जमीन में फूूलों की खेती होती है। खपत जीरो होने से फूल कूड़ी पर डालने पड़ रहे हैं। महंगे फूलों का अब खाद बनाना पड़ रहा है। जिले में फूलों से सेंट या अन्य पदार्थ बनाने वाले कोई प्रोसिंग यूनिट भी नहीं है। इस वजह से फूलों का कोई दूसरा इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा है।
हुआ भारी नुकसान
गांव अगरी में फूलों की खेती करने वाले अखिलेश चौधरी बताते हैं कि फूलों का जीवन चक्र पांच से सात दिन का होता है। अगर तैयार फूलों को काटा न जाए तो यह गलते हैं और पौधों में बीमारी फैला देते हैं। आमदनी खत्म होने के बाद भी पौधों की छटाई आदि में पहले के बराबर लागत आ रही है। इस सीजन में अब तक 20 से 25 लाख रुपये तक का नुकसान हो चुका है।
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खोज रहे प्रोसिंग यूनिट
जिला उद्यान अधिकारी नरपाल सिंह मलिक का कहना है कि आसपास के जिलों में प्रोसेसिंग यूनिट का पता लगाया जा रहा है। प्रोसेसिंग यूनिट मिली तो किसानों को थोड़ी राहत मिल जाएगी। फूलों की खेती का सबसे बड़ा बाजार शादी व अन्य कार्यक्रम ही होते हैं।
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बिजनौर। लॉकडाउन में किसानों को खेती की पूरी छूट मिलने के बाद भी फूलों की खेती करने वालों भारी को नुकसान हुआ है। कभी बड़े बड़े नेताओं के मंचों और शादी समारोहों को सुंदर बनाने और महकाने वाले फूल अब कूड़ी पर डालने पड़ रहे हैं। जिले में अगर फूलों से सेंट बनाने वाली प्रोसेसिंग यूनिट होती तो किसानों को इतना नुकसान न होता।
वेस्ट यूपी में जरबेरा, गुलाब, ग्लेडियोलस, कारनेशन, गेंदा आदि फूलों का उत्पादन किया जाता है। दिल्ली में इन फूूलों की बहुत डिमांड है। इसके अलावा जिले में होने वाले विवाह व अन्य कार्यक्रमों में भी इन फूलों की बड़े पैमाने पर खपत होती है। लेकिन लॉकडाउन में शादी, समारोह, धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम बंद हैं। फूलों की खपत जीरो हो गई है। जिले में दस किसान पॉली हाउस में फूलों की खेती करते हैं। इसके अलावा भी सैकड़ों हेक्टेयर जमीन में फूूलों की खेती होती है। खपत जीरो होने से फूल कूड़ी पर डालने पड़ रहे हैं। महंगे फूलों का अब खाद बनाना पड़ रहा है। जिले में फूलों से सेंट या अन्य पदार्थ बनाने वाले कोई प्रोसिंग यूनिट भी नहीं है। इस वजह से फूलों का कोई दूसरा इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा है।
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हुआ भारी नुकसान
गांव अगरी में फूलों की खेती करने वाले अखिलेश चौधरी बताते हैं कि फूलों का जीवन चक्र पांच से सात दिन का होता है। अगर तैयार फूलों को काटा न जाए तो यह गलते हैं और पौधों में बीमारी फैला देते हैं। आमदनी खत्म होने के बाद भी पौधों की छटाई आदि में पहले के बराबर लागत आ रही है। इस सीजन में अब तक 20 से 25 लाख रुपये तक का नुकसान हो चुका है।
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खोज रहे प्रोसिंग यूनिट
जिला उद्यान अधिकारी नरपाल सिंह मलिक का कहना है कि आसपास के जिलों में प्रोसेसिंग यूनिट का पता लगाया जा रहा है। प्रोसेसिंग यूनिट मिली तो किसानों को थोड़ी राहत मिल जाएगी। फूलों की खेती का सबसे बड़ा बाजार शादी व अन्य कार्यक्रम ही होते हैं।