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पहले हाथों से आती थी मछली की दुर्गंध, अब हर्बल गुलाब की सुगंध
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पहले हाथों से आती थी मछली की दुर्गंध, अब हर्बल गुलाब की सुगंध
बिजनौर। कभी जिन हाथों में मछलियों की दुर्गंध आती थी, अब वो हर्बल गुलाल की सुगंध से महक रहे हैं। वन्यजीव संस्थान ने हैदरपुर वेटलैंड के आसपास के बिजनौर और मुजफ्फरनगर के 12 गांवों की महिलाओं को गंगा संरक्षण के साथ आत्मनिर्भर बनाने का प्रशिक्षण दिया। इसमें उन्हें हर्बल गुलाल, घास से टोकरी और धूप अगरबत्ती बनाने सहित कई चीजें बनानी सिखाई। इससे जहां इन गांवों के लोगों की निर्भरता गंगा पर घटेगी, वहीं गंगा में जलसंरक्षण की दिशा में अहम कदम होगा।
गंगा किनारे नवलपुर, रावली, हेमराज कॉलोनी सहित कई ऐसे गांव हैं, जहां के बहुत से लोग गंगा में मछलियों को पकड़कर अपनी आजीविका चलाते थे। पुरुष मछली लाते तो महिलाएं उन्हें बेचने का काम करती। ऐसे में गंगा संरक्षण में सबसे बड़ा सवाल उठा कि यदि यह काम छोड़ दिया जाए तो आजीविका कैसे चले। ऐसे में दो साल पहले भारतीय वन्यजीव संस्था ने यहां की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया। जलीय जीवों के संरक्षण के लिए उन्हें पहले गंगा प्रहरी बनाया गया। इसके बाद महिलाओं के समूह बनाए गए। हैदरपुर वेटलैंड के आसपास बिजनौर और मुजफ्फरनगर के करीब 12 गांव इसमें शामिल किए गए। यहां की महिलाओं को फूलों से हर्बल गुलाल बनाना, सिलाई, फलसंरक्षण, धूप अगरबत्ती, गंगा के किनारे उगने वाली घास से डलिया टोकरी तथा चटाई बनाना, पैचवर्क, टाई एंड डाई तथा ब्लॉक प्रिटिंग जैसे प्रशिक्षण दिए गए। प्रशिक्षण देहरादून से आई प्रशिक्षिका दीपा उनियाल, डॉ. संध्या जोशी , प्रीति शुक्ला, पंकज तथा विनीता सागर ने प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को सर्टिफिकेट भी दिए।
डब्ल्यूूआईआई बाजार दिलाने में करेगा मदद
यहां पर केवल महिलाओं को प्रशिक्षण ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि महिलाओं द्वारा बनाये जा रहे प्रोडक्ट को बाजार भी उपलब्ध कराने के लिए मशक्कत चल रही है। इसके लिए डब्ल्यूआईआई ने जहां अपने म्यूजियम में उनके प्रोडक्ट रखवाने का काम किया है, वहीं जिला प्रशासन की मदद से एक जिला एक उत्पाद में भी इन्हें जगह दिलाने का प्रयास शुरू कर दिया है।
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हमारे इस प्रशिक्षण का मकसद इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। होली को देखते हुए इन महिलाओं ने हर्बल गुलाल भी तैयार किया है। इन महिलाओं को विकल्प सुझाए गए हैं, ताकि गंगा को बिना नुकसान पहुंचाए, इनकी आजीविका चल सके।
- प्रीति शुक्ला, प्रोजेक्ट असिस्टेंट नमामि गंगे, डब्ल्यूआईआई
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बिजनौर। कभी जिन हाथों में मछलियों की दुर्गंध आती थी, अब वो हर्बल गुलाल की सुगंध से महक रहे हैं। वन्यजीव संस्थान ने हैदरपुर वेटलैंड के आसपास के बिजनौर और मुजफ्फरनगर के 12 गांवों की महिलाओं को गंगा संरक्षण के साथ आत्मनिर्भर बनाने का प्रशिक्षण दिया। इसमें उन्हें हर्बल गुलाल, घास से टोकरी और धूप अगरबत्ती बनाने सहित कई चीजें बनानी सिखाई। इससे जहां इन गांवों के लोगों की निर्भरता गंगा पर घटेगी, वहीं गंगा में जलसंरक्षण की दिशा में अहम कदम होगा।
गंगा किनारे नवलपुर, रावली, हेमराज कॉलोनी सहित कई ऐसे गांव हैं, जहां के बहुत से लोग गंगा में मछलियों को पकड़कर अपनी आजीविका चलाते थे। पुरुष मछली लाते तो महिलाएं उन्हें बेचने का काम करती। ऐसे में गंगा संरक्षण में सबसे बड़ा सवाल उठा कि यदि यह काम छोड़ दिया जाए तो आजीविका कैसे चले। ऐसे में दो साल पहले भारतीय वन्यजीव संस्था ने यहां की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया। जलीय जीवों के संरक्षण के लिए उन्हें पहले गंगा प्रहरी बनाया गया। इसके बाद महिलाओं के समूह बनाए गए। हैदरपुर वेटलैंड के आसपास बिजनौर और मुजफ्फरनगर के करीब 12 गांव इसमें शामिल किए गए। यहां की महिलाओं को फूलों से हर्बल गुलाल बनाना, सिलाई, फलसंरक्षण, धूप अगरबत्ती, गंगा के किनारे उगने वाली घास से डलिया टोकरी तथा चटाई बनाना, पैचवर्क, टाई एंड डाई तथा ब्लॉक प्रिटिंग जैसे प्रशिक्षण दिए गए। प्रशिक्षण देहरादून से आई प्रशिक्षिका दीपा उनियाल, डॉ. संध्या जोशी , प्रीति शुक्ला, पंकज तथा विनीता सागर ने प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को सर्टिफिकेट भी दिए।
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डब्ल्यूूआईआई बाजार दिलाने में करेगा मदद
यहां पर केवल महिलाओं को प्रशिक्षण ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि महिलाओं द्वारा बनाये जा रहे प्रोडक्ट को बाजार भी उपलब्ध कराने के लिए मशक्कत चल रही है। इसके लिए डब्ल्यूआईआई ने जहां अपने म्यूजियम में उनके प्रोडक्ट रखवाने का काम किया है, वहीं जिला प्रशासन की मदद से एक जिला एक उत्पाद में भी इन्हें जगह दिलाने का प्रयास शुरू कर दिया है।
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हमारे इस प्रशिक्षण का मकसद इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। होली को देखते हुए इन महिलाओं ने हर्बल गुलाल भी तैयार किया है। इन महिलाओं को विकल्प सुझाए गए हैं, ताकि गंगा को बिना नुकसान पहुंचाए, इनकी आजीविका चल सके।
- प्रीति शुक्ला, प्रोजेक्ट असिस्टेंट नमामि गंगे, डब्ल्यूआईआई

बिजनौर के ग्राम नवलपुर में फूलों से हर्बल गुलाल बनाती महिलाएं।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम नवलपुर में फूलों से बनाया गया हर्बल गुलाल।- फोटो : BIJNOR