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‘कैट ल्योर’ लगाने के बाद भी नहीं फंसी मादा गुलदार
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‘कैट ल्योर’ लगाने के बाद भी नहीं फंसी मादा गुलदार
बिजनौर। गांव मोहंडिया के जंगल में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरों में कैट ल्योर लगाने के बाद भी गुलदार पिंजरों की ओर नहीं आई। बारिश से कैट ल्योर की गंध भी धुलने की संभावना है। अब गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग के पास ट्रैंकुलाइज करने के अलावा और कोई रास्ता बचता नजर नहीं आ रहा है।
गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग का हर हथकंडा विफल होता जा रहा है। आमतौर पर किसी गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे नियमित लगे रहे और गुलदार एक ही जगह रहे तो एक सप्ताह तक का ही समय लगता है। लेकिन मोहंडिया में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए करीब 15 दिन हो चुके हैं। मादा गुलदार वहां पर कई बार देखी भी जा चुकी है, लेकिन वह पिंजरों की ओर जाकर भी अंदर नहीं जा रही है। पहले गुलदार को पकड़ने के लिए मुर्गे के बाद बकरे बांधे गए। पहले वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों के कहने पर वन विभाग ने पिंजरों के बाहर मांस डलवाया, लेकिन मादा गुलदार नहीं आई। मंगलवार को गुलदार को आकर्षित करने के लिए पिंजरों में कैट ल्योर की गंध लगवाई गई थी। यह गुलदार के मूत्र में मिलने वाले केमिकल से विदेशों में लैब में बनाया जाता है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों ने यह वन विभाग के कर्मचारियों को भेजवाया था। मंगलवार को कैट ल्योर पिंजरों में लगवा दिया गया था। वन विभाग के कर्मचारियों को पूरी उम्मीद थी कि बुधवार को गुलदार पिंजरों में फंसी हुई मिलेगी, लेकिन गुलदार उस ओर आई ही नहीं। सुबह को पिंजरे खाली ही मिले। कुछ कर्मचारियों का कहना है गुलदार को ट्रैंकुलाइज करके पकड़ने का तरीका आसान है, लेकिन शासन ने अब तक उसकी अनुमति नहीं दी है। अनुमति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
दो नए पिंजरे बनवाए
वन विभाग ने मोहंडिया के जंगल में गुलदार को पकड़ने के लिए दो और पिंजरे बनवाए हैं। ये पिंजरे बृहस्पतिवार को लगाए जाएंगे। पहले से ही छह पिंजरे मोहंडिया के जंगल में लगाए गए हैं।
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पिंजरा लगवाया
किरतपुर में स्टेशन के पास दिख रहे गुलदार को पकड़ने के लिए भी वन विभाग सतर्क हो गया है। वहां गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा दिया गया है। बाकी जगह भी पूरी मुस्तैदी बरती जा रही है।
शासन को कराया जा रहा अवगत
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक गुलदार पिंजरों की ओर नहीं आई है। पूरी स्थिति के बारे में शासन को लगातार अवगत कराया जा रहा है।
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बिजनौर। गांव मोहंडिया के जंगल में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरों में कैट ल्योर लगाने के बाद भी गुलदार पिंजरों की ओर नहीं आई। बारिश से कैट ल्योर की गंध भी धुलने की संभावना है। अब गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग के पास ट्रैंकुलाइज करने के अलावा और कोई रास्ता बचता नजर नहीं आ रहा है।
गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग का हर हथकंडा विफल होता जा रहा है। आमतौर पर किसी गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे नियमित लगे रहे और गुलदार एक ही जगह रहे तो एक सप्ताह तक का ही समय लगता है। लेकिन मोहंडिया में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए करीब 15 दिन हो चुके हैं। मादा गुलदार वहां पर कई बार देखी भी जा चुकी है, लेकिन वह पिंजरों की ओर जाकर भी अंदर नहीं जा रही है। पहले गुलदार को पकड़ने के लिए मुर्गे के बाद बकरे बांधे गए। पहले वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों के कहने पर वन विभाग ने पिंजरों के बाहर मांस डलवाया, लेकिन मादा गुलदार नहीं आई। मंगलवार को गुलदार को आकर्षित करने के लिए पिंजरों में कैट ल्योर की गंध लगवाई गई थी। यह गुलदार के मूत्र में मिलने वाले केमिकल से विदेशों में लैब में बनाया जाता है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों ने यह वन विभाग के कर्मचारियों को भेजवाया था। मंगलवार को कैट ल्योर पिंजरों में लगवा दिया गया था। वन विभाग के कर्मचारियों को पूरी उम्मीद थी कि बुधवार को गुलदार पिंजरों में फंसी हुई मिलेगी, लेकिन गुलदार उस ओर आई ही नहीं। सुबह को पिंजरे खाली ही मिले। कुछ कर्मचारियों का कहना है गुलदार को ट्रैंकुलाइज करके पकड़ने का तरीका आसान है, लेकिन शासन ने अब तक उसकी अनुमति नहीं दी है। अनुमति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
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दो नए पिंजरे बनवाए
वन विभाग ने मोहंडिया के जंगल में गुलदार को पकड़ने के लिए दो और पिंजरे बनवाए हैं। ये पिंजरे बृहस्पतिवार को लगाए जाएंगे। पहले से ही छह पिंजरे मोहंडिया के जंगल में लगाए गए हैं।
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पिंजरा लगवाया
किरतपुर में स्टेशन के पास दिख रहे गुलदार को पकड़ने के लिए भी वन विभाग सतर्क हो गया है। वहां गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा दिया गया है। बाकी जगह भी पूरी मुस्तैदी बरती जा रही है।
शासन को कराया जा रहा अवगत
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक गुलदार पिंजरों की ओर नहीं आई है। पूरी स्थिति के बारे में शासन को लगातार अवगत कराया जा रहा है।