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दोपहर तक ही हांफ गया हाथी, हौसले हुए पस्त
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दोपहर तक ही हांफ गया हाथी, हौसले हुए पस्त
बिजनौर। जिले की आठ विधानसभा सीटों पर गठबंधन और भाजपा की सीधी टक्कर रही। हाथी एक भी सीट पर चल नहीं पाया और दोपहर होने तक ही हांफ गया। वोट नहीं मिलते देख बसपा के हौसले पस्त हो गए। बसपा के उम्मीदवार और उनके एजेंट पहले ही बाहर निकल गए। इन्होंने मतगणना खत्म होने का इंतजार भी नहीं किया।
बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हो गई। एक एक कर सभी विधानसभाओं की मतगणना के रुझान आने शुरू हो गए। जिले में चार सीटों पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया। चार सीटों पर सपा के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कराई। बसपा जिले में एक भी सीट पर अपना खाता नहीं खोल सकी। सभी सीटों पर बसपा तीसरे नंबर की पार्टी बन कर रह गई। हालांकि सभी सीटों पर बसपा ने ही समीकरण बिगाड़े और बनाए हैं। मुद्दे की बात करें तो जिले में हाथी चल ही नहीं पाया बल्कि हांफ भी गया। दोपहर होने तक बसपाइयों को अपनी हार दिखाई दे गई थी। उन्हें लगने लगा कि अब चुनावी दंगल से बाहर हो चुके हैं। इसी के चलते एक एक कर बसपा के उम्मीदवार मतगणना छोड़कर निकलते रहे। इनके एजेंट उम्मीदवारों से पहले ही हार मान चुके थे, जिन्होंने शाम तक ठहरना ठीक नहीं समझा।
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बिजनौर। जिले की आठ विधानसभा सीटों पर गठबंधन और भाजपा की सीधी टक्कर रही। हाथी एक भी सीट पर चल नहीं पाया और दोपहर होने तक ही हांफ गया। वोट नहीं मिलते देख बसपा के हौसले पस्त हो गए। बसपा के उम्मीदवार और उनके एजेंट पहले ही बाहर निकल गए। इन्होंने मतगणना खत्म होने का इंतजार भी नहीं किया।
बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हो गई। एक एक कर सभी विधानसभाओं की मतगणना के रुझान आने शुरू हो गए। जिले में चार सीटों पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया। चार सीटों पर सपा के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कराई। बसपा जिले में एक भी सीट पर अपना खाता नहीं खोल सकी। सभी सीटों पर बसपा तीसरे नंबर की पार्टी बन कर रह गई। हालांकि सभी सीटों पर बसपा ने ही समीकरण बिगाड़े और बनाए हैं। मुद्दे की बात करें तो जिले में हाथी चल ही नहीं पाया बल्कि हांफ भी गया। दोपहर होने तक बसपाइयों को अपनी हार दिखाई दे गई थी। उन्हें लगने लगा कि अब चुनावी दंगल से बाहर हो चुके हैं। इसी के चलते एक एक कर बसपा के उम्मीदवार मतगणना छोड़कर निकलते रहे। इनके एजेंट उम्मीदवारों से पहले ही हार मान चुके थे, जिन्होंने शाम तक ठहरना ठीक नहीं समझा।
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