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Bijnor News: नहीं की ई-संजीवनी ओपीडी, 21 सीएचओ का वेतन रोका
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बिजनौर। ग्रामीण स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र खुले हुए हैं। जिन पर तैनात सीएचओ (सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी) काम में लापरवाही बरत रहे हैं। ई-संजीवनी ओपीडी नहीं करने पर एसीएमओ ने 21 सीएचओ का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।
जिले में वर्तमान में 334 सीएचओ कार्यरत हैं, जो स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र पर ऑनलाइन ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से मरीजों की बात विशेषज्ञ से कराकर दवाई देते हैं। इससे लोगों को अपने पास ही बेहतर इलाज मिल रहा है। मगर, इनमें से कुछ ऐसे सीएचओ हैं, जो समय से केंद्र पर नहीं पहुंचते। साथ ही उनकी हाजिरी भी पूरी नहीं है।
इसके अलावा ई-संजीवनी ओपीडी से माध्यम से मरीजों को लाभ नहीं पहुंचा रहे हैं। ऐसे 21 सीएचओ को चिन्हित किया गया है। नूरपुर ब्लॉक में छह, चंदक में पांच, धामपुर में एक, अफजलगढ़ में तीन, हल्दौर में दो, स्योहारा में दो, नहटौर व जलीलपुर में एक-एक सीएचओ कार्य में लापरवाही बरत रहे हैं।
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ये है ई-संजीवनी
ई-संजीवनी एक ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म है, जो चिकित्सकों को इंटरनेट पर मरीजों को चिकित्सा सलाह प्रदान करने की अनुमति देता है। दूसरी ओर, ई-संजीवनी ओपीडी एक मोबाइल एप्लिकेशन है, जो मरीजों को डॉक्टरों के साथ अपॉइंटमेंट बुक करने, उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से ब्राउज करने और उनके मेडिकल रिकॉर्ड देखने में मदद करता है।
जिले में 21 सीएचओ का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं। क्योंकि ये ई-संजीवनी के जरिए मरीजों का इलाज नहीं कराते हैं। ई-संजीवनी क्यों नहीं की है, पूरे मामले की जांच कराकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सुशील कुमार, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, बिजनौर
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जिले में वर्तमान में 334 सीएचओ कार्यरत हैं, जो स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र पर ऑनलाइन ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से मरीजों की बात विशेषज्ञ से कराकर दवाई देते हैं। इससे लोगों को अपने पास ही बेहतर इलाज मिल रहा है। मगर, इनमें से कुछ ऐसे सीएचओ हैं, जो समय से केंद्र पर नहीं पहुंचते। साथ ही उनकी हाजिरी भी पूरी नहीं है।
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इसके अलावा ई-संजीवनी ओपीडी से माध्यम से मरीजों को लाभ नहीं पहुंचा रहे हैं। ऐसे 21 सीएचओ को चिन्हित किया गया है। नूरपुर ब्लॉक में छह, चंदक में पांच, धामपुर में एक, अफजलगढ़ में तीन, हल्दौर में दो, स्योहारा में दो, नहटौर व जलीलपुर में एक-एक सीएचओ कार्य में लापरवाही बरत रहे हैं।
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ये है ई-संजीवनी
ई-संजीवनी एक ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म है, जो चिकित्सकों को इंटरनेट पर मरीजों को चिकित्सा सलाह प्रदान करने की अनुमति देता है। दूसरी ओर, ई-संजीवनी ओपीडी एक मोबाइल एप्लिकेशन है, जो मरीजों को डॉक्टरों के साथ अपॉइंटमेंट बुक करने, उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से ब्राउज करने और उनके मेडिकल रिकॉर्ड देखने में मदद करता है।
जिले में 21 सीएचओ का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं। क्योंकि ये ई-संजीवनी के जरिए मरीजों का इलाज नहीं कराते हैं। ई-संजीवनी क्यों नहीं की है, पूरे मामले की जांच कराकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सुशील कुमार, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, बिजनौर