{"_id":"5c5889a5bdec22737c2910e1","slug":"farmers-demanded-payment-to-be-beaten-with-sticks-in-bijnor","type":"story","status":"publish","title_hn":"भुगतान मांग रहे किसानों को लाठियों से पीटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भुगतान मांग रहे किसानों को लाठियों से पीटा
Tue, 05 Feb 2019 12:21 AM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Tue, 05 Feb 2019 12:21 AM IST
विज्ञापन
बिजनौर कलक्ट्रेट में आत्मदाह के लिए चिता पर बैठे किसानों को हटाती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में करीब आधा घंटा तक लकड़ी छिनने को लेकर पुलिसबल व किसान आपस में भिड़ते रहे। किसानों ने जमकर हंगामा करते हुए पुलिस के लकड़ी छीनने का विरोध किया। किसानों के हाथ में लाइटर, माचिस दिखते ही पुलिस के हाथपांव फूल गए। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और किसानों पर पानी की बौछार करके लाठीचार्ज कर दिया। किसानों पर लाठीचार्ज से कलक्ट्रेट में एक बार को भगदड़ मच गई। कर्मचारियों की भीड़ कलक्ट्रेट में जम गई। जो जनता अपनी समस्याएं लेकर कलक्ट्रेट में आई थी, वह पुलिस के लाठीचार्ज करते ही डरकर भाग खड़ी हुई। सादी कपड़ों में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों ने किसानों को थप्पड़ भी जड़े। कलक्ट्रेट में काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा। जिलेभर में किसानों पर लाठीचार्ज की खबर आग की तरह फैल गई।
सोमवार को आजाद किसान यूनियन के बैनर तले किसान गन्ना समिति में एकत्र हुए। किसानों ने चिता की लकड़ी ट्रैक्टर ट्राली में भरकर लाए थे। किसानों ने कलक्ट्रेट में सुसाइड नोट लिखा और एक बजे किसानों ने चिता की लकड़ी हाथ में लेकर इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए कलक्ट्रेट की ओर कूच कर दिया। गन्ना समिति व कलक्ट्रेट पर भारी पुलिसबल तैनात था, लेकिन किसानों को नहीं रोका गया।
किसानों ने डीएम कार्यालय के सामने लकड़ियों से चिता लगा दी और उस पर लेटने लगे। एसडीएम बृजेश कुमार व सीओ सिटी महेश कुमार पुलिसबल के साथ लकड़ी उठवाने लगे। इस दौरान किसानों व पुलिस में खींचतान शुरू हो गई। कुछ किसानों ने अपने हाथ में माचिस और लाइटर निकाल लिए और एक किसान ने अपनी लोई में आग भी लगा ली। पुलिस ने तुरंत लाइटर आदि छीने व लोई की आग बुझाई। किसानों को अड़ता देखकर प्रशासन ने किसानों पर वाटर केनन से पानी की बौछार कर दी। इसके बाद भी काफी किसान चिता के पास इकट्ठा रहे तो प्रशासन ने उन्हें जबरन वहां से हटाया। कुछ किसानों ने वाटर केनन का पाइप बीच में से निकालकर पुलिस पर ही पानी की बौछार कर दी।
विज्ञापन
इस पर पुलिस ने किसानों पर लाठी बरसानी शुरू कर दी। किसानों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा। कुछ किसानों ने भी पुलिस पर चिता की लकड़ियों से वार किए। मारपीट और हंगामे के दौरान कुछ किसान जान बचाकर गन्ना समिति में पहुंच गए तो वहां भी पुलिसकर्मी उन्हें लाठी से पीटते हुए निकाल लाए। पुलिस ने कलक्ट्रेट से आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेेंद्र सिंह समेत आठ लोगों को हिरासत में लिया है। प्रशासन ने कलक्ट्रेट में भारी पुलिसबल तैनात कर रखा है।
62 करोड़ रुपये बकाया है वेव ग्रुप पर
वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल ने करीब 62 करोड़ का भुगतान नहीं किया है। आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने 27 जनवरी को बैठक कर भुगतान न करने पर कलक्ट्रेट में चिता लगाकर आत्मदाह की चेतावनी दी थी। किसानों की इस दौरान कई बार प्रशासन से वार्ता हुई, लेकिन भुगतान न होने से वार्ता विफल रही।
10 दिन में करा देंगे भुगतान : डीएम
डीएम अटल कुमार राय का कहना है कि जिले की नौ में से सात मिलों ने पिछले साल का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। वेव ग्रुप की चीनी मिलों पर ही बकाया है। मुख्यमंत्री ने खुद डिफाल्टर चीनी मिलों की बैठक ली है। किसानों से वार्ता करके 11 फरवरी तक का समय दिया गया था। किसानों ने कलक्ट्रेट में चिता बनाकर आत्मदाह का प्रयास किया। आत्मदाह करना अपराध है। पुलिस ने सतर्कता से किसानों को आत्मदाह करने से रोका है। इस प्रयास में न्यूनतम स्तर का पुलिस बल इस्तेमाल किया गया है। भुगतान दिलाने के लिए जिला प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है। किसानों का भुगतान हर हालत में अगले आठ दस दिन में करा दिया जाएगा।
लिखे सुसाइड नोट
कलक्ट्रेट जाने से पहले आजाद किसान यूनियन के दर्जनों नेताओं ने सुसाइड नोट लिखे। किसानों ने अपना व गांव का नाम लिखते हुए कहा कि उन्हें मिल की गलत नीति के कारण भुगतान न मिलने से आत्मदाह करने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके पूर्ण रूप से जिम्मेदार बिजनौर मिल मालिक, गन्ना मंत्री सुरेश राणा व जिला गन्ना अधिकारी हैं। वे अपनी खुशी से आत्मदाह नहीं कर रहे हैं। इन लोगों ने उन्हें आत्मदाह के लिए मजबूर किया गया है। भुगतान न होने से वे अपने परिवार का पालन पोषण नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन
सोमवार को आजाद किसान यूनियन के बैनर तले किसान गन्ना समिति में एकत्र हुए। किसानों ने चिता की लकड़ी ट्रैक्टर ट्राली में भरकर लाए थे। किसानों ने कलक्ट्रेट में सुसाइड नोट लिखा और एक बजे किसानों ने चिता की लकड़ी हाथ में लेकर इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए कलक्ट्रेट की ओर कूच कर दिया। गन्ना समिति व कलक्ट्रेट पर भारी पुलिसबल तैनात था, लेकिन किसानों को नहीं रोका गया।
विज्ञापन
किसानों ने डीएम कार्यालय के सामने लकड़ियों से चिता लगा दी और उस पर लेटने लगे। एसडीएम बृजेश कुमार व सीओ सिटी महेश कुमार पुलिसबल के साथ लकड़ी उठवाने लगे। इस दौरान किसानों व पुलिस में खींचतान शुरू हो गई। कुछ किसानों ने अपने हाथ में माचिस और लाइटर निकाल लिए और एक किसान ने अपनी लोई में आग भी लगा ली। पुलिस ने तुरंत लाइटर आदि छीने व लोई की आग बुझाई। किसानों को अड़ता देखकर प्रशासन ने किसानों पर वाटर केनन से पानी की बौछार कर दी। इसके बाद भी काफी किसान चिता के पास इकट्ठा रहे तो प्रशासन ने उन्हें जबरन वहां से हटाया। कुछ किसानों ने वाटर केनन का पाइप बीच में से निकालकर पुलिस पर ही पानी की बौछार कर दी।
विज्ञापन
इस पर पुलिस ने किसानों पर लाठी बरसानी शुरू कर दी। किसानों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा। कुछ किसानों ने भी पुलिस पर चिता की लकड़ियों से वार किए। मारपीट और हंगामे के दौरान कुछ किसान जान बचाकर गन्ना समिति में पहुंच गए तो वहां भी पुलिसकर्मी उन्हें लाठी से पीटते हुए निकाल लाए। पुलिस ने कलक्ट्रेट से आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेेंद्र सिंह समेत आठ लोगों को हिरासत में लिया है। प्रशासन ने कलक्ट्रेट में भारी पुलिसबल तैनात कर रखा है।
62 करोड़ रुपये बकाया है वेव ग्रुप पर
वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल ने करीब 62 करोड़ का भुगतान नहीं किया है। आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने 27 जनवरी को बैठक कर भुगतान न करने पर कलक्ट्रेट में चिता लगाकर आत्मदाह की चेतावनी दी थी। किसानों की इस दौरान कई बार प्रशासन से वार्ता हुई, लेकिन भुगतान न होने से वार्ता विफल रही।
10 दिन में करा देंगे भुगतान : डीएम
डीएम अटल कुमार राय का कहना है कि जिले की नौ में से सात मिलों ने पिछले साल का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। वेव ग्रुप की चीनी मिलों पर ही बकाया है। मुख्यमंत्री ने खुद डिफाल्टर चीनी मिलों की बैठक ली है। किसानों से वार्ता करके 11 फरवरी तक का समय दिया गया था। किसानों ने कलक्ट्रेट में चिता बनाकर आत्मदाह का प्रयास किया। आत्मदाह करना अपराध है। पुलिस ने सतर्कता से किसानों को आत्मदाह करने से रोका है। इस प्रयास में न्यूनतम स्तर का पुलिस बल इस्तेमाल किया गया है। भुगतान दिलाने के लिए जिला प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है। किसानों का भुगतान हर हालत में अगले आठ दस दिन में करा दिया जाएगा।
लिखे सुसाइड नोट
कलक्ट्रेट जाने से पहले आजाद किसान यूनियन के दर्जनों नेताओं ने सुसाइड नोट लिखे। किसानों ने अपना व गांव का नाम लिखते हुए कहा कि उन्हें मिल की गलत नीति के कारण भुगतान न मिलने से आत्मदाह करने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके पूर्ण रूप से जिम्मेदार बिजनौर मिल मालिक, गन्ना मंत्री सुरेश राणा व जिला गन्ना अधिकारी हैं। वे अपनी खुशी से आत्मदाह नहीं कर रहे हैं। इन लोगों ने उन्हें आत्मदाह के लिए मजबूर किया गया है। भुगतान न होने से वे अपने परिवार का पालन पोषण नहीं कर पा रहे हैं।