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शोधार्थियों के बीच गूंज रहीं डा. अरुण की कविताएं
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नजीबाबाद - डा. अरूण देव।
- फोटो : NAZIBABAD
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शोधार्थियों के बीच गूंज रहीं डा. अरुण की कविताएं
नजीबाबाद। दिल्ली विवि नगर के साहित्यकार एवं कवि डा. अरुण देव की प्रेम कविताओं को विवि के शोधार्थियों के बीच साझा कर रहा है। विवि की प्रोफेसर सुधा उपाध्याय द्वारा शोधार्थियों के बीच अरुण देव की प्रेम कविताओं के ऑनलाइन पाठ और विवेचना से नगर का गौरव बढ़ा है।
कविताओं के माध्यम से राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त सम्मान और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार सम्मान से नवाजे जा चुके साहू जैन कॉलेज नजीबाबाद के प्रोफेसर डा. अरुण देव का काव्य संग्रह और आलोचनात्मक लेख देश-विदेश में पहचान रखते हैं। एक दशक से अधिक समय से वेब पत्रिका समालोचन का संपादन कर दुनिया में ख्याति अर्जित करने वाले अरुण देव की पांच प्रेम प्रसंग की समकालीन कविताओं को दिल्ली विवि की प्रोफेसर सुधा उपाध्याय ने ऑनलाइन सस्वर मधुर पाठ कर शोधार्थियों तक पहुंचाया है। अरुण देव की प्रेम कविताओं अगर में, यह जो है, मित्र दरवाजा, आज गाना चाहता हूं गीत, अलग-अलग... को प्रोफेसर सुधा उपाध्याय ने खूबसूरती के साथ शोधार्थियों तक पहुंचाकर नगर को ख्याति दिलाई है।
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नजीबाबाद। दिल्ली विवि नगर के साहित्यकार एवं कवि डा. अरुण देव की प्रेम कविताओं को विवि के शोधार्थियों के बीच साझा कर रहा है। विवि की प्रोफेसर सुधा उपाध्याय द्वारा शोधार्थियों के बीच अरुण देव की प्रेम कविताओं के ऑनलाइन पाठ और विवेचना से नगर का गौरव बढ़ा है।
कविताओं के माध्यम से राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त सम्मान और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार सम्मान से नवाजे जा चुके साहू जैन कॉलेज नजीबाबाद के प्रोफेसर डा. अरुण देव का काव्य संग्रह और आलोचनात्मक लेख देश-विदेश में पहचान रखते हैं। एक दशक से अधिक समय से वेब पत्रिका समालोचन का संपादन कर दुनिया में ख्याति अर्जित करने वाले अरुण देव की पांच प्रेम प्रसंग की समकालीन कविताओं को दिल्ली विवि की प्रोफेसर सुधा उपाध्याय ने ऑनलाइन सस्वर मधुर पाठ कर शोधार्थियों तक पहुंचाया है। अरुण देव की प्रेम कविताओं अगर में, यह जो है, मित्र दरवाजा, आज गाना चाहता हूं गीत, अलग-अलग... को प्रोफेसर सुधा उपाध्याय ने खूबसूरती के साथ शोधार्थियों तक पहुंचाकर नगर को ख्याति दिलाई है।
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