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आंखों के लिए लेंस हैं, दवाइयां नहीं

Tue, 12 Oct 2021 12:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Oct 2021 12:51 AM IST
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Eyes are lenses, not medicines
आंखों के लिए लेंस हैं, दवाइयां नहीं
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बिजनौर। कोरोना की दूूसरी लहर थमने के तीन महीने बाद भी जिला अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन शुरू नहीं हो सके हैं। जबकि ओपीडी प्रतिदिन हो रही है। आंखों के ऑपरेशन के लिए लोगों की वेटिंग 400 के पार जा चुकी है। इन लोगों के ऑपरेशन कब होंगे, तारीख तक नहीं बताई जा रही है। दरअसल, अस्पताल में आंखों में लगाने के लिए लेंस तो हैं, लेकिन ऑपरेशन में काम आने वाली उपयोगी दवाइयां और उपकरण नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार डिमांड भेजी जा रही है, लेकिन यह सामान शासन स्तर से नहीं भेजा जा रहा है। जिसकी वजह से ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।
जिले के स्वास्थ्य विभाग में आंखों के उपचार की सुविधा केवल जिला चिकित्सालय में ही उपलब्ध है। जिला अस्पताल में आंखों के उपचार के लिए हर रोज सैकड़ों मरीज आते हैं। इन मरीजों की जांच होती है और आंखों के ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया जाता है। ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को लेंस, चश्मा आदि आवश्यक चीजें जिला अस्पताल से ही मिलती हैं। कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद से जिला अस्पताल में आंखों का एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ है।
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शासन की ओर से ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां अब तक नहीं भेजी गई हैं, जबकि इसकी डिमांड काफी पहले की जा चुकी है। ऑपरेशन के लिए जो मरीज चिह्नित किए जा रहे हैं, उन्हें केवल वेटिंग लिस्ट में शामिल किया जा रहा है। उन्हें ऑपरेशन के लिए कोई तारीख तक नहीं दी जा रही है। जिन लोगों को वेटिंग लिस्ट में शामिल किया गया है वे भी बार-बार अस्पताल आकर पता कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कोई तारीख नहीं मिल पाती है। उन्हें सामान आने के बाद सूचित देने की बात कहकर घर भेज दिया जाता है।
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अभी और करना होगा इंतजार
जिला अस्पताल में आंखों के दो चिकित्सक हैं। दोनों करीब 200 मरीज देखते हैं। इनमें से करीब 15 मरीज हर रोज ऑपरेशन के लिए चिह्नित किए जाते हैं। ऑपरेशन के लिए अस्पताल में लेंस तो हैं, लेकिन आवश्यक दवाइयां नहीं हैं। बिना दवाइयों के ऑपरेशन नहीं हो सकता है। जब सामान आ जाएगा तब भी इतने ज्यादा केस जल्दी से जल्दी निपटाना आसान नहीं होगा। मरीजों के जल्द से जल्द ऑपरेशन करने में विभागीय अफसरों को काफी मशक्कत करनी होगी। वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. मनोज सेन के अनुसार हर रोज करीब दस प्रतिशत मरीज मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए चिह्नित होते हैं। दवाई न होने पर उन्हें वेटिंग लिस्ट में शामिल किया जा रहा है। सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय के अनुसार दवाइयों के लिए सीएमओ कार्यालय को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। दवाई मिलने पर ही ऑपरेशन शुरू हो पाएंगे।
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