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UP : बिजनौर कई बार आए थे मशहूर शायर मुनव्वर राणा, पढ़िए उनसे जुड़ीं यादें

Mon, 15 Jan 2024 01:59 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Published by: कपिल kapil Updated Mon, 15 Jan 2024 01:59 PM IST
सार

Meerut News : मुनव्वर राणा को पूरी दुनिया में उर्दू अदब में विशेष मुकाम हासिल रहा। मुनव्वर राणा कई बार बिजनौर आए थे।

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Famous poet Munawwar Rana had visited Bijnor many times and read memories related to him
बिजनौर आए थे मुनव्वर राणा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मशहूर शायर मुनव्वर राणा का रविवार की रात्रि देहांत हो गया। मुनव्वर राणा को पूरी दुनिया में उर्दू अदब में विशेष मुकाम हासिल रहा। मुनव्वर राणा कई बार बिजनौर आए। अंतिम बार छह अक्तूबर 2018 को गोपाल दास नीरज की याद में हुए मुशायरे में मुनव्वर राणा ने भाग लिया था। इस मुशायरे की अध्यक्षता शमशाद अंसारी और संचालन शायर फाकिर अदीब ने किया था।

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इस दौरान वह सिंचाई विभाग के डाक बंगले में ठहरे थे। इंदिरा बल भवन में आयोजित हुए मुशायरे में उन्हें सुनने के लिए काफी तादाद में लोग पहुंचे थे। मुशायरे में उन्होंने खुद को मुखातिब कर शेर पढ़ा था "खुद अपने आप को शादाब करना चाहता है, फकीर आपको आदाब करना चाहता है"। मुशायरे में जब उन्होंने मां से जुड़े शेर पढ़े थे तब लोगों की आंखें नम हो गई थीं। मुशायरे में उन्होंने अपने घुटने के हुए ऑपरेशन का जिक्र भी किया था।
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फूलों जैसा था मुनव्वर राणा का मिजाज : फाकिर अदीब 
मुनव्वर राणा के साथ दर्जनों मुशायरों में पढ़ चुके फाकिर अदीब बताते हैं कि उनका मिजाज फूलों जैसा था। एक बार मुनव्वर राणा ने कहा था कि जैसा लहजा और आवाज फाकिर अदीब के पास है, यह अंदाज पूरी दुनिया में फैलना चाहिए। वह हमेशा नवोदित शायरों को प्रोत्साहित करते थे।
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बुल्ला के चौराहे की चाय याद रही
बिजनौर के शायर मेराज बिजनौरी बताते हैं कि जब 2018 में मुनव्वर राणा बिजनौर आए थे। उस समय उन्होंने बुल्ला के चौराहे पर मौजूद दुकान की चाय पीने की इच्छा जाहिर की थी। जिसके बाद उन्हें बुल्ला के चौराहे पर मौजूद शफीक अहमद की दुकान से लाकर चाय पिलाई गई थी। तब मुनव्वर राणा ने बताया था कि उन्हें बुल्ला का चौराहा याद रहा लेकिन, वह दुकानदार का नाम भूल गए। लेकिन बरसों पहले पी हुई चाय का जायका आज भी वैसा ही है। मुनव्वर राणा की मृत्यु पर शायरों और कवियों ने शोक व्यक्त किया।

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