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रामराज में भी नहीं मिल रहे फसल के सही दाम

Fri, 09 Oct 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2020 12:03 AM IST
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Even Ramraj is not getting the right price for the crop
रामराज में भी नहीं मिल रहे फसल के सही दाम
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बिजनौर। धान की बड़ी मंडी समझी जाने वाली रामराज मंडी में भी बासमती धान की कद्र नहीं हो रही है। यह हाल तब है जब पंजाब में गर्मी की वजह से धान की फसल में रोग आ चुका है और उत्पादन कम है। जिले के किसान रामराज मंडी में फसल ले जाकर बेचने के बाद भी धान की लागत भी वसूल नहीं कर पा रहे हैं। सरकारी केंद्रों पर धान की खरीद हुई तो मोटे धान का बाजार सुधर गया, लेकिन बासमती धान का हाल खराब है।
2013 में बासमती की फसल 4200 रुपये क्विंटल में बेचने वाले शूरवीर सिंह का कहना है कि उन्होंने 20 बीघा धान बोया है। रेट पता कराया तो नगीना वल्लभ बासमती धान का रेट 1900 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। पिछले साल 2800 रुपये क्विंटल में फसल बेची थी। फसल कट रही है। अगर कटने तक धान के रेट नहीं सुधरे तो बहुत नुकसान उठाना होगा। गांव काजीवाला निवासी देवेंद्र सिंह ने बासमती की 1509 प्रजाति रामराज में 1900 रुपये प्रति क्विंटल में बेची है। सात बीघा में धान बोया था। वे बताते हैं माल की ढुलाई में ही पहले से ज्यादा पैसे लगे हैं। वे चाहते भी थे कि बासमती को मोटे धान के रेट में बेच दें लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों पर किसान को परेशान किया जाता है। पिछले साल क्रय केंद्र पर मोटा धान ले गए तो कभी कूड़ा तो कभी नमी बताकर धान लौटा दिया जाता था। बाद में मोटा धान रामराज में ही कम कीमत पर बेचना पड़ा था।
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गांव नेकपुर निवासी विनोद कुमार ने पांच बीघा 1509 बासमती बोया है। उनका कहना है कि धान का रेट रामराज में भी 1509 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। इतने कम में फसल नहीं बेचेंगे। अब अपनी फसल को अपने घर में ही रखेंगे। गांव वीरूवाला निवासी सरदार इकबाल सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 एकड़ मोटा धान बोया है। धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन धान बोने में बहुत जद्दोजहद करनी पड़ती है। धान में नमी बताकर बार बार फसल को लौटा दिया जाता है। वे अपने खेत में ही धान की फसल को सुखा रहे हैं। कहा कि किसान के पास फसल के भंडारण की व्यवस्था नहीं है। इसलिए व्यापारी अपनी मनमर्जी करते हैं।
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किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान
गांव बालापुर अखेड़ा निवासी किसान गुरबाज सिंह का कहना है कि उन्होंने 100 बीघा जमीन में बासमती व 80 बीघा जमीन में मोटा धान बोया था। धान की फसल अगेती तैयार होने पर कंबाइन से कटवाई थी। इसमें थोड़ी नमी होती है। सरकारी क्रय केंद्र शुरू नहीं हुए थे। उन्हें फसल रामराज में 1250 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचनी पड़ी। कंबाइन से कटी बासमती का दाम भी हाथ से कटी फसल के मुकाबले कम मिला। बाकी किसानों को बासमती का दाम 1900 रुपये मिला, लेकिन उन्हें 1750 रुपये प्रति क्विंटल पर धान बेचना पड़ा। वे बताते हैं कि पिछले साल कंबाइन से कटी फसल का दाम भी 2700 रुपये प्रति क्विंटल मिला था। इस बार बहुत नुकसान उठाना पड़ा है।
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