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तीर्थयात्रा के समान है मां गंगा का सेवा कार्य : बछेंद्रीपाल
अमर उजाला/बिजनौर
Updated Tue, 09 Oct 2018 11:51 PM IST
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रैली में शामिल बछेंद्री पाल, डीएम और अन्य लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली बछेंद्रीपाल ने अपनी टीम के साथ जिले में गंगा स्वच्छता की अलख जगाई। उन्होंने अनेक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और गंगा को साफ रखने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि गंगा हमारी मां है। इसे देवताओं ने भी मां का दर्जा दिया है। कोई क्या अपनी मां को प्रदूषित करता है। गंगा की सेवा करना तीर्थयात्रा करने के समान है।
बछेंद्रीपाल, डीएम अटल कुमार राय व सीडीओ प्रवीण मिश्र ने विद्यार्थियों की प्रभातफेरी को झंडी दिखाकर रवाना किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि गंगा देश की धरोहर है। हमें अपनी धरोहर को हर हाल में बचाना और निर्मल रखना है। बिना जनता के सहयोग के ये नहीं हो सकता है। इसके बाद प्रभात रैली निकाली गई। रैली में बच्चों ने अपने हाथों अनेक नारे लिखे बैनर ले रखे थे और बच्चे नारे भी लगा रहे थे। रैली में सरकारी कर्मचारी व समाजसेवी भी मौजूद रहे। रैली अनेक मार्गों से होकर विकास भवन पहुंचकर संपन्न हुई।
सेंट मेरी में बछेंद्रीपाल का प्रबंधक फादर डा. मैथ्यू जॉन, प्रधानाचार्या सिस्टर रिंसी ने स्वागत किया। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बछेंद्रीपाल ने कहा कि आज कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। कहा कि सभी अपने बच्चों को संस्कार दें।
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संस्कार की चमक माउंट एवरेस्ट से भी ऊंची है। उन्होंने बच्चों से पॉलिथीन या किसी भी तरह का प्लास्टिक प्रयोग न करने का आह्वान किया। कहा कि पॉलिथीन को नष्ट नहीं किया जा सकता है। बछेंद्रीपाल की टीम के सदस्यों ने कचरा प्रबंधन से जुड़ी नाटिका बच्चों के साथ प्रस्तुत की। उन्होंने स्कूल परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी लगाया। बछेंद्री पाल व उनकी टीम ने विवेक कॉलेज में हुए कार्यक्रम में हिस्सा लिया। विद्यार्थियों रसिका, कृतिका, योगेश, स्नेही, स्वाती, प्रज्ञा अमन, कार्तिक, शिवम, दिपांशी, प्रियांशी, निखत, बरखा, दीक्षा, उजाला, पिंकी आदि द्वारा गंगा पर नाटक व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उन्होंने विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि आज स्वच्छता के प्रति सब जागरूक हैं। सब अच्छे व गलत को जानते हैं परंतु सब को साथ लेकर चलने वाले एक नेतृत्व की कमी है जिसकी हमें जरूरत है।
उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आप इस स्वच्छ और नेक कार्य का नेतृत्व युवा करें। डीएम अटल कुमार राय ने भी स्वच्छता अभियान में बढ़ चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। प्रेमलता अग्रवाल महाविद्यालय के चेयरमैन अमित गोयल, सचिव दीपक मित्तल, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र अग्रवाल ने भी विचार व्यक्त किए।
संचालन निधि शुक्ला व उमंग ने किया। इस दौरान डा.राजीव चौधरी, डा.हितेश शर्मा, डा.मीता अग्रवाल, डा.दीप्ति डिमरी, डा.संदीप अग्रवाल, रिजवान, विशाल, प्रांशु, अनुज कुमार शर्मा आदि का विशेष सहयोग रहा। शाम के समय बछेंद्रीपाल ने प्रदर्शनी मैदान में भी स्वच्छता अभियान चलाया। उन्होंने आसपास के नागरिकों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि स्वच्छता से ही स्वस्थता है। इस दौरान डीपीआरओ मनीष कुमार, गंगा विचार मंच के जिला संयोजक सौरभ सिंघल, चेयरपर्सन पति शमशाद अंसारी, कैप्टन बिशनलाल, सुभाष चंद, मनोज यादव आदि मौजूद रहे।
‘स्वच्छता ही सेवा मंत्र से निर्मल होगी गंगा’
माउंट एवरेस्ट विजेता बछेंद्रीपाल का कहना है कि स्वच्छता ही सेवा का मूल मंत्र अपनाकर गंगा को निर्मल बनाया जा सकता है। उनकी टीम सेवाभाव के मिशन से गंगायात्रा पर निकली हैं। उनका पूरा ध्यान गंगा की सफाई पर केंद्रित है। युवाओं की इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका है।
बछेंद्रीपाल ने प्रेसवार्ता में बताया कि गंगा को निर्मल व अविरल बनाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है। समाज में जागरूकता पैदा करके ही गंगा को साफ किया जा सकता है। युवाओं को इस काम में आगे आने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि गंगा का सफाई अभियान एक दीर्घकालिक नीति है। परिवार के छोटे छोटे बच्चों को गंदगी से होने वाली बीमारियों व नुकसान की जानकारी देकर जागृति पैदा करना हर व्यक्ति का दायित्व है। छोटे बच्चों को जागरूक करके पीढ़ी दर पीढ़ी सफाई के महत्व को स्थानांतरित किया जा सकता है। युवा अपनी सोच में बदलाव लाएं। स्वयं सफाई करें तथा अपने आसपास रहने वाले लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। बछेंद्रीपाल ने बताया कि वह गंगा सफाई के अभियान को मिशन के रूप में लेकर आगे बढ़ रही हैं। हरिद्वार से शुरू होकर पटना तक की यह करीब 1500 किलोमीटर की गंगा यात्रा रोमांच से भरी है। इस अभियान के दौरान गंगा सफाई के साथ-साथ पर्यावरण शुद्धता, महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दे रही हैं। अपने माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के संस्मरणों को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि वे एवरेस्ट चोटी की सफाई के बाद 500 किलोग्राम कचरा वहां से लेकर आईं थी। यह घटना उनके लिए सफाई अभियान की प्रेरणास्त्रोत बनी। आज उनका व उनकी टीम का ध्यान केवल सफाई पर केंद्रित है। प्रौद्योगिक संस्थानों के इंजीनियर तथा पर्यावरणविदों का उन्हें सहयोग मिल रहा है। इस टीम में भी सात लोग शामिल हैं। प्रेस वार्ता में गंगा विचार मंच के जिला संयोजक सौरभ सिंघल, डीपीआरओ मनीष कुमार तथा बछेंद्रीपाल की टीम के डा.हेमंत गुप्ता आदि मौजूद रहे।
केंद्र व्यवस्थित रूप से कर रही काम
बिजनौर में बछेंद्रीपाल के साथ आए नमामि गंगे के राष्ट्रीय सलाहकार डा.संदीप बहरा ने संयुक्त रूप से बताया कि गंगा सफाई पर केंद्र व्यवस्थित योजना के मुताबिक काम कर रही है। सीवरेज का करीब तीन हजार मिलियन लीटर गंदा पानी रोजाना गंगा में आता है। इसके लिए 1600 किलोलीटर क्षमता वाले ट्रीटमेंट उपकरण पूरी तरह चलने के लिए तैयार है। प्रदेश में 1009 इंडस्ट्री हैं। इनमें 339 को बंद करने के नोटिस दे दिए गए हैं।
डा.संदीप बहरा के अनुसार शासन का पूरा ध्यान चमड़ा उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी को रोकने पर है। सॉलिड वेस्ट भी गंगा में गंदगी का एक प्रमुख कारण है। गंगा में बहने वाली सॉलिड गंदगी को निकालने के लिए गंगा किनारे विभिन्न स्थानों पर 11 संयंत्र लगाए गए हैं। दस हजार किलोग्राम गंदगी हर रोज गंगा में बह रही है।
गंगा के टापू पर बछेंद्रीपाल ने गुजारी रात
बिजनौर। स्वच्छता का संदेश देने के लिए निकलीं एवरेस्ट फतह करने वाली बछेंद्रीपाल ने अपनी टीम के साथ रात गंगा के टापू पर गुजारी। गंगा के बीच बोट खराब होने के कारण प्रशासन के होश उड़ गए थे। बछेंद्रीपाल अपनी टीम के साथ गंगा के बीच में फंस गई थीं। गंगा के क्षेत्र में जिस इलाके में वे फंसी थी वह इलाका मुजफ्फरनगर जिले का है। बछेंद्रीपाल अपनी टीम के साथ सुबह खुद बैराज पहुंचीं।
स्वच्छता का संदेश लेकर बछेंद्रीपाल हरिद्वार से अपनी 40 सदस्यीय टीम के साथ सोमवार शाम गंगा के रास्ते पांच बोट से बैराज आ रही थीं। उन्होंने गंगा बैराज पर दीपयज्ञ कार्यक्रम में हिस्सा लेना था। गंगा के बीच में एक बोट के खराब होने के कारण उनकी पूरी टीम गंगा के बीच में फंस गई। अफसरों के अनुसार बालावाल बैराज के बीच रंजीतपुर गांव के गुरुद्वारे के सामने पूरी टीम फंसीं थी। इस बीच अफसरों का उनसे संपर्क भी कट गया। पूरा प्रशासनिक अमला बछेंद्रीपाल व उनकी टीम की तलाश में जुट गया। स्थानीय नाविकों को उनकी तलाश में लगाया गया। जीपीएस के माध्यम से उनकी लोकेशन देखी गई। पर कुछ पता नहीं चल पाया। रात करीब साढ़े नौ बजे बछेंद्रीपाल से संपर्क होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली। रात में बछेंद्रीपाल को प्रशासन लाने की कवायद में लगा रहा, पर उन्होंने रात के अंधेरे में आने से मना कर दिया। अफसरों को बताया कि वह सुरक्षित हैं और रात में टापू पर ही रुकेंगी। मंगलवार सुबह दिन निकलते ही वह अपनी टीम के साथ बोट के सहारे गंगा बैराज पर पहुंचेंगी। अफसरों को बछेंद्रीपाल ने पूरी घटना के बारे में बताया और कहा कि रात में गंगा के किनारे रहना उन्हें बहुत अच्छा लगा।
बछेंद्रीपाल ने बताया कि एक साथी की बोट का इंजन खराब हो गया था। यह बोट काफी पीछे रह गई थी। बाकी बोट आगे आ गई थीं। जब ये बोट नहीं आई तो वे अपनी पूरी टीम के साथ वापस लौटीं और वहां पहुंची जहां बोट खराब थी। खराब बोट का वजन कम किया। गंगा में दलदली जमीन में बोट फंस गई थी। काफी मशक्कत के बाद बोट को बाहर निकाला। जिस इलाके में बोट फंसी थी वह मुजफ्फरनगर जिले की शुक्रताल की ओर जा रहा था। इस क्षेत्र में ही पूरी टीम फंसी हुई थी। प्रशासनिक अधिकारी रात में ही प्रधानों के साथ उनके पास पहुंच गए थे और उनसे चलने का अनुरोध किया। लेकिन उन्होंने प्रकृति का आनंद लेने की बात कहते हुए चलने से मना कर दिया।
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बछेंद्रीपाल, डीएम अटल कुमार राय व सीडीओ प्रवीण मिश्र ने विद्यार्थियों की प्रभातफेरी को झंडी दिखाकर रवाना किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि गंगा देश की धरोहर है। हमें अपनी धरोहर को हर हाल में बचाना और निर्मल रखना है। बिना जनता के सहयोग के ये नहीं हो सकता है। इसके बाद प्रभात रैली निकाली गई। रैली में बच्चों ने अपने हाथों अनेक नारे लिखे बैनर ले रखे थे और बच्चे नारे भी लगा रहे थे। रैली में सरकारी कर्मचारी व समाजसेवी भी मौजूद रहे। रैली अनेक मार्गों से होकर विकास भवन पहुंचकर संपन्न हुई।
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सेंट मेरी में बछेंद्रीपाल का प्रबंधक फादर डा. मैथ्यू जॉन, प्रधानाचार्या सिस्टर रिंसी ने स्वागत किया। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बछेंद्रीपाल ने कहा कि आज कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। कहा कि सभी अपने बच्चों को संस्कार दें।
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संस्कार की चमक माउंट एवरेस्ट से भी ऊंची है। उन्होंने बच्चों से पॉलिथीन या किसी भी तरह का प्लास्टिक प्रयोग न करने का आह्वान किया। कहा कि पॉलिथीन को नष्ट नहीं किया जा सकता है। बछेंद्रीपाल की टीम के सदस्यों ने कचरा प्रबंधन से जुड़ी नाटिका बच्चों के साथ प्रस्तुत की। उन्होंने स्कूल परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी लगाया। बछेंद्री पाल व उनकी टीम ने विवेक कॉलेज में हुए कार्यक्रम में हिस्सा लिया। विद्यार्थियों रसिका, कृतिका, योगेश, स्नेही, स्वाती, प्रज्ञा अमन, कार्तिक, शिवम, दिपांशी, प्रियांशी, निखत, बरखा, दीक्षा, उजाला, पिंकी आदि द्वारा गंगा पर नाटक व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उन्होंने विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि आज स्वच्छता के प्रति सब जागरूक हैं। सब अच्छे व गलत को जानते हैं परंतु सब को साथ लेकर चलने वाले एक नेतृत्व की कमी है जिसकी हमें जरूरत है।
उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आप इस स्वच्छ और नेक कार्य का नेतृत्व युवा करें। डीएम अटल कुमार राय ने भी स्वच्छता अभियान में बढ़ चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। प्रेमलता अग्रवाल महाविद्यालय के चेयरमैन अमित गोयल, सचिव दीपक मित्तल, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र अग्रवाल ने भी विचार व्यक्त किए।
संचालन निधि शुक्ला व उमंग ने किया। इस दौरान डा.राजीव चौधरी, डा.हितेश शर्मा, डा.मीता अग्रवाल, डा.दीप्ति डिमरी, डा.संदीप अग्रवाल, रिजवान, विशाल, प्रांशु, अनुज कुमार शर्मा आदि का विशेष सहयोग रहा। शाम के समय बछेंद्रीपाल ने प्रदर्शनी मैदान में भी स्वच्छता अभियान चलाया। उन्होंने आसपास के नागरिकों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि स्वच्छता से ही स्वस्थता है। इस दौरान डीपीआरओ मनीष कुमार, गंगा विचार मंच के जिला संयोजक सौरभ सिंघल, चेयरपर्सन पति शमशाद अंसारी, कैप्टन बिशनलाल, सुभाष चंद, मनोज यादव आदि मौजूद रहे।
‘स्वच्छता ही सेवा मंत्र से निर्मल होगी गंगा’
माउंट एवरेस्ट विजेता बछेंद्रीपाल का कहना है कि स्वच्छता ही सेवा का मूल मंत्र अपनाकर गंगा को निर्मल बनाया जा सकता है। उनकी टीम सेवाभाव के मिशन से गंगायात्रा पर निकली हैं। उनका पूरा ध्यान गंगा की सफाई पर केंद्रित है। युवाओं की इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका है।
बछेंद्रीपाल ने प्रेसवार्ता में बताया कि गंगा को निर्मल व अविरल बनाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है। समाज में जागरूकता पैदा करके ही गंगा को साफ किया जा सकता है। युवाओं को इस काम में आगे आने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि गंगा का सफाई अभियान एक दीर्घकालिक नीति है। परिवार के छोटे छोटे बच्चों को गंदगी से होने वाली बीमारियों व नुकसान की जानकारी देकर जागृति पैदा करना हर व्यक्ति का दायित्व है। छोटे बच्चों को जागरूक करके पीढ़ी दर पीढ़ी सफाई के महत्व को स्थानांतरित किया जा सकता है। युवा अपनी सोच में बदलाव लाएं। स्वयं सफाई करें तथा अपने आसपास रहने वाले लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। बछेंद्रीपाल ने बताया कि वह गंगा सफाई के अभियान को मिशन के रूप में लेकर आगे बढ़ रही हैं। हरिद्वार से शुरू होकर पटना तक की यह करीब 1500 किलोमीटर की गंगा यात्रा रोमांच से भरी है। इस अभियान के दौरान गंगा सफाई के साथ-साथ पर्यावरण शुद्धता, महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दे रही हैं। अपने माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के संस्मरणों को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि वे एवरेस्ट चोटी की सफाई के बाद 500 किलोग्राम कचरा वहां से लेकर आईं थी। यह घटना उनके लिए सफाई अभियान की प्रेरणास्त्रोत बनी। आज उनका व उनकी टीम का ध्यान केवल सफाई पर केंद्रित है। प्रौद्योगिक संस्थानों के इंजीनियर तथा पर्यावरणविदों का उन्हें सहयोग मिल रहा है। इस टीम में भी सात लोग शामिल हैं। प्रेस वार्ता में गंगा विचार मंच के जिला संयोजक सौरभ सिंघल, डीपीआरओ मनीष कुमार तथा बछेंद्रीपाल की टीम के डा.हेमंत गुप्ता आदि मौजूद रहे।
केंद्र व्यवस्थित रूप से कर रही काम
बिजनौर में बछेंद्रीपाल के साथ आए नमामि गंगे के राष्ट्रीय सलाहकार डा.संदीप बहरा ने संयुक्त रूप से बताया कि गंगा सफाई पर केंद्र व्यवस्थित योजना के मुताबिक काम कर रही है। सीवरेज का करीब तीन हजार मिलियन लीटर गंदा पानी रोजाना गंगा में आता है। इसके लिए 1600 किलोलीटर क्षमता वाले ट्रीटमेंट उपकरण पूरी तरह चलने के लिए तैयार है। प्रदेश में 1009 इंडस्ट्री हैं। इनमें 339 को बंद करने के नोटिस दे दिए गए हैं।
डा.संदीप बहरा के अनुसार शासन का पूरा ध्यान चमड़ा उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी को रोकने पर है। सॉलिड वेस्ट भी गंगा में गंदगी का एक प्रमुख कारण है। गंगा में बहने वाली सॉलिड गंदगी को निकालने के लिए गंगा किनारे विभिन्न स्थानों पर 11 संयंत्र लगाए गए हैं। दस हजार किलोग्राम गंदगी हर रोज गंगा में बह रही है।
गंगा के टापू पर बछेंद्रीपाल ने गुजारी रात
बिजनौर। स्वच्छता का संदेश देने के लिए निकलीं एवरेस्ट फतह करने वाली बछेंद्रीपाल ने अपनी टीम के साथ रात गंगा के टापू पर गुजारी। गंगा के बीच बोट खराब होने के कारण प्रशासन के होश उड़ गए थे। बछेंद्रीपाल अपनी टीम के साथ गंगा के बीच में फंस गई थीं। गंगा के क्षेत्र में जिस इलाके में वे फंसी थी वह इलाका मुजफ्फरनगर जिले का है। बछेंद्रीपाल अपनी टीम के साथ सुबह खुद बैराज पहुंचीं।
स्वच्छता का संदेश लेकर बछेंद्रीपाल हरिद्वार से अपनी 40 सदस्यीय टीम के साथ सोमवार शाम गंगा के रास्ते पांच बोट से बैराज आ रही थीं। उन्होंने गंगा बैराज पर दीपयज्ञ कार्यक्रम में हिस्सा लेना था। गंगा के बीच में एक बोट के खराब होने के कारण उनकी पूरी टीम गंगा के बीच में फंस गई। अफसरों के अनुसार बालावाल बैराज के बीच रंजीतपुर गांव के गुरुद्वारे के सामने पूरी टीम फंसीं थी। इस बीच अफसरों का उनसे संपर्क भी कट गया। पूरा प्रशासनिक अमला बछेंद्रीपाल व उनकी टीम की तलाश में जुट गया। स्थानीय नाविकों को उनकी तलाश में लगाया गया। जीपीएस के माध्यम से उनकी लोकेशन देखी गई। पर कुछ पता नहीं चल पाया। रात करीब साढ़े नौ बजे बछेंद्रीपाल से संपर्क होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली। रात में बछेंद्रीपाल को प्रशासन लाने की कवायद में लगा रहा, पर उन्होंने रात के अंधेरे में आने से मना कर दिया। अफसरों को बताया कि वह सुरक्षित हैं और रात में टापू पर ही रुकेंगी। मंगलवार सुबह दिन निकलते ही वह अपनी टीम के साथ बोट के सहारे गंगा बैराज पर पहुंचेंगी। अफसरों को बछेंद्रीपाल ने पूरी घटना के बारे में बताया और कहा कि रात में गंगा के किनारे रहना उन्हें बहुत अच्छा लगा।
बछेंद्रीपाल ने बताया कि एक साथी की बोट का इंजन खराब हो गया था। यह बोट काफी पीछे रह गई थी। बाकी बोट आगे आ गई थीं। जब ये बोट नहीं आई तो वे अपनी पूरी टीम के साथ वापस लौटीं और वहां पहुंची जहां बोट खराब थी। खराब बोट का वजन कम किया। गंगा में दलदली जमीन में बोट फंस गई थी। काफी मशक्कत के बाद बोट को बाहर निकाला। जिस इलाके में बोट फंसी थी वह मुजफ्फरनगर जिले की शुक्रताल की ओर जा रहा था। इस क्षेत्र में ही पूरी टीम फंसी हुई थी। प्रशासनिक अधिकारी रात में ही प्रधानों के साथ उनके पास पहुंच गए थे और उनसे चलने का अनुरोध किया। लेकिन उन्होंने प्रकृति का आनंद लेने की बात कहते हुए चलने से मना कर दिया।