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प्राइवेट कॉलेजों पर मंडराया आर्थिक संकट
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भारती सिंह।
- फोटो : BIJNOR
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प्राइवेट कॉलेजों पर मंडराया आर्थिक संकट
बिजनौर। जिले के स्कूल कॉलेज तीन माह से बंद हैं और छात्र फीस नहीं दे रहे हैं। अभिभावकों की नए सत्र के दाखिले कराने में दिलचस्पी नहीं है। वहीं, कॉलेज संचालक आर्थिक संकट का हवाला देकर शिक्षकों को वेतन देने में असमर्थता जता रहे हैं। कोरोना महामारी से पैदा इन हालातों में शिक्षकों को नौकरी जाने का डर सताने लगा है।
जिले में यूपी बोर्ड के 282 वित्त विहीन इंटर कॉलेज, सीबीएसई के 101 स्कूल, करीब 100 स्वपोषित डिग्री कॉलेज, चार प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इनमें सैकड़ों शिक्षक व कर्मचारी काम करते हैं। शासन के वित्त विहीन विद्यालय के शिक्षकों को वेतन देने के निर्देश हैं। लेकिन अनेक विद्यालय ने फंड नहीं होने की बात कहकर वेतन नहीं दिया है। माडर्न एरा पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या सीमा विश्वास का कहना है कि उनके विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया गया है। उन समेत शिक्षकों के वेतन में 50 प्रतिशत की कटौती हुई है। छात्र मार्च, अप्रैल तथा मई की फीस दे नहीं रहे हैं। कॉलेज में नए सत्र के लिए ऑनलाइन एडमिशन रजिस्ट्रेशन खोल दिया है। इसमें मात्र पांच सात रजिस्ट्रेशन हुए हैं। छात्रों की फीस से ही वेतन दिया जाता है, आगे के लिए वेतन देना बड़ी समस्या है। स्वपोषित डिग्री कॉलेज में भी कमोबेश यही स्थिति है। शिक्षण संस्थान जल्द खुलने की संभावना नहीं है। संचालकों का कहना है कि आर्थिक संकट में उनके समक्ष स्टाफ कम करने समेत कई विकल्प हैं। जितेंद्र सिंह, रवि कुमार, आरके सिंह आदि शिक्षकों का कहना है कि नौकरी से ही उनका परिवार पलता है। शासन लॉकडाउन में बाहर से आए लोगों को रोजगार दे रही है।
कुछ राहत मिले तो जमा कर देंगे फीस
विवेक कालेज के संचालक अमित गोयल का कहना है कि शिक्षक विद्यालय परिवार के सदस्य हैं। उन्हें नौकरी से निकालना समस्या का समाधान नही है। अभी अनिश्चितता का माहौल है। जब तक संस्था के पास फंड है, शिक्षकों को वेतन देंगे। इसके बाद मिल बैठकर समस्या से निपटेंगे। अभिभावकों को फीस जमा करनी चाहिए। सीमा भारती के अनुसार अभिभावक फीस देने के विरोध में नहीं हैं। कॉलेजों को कोरोना प्रकोप को देखते हुए फीस में राहत देनी चाहिए। विश्व भास्कर बताते है कि लॉकडाउन में लोगों के रोजगार ठप हो गए हैं। गुजारा मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद फीस तो देनी है। कॉलेज को फालतू थोपी गई फीस कम करनी चाहिए। भारती सिंह का कहना है कि अभिभावक संघ फीस वृद्धि पर डीएम के समक्ष भी अपना पक्ष रख चुका है। पब्लिक स्कूल चार पांच सौ रुपये मासिक के हिसाब से तीन माह की फीस लें। अतुल विक्रम सिंह का कहना है कि कॉलेज तथा अभिभावक मिलकर फीस की समस्या का हल निकालें। पिछले माहों की फीस थोड़ा थोड़ा करके जमा करें। साथ ही कॉलेज भी फीस कम करें।
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बिजनौर। जिले के स्कूल कॉलेज तीन माह से बंद हैं और छात्र फीस नहीं दे रहे हैं। अभिभावकों की नए सत्र के दाखिले कराने में दिलचस्पी नहीं है। वहीं, कॉलेज संचालक आर्थिक संकट का हवाला देकर शिक्षकों को वेतन देने में असमर्थता जता रहे हैं। कोरोना महामारी से पैदा इन हालातों में शिक्षकों को नौकरी जाने का डर सताने लगा है।
जिले में यूपी बोर्ड के 282 वित्त विहीन इंटर कॉलेज, सीबीएसई के 101 स्कूल, करीब 100 स्वपोषित डिग्री कॉलेज, चार प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इनमें सैकड़ों शिक्षक व कर्मचारी काम करते हैं। शासन के वित्त विहीन विद्यालय के शिक्षकों को वेतन देने के निर्देश हैं। लेकिन अनेक विद्यालय ने फंड नहीं होने की बात कहकर वेतन नहीं दिया है। माडर्न एरा पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या सीमा विश्वास का कहना है कि उनके विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया गया है। उन समेत शिक्षकों के वेतन में 50 प्रतिशत की कटौती हुई है। छात्र मार्च, अप्रैल तथा मई की फीस दे नहीं रहे हैं। कॉलेज में नए सत्र के लिए ऑनलाइन एडमिशन रजिस्ट्रेशन खोल दिया है। इसमें मात्र पांच सात रजिस्ट्रेशन हुए हैं। छात्रों की फीस से ही वेतन दिया जाता है, आगे के लिए वेतन देना बड़ी समस्या है। स्वपोषित डिग्री कॉलेज में भी कमोबेश यही स्थिति है। शिक्षण संस्थान जल्द खुलने की संभावना नहीं है। संचालकों का कहना है कि आर्थिक संकट में उनके समक्ष स्टाफ कम करने समेत कई विकल्प हैं। जितेंद्र सिंह, रवि कुमार, आरके सिंह आदि शिक्षकों का कहना है कि नौकरी से ही उनका परिवार पलता है। शासन लॉकडाउन में बाहर से आए लोगों को रोजगार दे रही है।
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कुछ राहत मिले तो जमा कर देंगे फीस
विवेक कालेज के संचालक अमित गोयल का कहना है कि शिक्षक विद्यालय परिवार के सदस्य हैं। उन्हें नौकरी से निकालना समस्या का समाधान नही है। अभी अनिश्चितता का माहौल है। जब तक संस्था के पास फंड है, शिक्षकों को वेतन देंगे। इसके बाद मिल बैठकर समस्या से निपटेंगे। अभिभावकों को फीस जमा करनी चाहिए। सीमा भारती के अनुसार अभिभावक फीस देने के विरोध में नहीं हैं। कॉलेजों को कोरोना प्रकोप को देखते हुए फीस में राहत देनी चाहिए। विश्व भास्कर बताते है कि लॉकडाउन में लोगों के रोजगार ठप हो गए हैं। गुजारा मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद फीस तो देनी है। कॉलेज को फालतू थोपी गई फीस कम करनी चाहिए। भारती सिंह का कहना है कि अभिभावक संघ फीस वृद्धि पर डीएम के समक्ष भी अपना पक्ष रख चुका है। पब्लिक स्कूल चार पांच सौ रुपये मासिक के हिसाब से तीन माह की फीस लें। अतुल विक्रम सिंह का कहना है कि कॉलेज तथा अभिभावक मिलकर फीस की समस्या का हल निकालें। पिछले माहों की फीस थोड़ा थोड़ा करके जमा करें। साथ ही कॉलेज भी फीस कम करें।

अतुल विक्रम सिंह।- फोटो : BIJNOR

अमित गोयल।- फोटो : BIJNOR

सीमा भारती।- फोटो : BIJNOR

श्विभास्कर।- फोटो : BIJNOR
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