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गड़बड़ाया गांवों की विद्युत आपूर्ति का शेड्यूल
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गड़बड़ाया गांवों की विद्युत आपूर्ति का शेड्यूल
बिजनौर। देश में गहराए कोयला संकट से गांवों की विद्युत आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी है। गांवों की विद्युत सप्लाई में पांच से सात घंटे की कटौती हो रही है। नगरीय क्षेत्रों में भी बिजली कटौती की जा रही है। बार-बार हो रही ट्रिपिंग से उपभोक्ता परेशान हैं। ऊर्जा निगम के अधिकारी करीब दस दिन के बिजली संकट के बाद अब धीरे-धीरे सुधार होने का दावा कर रहे हैं।
जिले की बिजली सप्लाई पर कोयला संकट का असर दिखने लगा। गांवों में सात घंटे की बिजली कटौती से दैनिक जीवन समेत खेती के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। भाकियू के प्रदेश सचिव ठाकुर राममौतार सिंह की मानें तो गांवों में बमुश्किल दूसरे तीसरे दिन एक-दो घंटे बिजली आ रही है। शासन के जिला मुख्यालय पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालय पर 21-22 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति के आदेश हैं। परंतु कोयला संकट के कारण करीब दस दिन से चरमराई बिजली आपूर्ति अब धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। अधिशासी अभियंता विद्युत प्रथम अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि बिजली सप्लाई का निर्धारण कंट्रोल से मिलने वाली बिजली पर निर्भर है। जिला मुख्यालय को शेड्यूल के मुताबिक 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। गांवों की विद्युत सप्लाई पर कोयला संकट का असर है। गांवों में पांच सात घंटे की कटौती हो रही है। कस्बा झालू नगर पंचायत है, वहां का बिजली घर ग्रामीण क्षेत्र में आता है। परंतु झालू में 20-21 घंटे बिजली आपूर्ति है।
62 हजार उपभोक्ताओं को हो रही विद्युत आपूर्ति
बिजनौर परिक्षेत्र में दस बिजली घर हैं। इनमें दो बिजली घर शहरी तथा आठ ग्रामीण क्षेत्र में हैं। बिजली घरों से बिजनौर मुख्यालय समेत 106 गांवों को विद्युत आपूर्ति होती है। गांव व शहर के करीब 62 हजार उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति हो रही है। तीन बिजली घरों पर पांच से दस एमवीए के दो-दो, छह बिजली घरों पर इसी क्षमता के तीन-तीन तथा एक बिजली घर पर पांच एमवीए का एक ट्रांसफार्मर है। शासन ने दशहरा तथा दीपावली त्योहारों को देखते हुए बिजली आपूर्ति को लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं। बरसात में बिजली घरों में तकनीकी फाल्ट हो जाते हैं। इससे विद्युत आपूर्ति बाधित होती है। अधिशासी अभियंता अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि त्योहारों पर विद्युत आपूर्ति निर्बाध रखने के लिए बिजली घरों की मरम्मत शुरू हो गई है।
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बिजनौर। देश में गहराए कोयला संकट से गांवों की विद्युत आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी है। गांवों की विद्युत सप्लाई में पांच से सात घंटे की कटौती हो रही है। नगरीय क्षेत्रों में भी बिजली कटौती की जा रही है। बार-बार हो रही ट्रिपिंग से उपभोक्ता परेशान हैं। ऊर्जा निगम के अधिकारी करीब दस दिन के बिजली संकट के बाद अब धीरे-धीरे सुधार होने का दावा कर रहे हैं।
जिले की बिजली सप्लाई पर कोयला संकट का असर दिखने लगा। गांवों में सात घंटे की बिजली कटौती से दैनिक जीवन समेत खेती के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। भाकियू के प्रदेश सचिव ठाकुर राममौतार सिंह की मानें तो गांवों में बमुश्किल दूसरे तीसरे दिन एक-दो घंटे बिजली आ रही है। शासन के जिला मुख्यालय पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालय पर 21-22 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति के आदेश हैं। परंतु कोयला संकट के कारण करीब दस दिन से चरमराई बिजली आपूर्ति अब धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। अधिशासी अभियंता विद्युत प्रथम अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि बिजली सप्लाई का निर्धारण कंट्रोल से मिलने वाली बिजली पर निर्भर है। जिला मुख्यालय को शेड्यूल के मुताबिक 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। गांवों की विद्युत सप्लाई पर कोयला संकट का असर है। गांवों में पांच सात घंटे की कटौती हो रही है। कस्बा झालू नगर पंचायत है, वहां का बिजली घर ग्रामीण क्षेत्र में आता है। परंतु झालू में 20-21 घंटे बिजली आपूर्ति है।
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62 हजार उपभोक्ताओं को हो रही विद्युत आपूर्ति
बिजनौर परिक्षेत्र में दस बिजली घर हैं। इनमें दो बिजली घर शहरी तथा आठ ग्रामीण क्षेत्र में हैं। बिजली घरों से बिजनौर मुख्यालय समेत 106 गांवों को विद्युत आपूर्ति होती है। गांव व शहर के करीब 62 हजार उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति हो रही है। तीन बिजली घरों पर पांच से दस एमवीए के दो-दो, छह बिजली घरों पर इसी क्षमता के तीन-तीन तथा एक बिजली घर पर पांच एमवीए का एक ट्रांसफार्मर है। शासन ने दशहरा तथा दीपावली त्योहारों को देखते हुए बिजली आपूर्ति को लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं। बरसात में बिजली घरों में तकनीकी फाल्ट हो जाते हैं। इससे विद्युत आपूर्ति बाधित होती है। अधिशासी अभियंता अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि त्योहारों पर विद्युत आपूर्ति निर्बाध रखने के लिए बिजली घरों की मरम्मत शुरू हो गई है।
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