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नियमों को ताक पर रखकर तंग गलियों में चल रहे कारखाने
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नियमों को ताक पर रखकर तंग गलियों में चल रहे कारखाने
बिजनौर। जिले में भी कई जगहों पर नियमों को ताक पर रखकर कारखाने चल रहे हैं। तंग गलियों में छोटे-छोटे कारखाने चलते हैं। नहटौर व चांदपुर समेत जिले में कई जगहों पर मोहल्लों में ही अवैध तरीके से आतिशबाजी बनाने का काम होता है। जिले में बहुमंजिला भवनों में आग से बचने के लिए कोई साधन नहीं हैं। यहां तक कि फायर एक्सटेनगूशर तक नहीं लगे हैं।
जिले में करीब साढ़े तीन हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। गली-मोहल्लों में नियमों को ताक पर रखकर छोटे-मोटे कारखाने चल रहे हैं। अगर कोई हादसा हो जाए तो कारखानों में आग से बचाव के कोई साधन तक नहीं है। शहर व कस्बों से लेकर गांवों तक की गलियां इतनी तंग होती हैं कि वहां पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक नहीं जा पाती है। इसके अलावा कारखानों में तकनीकी काम भी गैर प्रशिक्षित लोग करते हैं। पिछले साल मोहित पेट्रो केमिकल प्लांट में एक टैंक में वेल्डिंग करते समय विस्फोट होने से कई मजदूरों की मौत हो गई थी। नहटौर में आतिशबाजी बनाने के दौरान विस्फोट होने से जान माल का नुकसान होना कोई नई बात नहीं है। जहां आतिशबाजी बनाई जाती हैं वहां आग बुझाने के लिए फायर एक्सटेनगूशर तक नहीं होता है। गली मोहल्लों में चलने वाले छोटे मोटे कारखानों पर प्रशासन कभी ध्यान नहीं देता है। इसके अलावा शहरों में बड़े भवनों में चलने वाले कोचिंग सेंटरों में भी मानकों को ताक पर रखा जाता है। यहां भी आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं होते हैं। इस साल की शुरूआत में ही कोचिंग सेंटर संचालकों को सुधार के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जिले में नियम ताक पर रखकर बड़े भवन बनाए जा रहे हैं। तमाम भवन बन गए हैं। अगर इनमें आग लग जाए तो आग बुझाने काकोई इंतजाम नहीं है। खुद ही लोगों को आग बुझाने के लिए जूझना पड़ेगा।
गलियों में फायर हाईडेंट से बुझेगी आग
मुख्य अग्निशमन अधिकारी संतोष राय के मुताबिक पूरे जिले में 121 फायर हाईडेंट हैं। गलियों में आग लगने पर नगर पालिकाओं को अपने ट्यूबवेल चलाने होंगे तक उन हाईडेंट से आग बुझाई जा सकती है। बहुमंजिला इमारत में आग लगने पर बचाव के लिए एक ही 35 फीट की सीढ़ी है। बिजनौर में शॉपर्स प्राइड को छोड़कर पूरे जिले में कोई बहुमंजिला इमारत नहीं है। हर तहसील में फायर टेंडर हैं। तंग गलियों में आग बुझाने के लिए एक माउंटेड बुलेट और मिली है।
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बिजनौर। जिले में भी कई जगहों पर नियमों को ताक पर रखकर कारखाने चल रहे हैं। तंग गलियों में छोटे-छोटे कारखाने चलते हैं। नहटौर व चांदपुर समेत जिले में कई जगहों पर मोहल्लों में ही अवैध तरीके से आतिशबाजी बनाने का काम होता है। जिले में बहुमंजिला भवनों में आग से बचने के लिए कोई साधन नहीं हैं। यहां तक कि फायर एक्सटेनगूशर तक नहीं लगे हैं।
जिले में करीब साढ़े तीन हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। गली-मोहल्लों में नियमों को ताक पर रखकर छोटे-मोटे कारखाने चल रहे हैं। अगर कोई हादसा हो जाए तो कारखानों में आग से बचाव के कोई साधन तक नहीं है। शहर व कस्बों से लेकर गांवों तक की गलियां इतनी तंग होती हैं कि वहां पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक नहीं जा पाती है। इसके अलावा कारखानों में तकनीकी काम भी गैर प्रशिक्षित लोग करते हैं। पिछले साल मोहित पेट्रो केमिकल प्लांट में एक टैंक में वेल्डिंग करते समय विस्फोट होने से कई मजदूरों की मौत हो गई थी। नहटौर में आतिशबाजी बनाने के दौरान विस्फोट होने से जान माल का नुकसान होना कोई नई बात नहीं है। जहां आतिशबाजी बनाई जाती हैं वहां आग बुझाने के लिए फायर एक्सटेनगूशर तक नहीं होता है। गली मोहल्लों में चलने वाले छोटे मोटे कारखानों पर प्रशासन कभी ध्यान नहीं देता है। इसके अलावा शहरों में बड़े भवनों में चलने वाले कोचिंग सेंटरों में भी मानकों को ताक पर रखा जाता है। यहां भी आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं होते हैं। इस साल की शुरूआत में ही कोचिंग सेंटर संचालकों को सुधार के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जिले में नियम ताक पर रखकर बड़े भवन बनाए जा रहे हैं। तमाम भवन बन गए हैं। अगर इनमें आग लग जाए तो आग बुझाने काकोई इंतजाम नहीं है। खुद ही लोगों को आग बुझाने के लिए जूझना पड़ेगा।
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गलियों में फायर हाईडेंट से बुझेगी आग
मुख्य अग्निशमन अधिकारी संतोष राय के मुताबिक पूरे जिले में 121 फायर हाईडेंट हैं। गलियों में आग लगने पर नगर पालिकाओं को अपने ट्यूबवेल चलाने होंगे तक उन हाईडेंट से आग बुझाई जा सकती है। बहुमंजिला इमारत में आग लगने पर बचाव के लिए एक ही 35 फीट की सीढ़ी है। बिजनौर में शॉपर्स प्राइड को छोड़कर पूरे जिले में कोई बहुमंजिला इमारत नहीं है। हर तहसील में फायर टेंडर हैं। तंग गलियों में आग बुझाने के लिए एक माउंटेड बुलेट और मिली है।
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