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भरत द्वार से अमानगढ़ में मिलेगा प्रवेश
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भरत द्वार से मिलेगा अमानगढ़ में प्रवेश
बिजनौर। जिले से जुड़े महापुरुषों को पहचान दिलाने के लिए प्रशासन ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। अक्तूबर से अमानगढ़ में जहां से पर्यटकों को प्रवेश दिया जाएगा, उस द्वार का नाम चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर होगा। बाहर से आने पर्यटक जहां वन्य जीवों का दीदार तो करेंगे ही, साथ ही भरत का जिले से जुड़ा इतिहास भी जान सकेंगे।
महात्मा विदुर के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नाम पहले ही रखा जा चुका है, तो कलक्ट्रेट में बन रहे सभागार को भी महात्मा विदुर को समर्पित कर दिया गया है। पौधरोपण हुआ तो गंगा किनारे दुष्यंत वन, शकुंतला वन भी लगाए गए। हिंदी गजलकार दुष्यंत कुमार के नाम पर जिला मुख्यालय पर पुस्तकालय भी बनाया गया। डीएम उमेश मिश्रा ने बताया कि भरत द्वार का निर्माण होने के बाद उस पर चक्रवर्ती सम्राट भरत के जिले से जुड़ाव का इतिहास और महाभारत व अभिज्ञान शाकुंतलम वर्णित तथ्य अंकित कराए जाएंगे।
अभिज्ञान शाकुंतलम में मिलता है जिक्र
महाभारत काल में महात्मा विदुर की कर्मस्थली जिला रहा है। गंगा और मालन (मालिनी) नदी के संगम पर ग्राम ब्रह्मापुरी रावली स्थित महर्षि कण्व का आश्रम राजा दुष्यंत एवं शकुंतला की प्रणय स्थली है। महाकवि कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञान शाकुंतलम में इसका वर्णन मिलता है। बताया जाता है कि उस समय यह पूरा वन्य क्षेत्र था। यहीं पर भरत का जन्म हुआ, जिनके नाम पर हमारे देश का भारत रखा गया। अभी जिले में इनका नाम पर कोई भवन आदि नहीं है, यह पहला मौका जब भरत का नाम कहीं अंकित किया जाएगा।
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अमानगढ़ में वन्य जीवों के करिए दीदार
अमानगढ़ में वन्य जीवों की संख्या पर नजर डालें तो यहां पर सौ से अधिक हाथी हैं। बाघों की संख्या 30 तक होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त हिरण, बारहसिंघा, चीतल, भालू, गुलदार, करीब 200 से ज्यादा प्रजाति के प्रवासी व देशी पक्षी, गिद्ध आदि देखने को मिलते हैं।
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बिजनौर। जिले से जुड़े महापुरुषों को पहचान दिलाने के लिए प्रशासन ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। अक्तूबर से अमानगढ़ में जहां से पर्यटकों को प्रवेश दिया जाएगा, उस द्वार का नाम चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर होगा। बाहर से आने पर्यटक जहां वन्य जीवों का दीदार तो करेंगे ही, साथ ही भरत का जिले से जुड़ा इतिहास भी जान सकेंगे।
महात्मा विदुर के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नाम पहले ही रखा जा चुका है, तो कलक्ट्रेट में बन रहे सभागार को भी महात्मा विदुर को समर्पित कर दिया गया है। पौधरोपण हुआ तो गंगा किनारे दुष्यंत वन, शकुंतला वन भी लगाए गए। हिंदी गजलकार दुष्यंत कुमार के नाम पर जिला मुख्यालय पर पुस्तकालय भी बनाया गया। डीएम उमेश मिश्रा ने बताया कि भरत द्वार का निर्माण होने के बाद उस पर चक्रवर्ती सम्राट भरत के जिले से जुड़ाव का इतिहास और महाभारत व अभिज्ञान शाकुंतलम वर्णित तथ्य अंकित कराए जाएंगे।
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अभिज्ञान शाकुंतलम में मिलता है जिक्र
महाभारत काल में महात्मा विदुर की कर्मस्थली जिला रहा है। गंगा और मालन (मालिनी) नदी के संगम पर ग्राम ब्रह्मापुरी रावली स्थित महर्षि कण्व का आश्रम राजा दुष्यंत एवं शकुंतला की प्रणय स्थली है। महाकवि कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञान शाकुंतलम में इसका वर्णन मिलता है। बताया जाता है कि उस समय यह पूरा वन्य क्षेत्र था। यहीं पर भरत का जन्म हुआ, जिनके नाम पर हमारे देश का भारत रखा गया। अभी जिले में इनका नाम पर कोई भवन आदि नहीं है, यह पहला मौका जब भरत का नाम कहीं अंकित किया जाएगा।
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अमानगढ़ में वन्य जीवों के करिए दीदार
अमानगढ़ में वन्य जीवों की संख्या पर नजर डालें तो यहां पर सौ से अधिक हाथी हैं। बाघों की संख्या 30 तक होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त हिरण, बारहसिंघा, चीतल, भालू, गुलदार, करीब 200 से ज्यादा प्रजाति के प्रवासी व देशी पक्षी, गिद्ध आदि देखने को मिलते हैं।

अमानगढ़ में घूमता चीतल का झुंड।- फोटो : BIJNOR