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न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल गारंटी के लिए है किसान आंदोलन

Tue, 01 Dec 2020 11:26 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Dec 2020 11:26 PM IST
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Farmer's movement for crop guarantee at minimum support price
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल गारंटी के लिए है किसान आंदोलन
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बिजनौर। कृषि कानून के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन में जिले के किसान भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। लेकिन किसानों की असली मांग इन बिलों को वापस कराना नहीं है। किसानों की मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की गारंटी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू कराना है।
भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिकने की गारंटी चाहिए। न्यूनतम समर्थन मूल्य को गन्ना, गेहूं और धान का भी है लेकिन किसान को फिर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों को दिलाना सरकार का काम है। सरकार बाकी उत्पादों को तो कम कीमत पर नहीं बिकने देती तो किसानों की फसल की बेकदरी क्यों हो रही है। हर फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिकने की गारंटी होनी चाहिए। न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर खरीद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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भाकियू अंबावता जिलाध्यक्ष विजय सिंह का कहना है कि सरकार को व्यापारियों की फसल भंडारण की सीमा तय करनी चाहिए। ऐसा न करने पर व्यापारी जनता को लूटेंगे। स्वामीनाथन आयोग की शर्तें भी हर हाल में लागू होनी चाहिए। फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य किसान को मिलना चाहिए।
भाकियू भानू जिलाध्यक्ष कुलबीर सिंह का कहना है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की गारंटी होनी चाहिए। लॉकडाउन के समय तो सहकारी, प्राइवेट डेरियों तक ने किसानों से दूध खरीदना बंद कर दिया था। सारे नुकसान किसानों के हिस्से में ही आते हैं।
भाकियू लोकशक्ति जिलाध्यक्ष वीर सिंह का कहना है कि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री की मांग सालों से कर रहे हैं। धान और गेहूं के न्यूनतम मूल्य निर्धारित होने के बाद भी ये दोनों फसल कम कीमत पर बिक रही हैं। फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य जब सरकार तय कर रही तो मूल्य दिलाना भी सरकार का ही काम है।

आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विरेंद्र सिंह का कहना है कि फसल खरीदने के लिए क्रय केंद्र समय पर खुलने चाहिए। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही फसल बिके और समय पर भुगतान मिले। किसानों के आंदोलन के बावजूद सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री की गारंटी लेने को तैयार नहीं है।
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