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Bijnor News: मत बांटो हरे-लाल रंग को मेरी छत पर तिरंगा रहने दो
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राजा का ताजपुर। ताजपुर मोहल्ला खद्दर बाजार स्थित हजरत राहत अली शाह की दरगाह पर शुक्रवार रात्रि कव्वाली का आयोजन किया गया, जिसमें बाहर से आए कव्वालों में कड़ा मुकाबला हुआ।
पूर्व सपा नेता एवं जिला पंचायत सदस्य इमरान अहमद ने फीता काट कर उद्घाटन किया। मुरादाबाद से आए उमर दराज मुरादाबादी ने अपने कलाम से हजरत राहत अली शाह को खिराजे अकीदत पेश की। उन्होंने कलाम सुनाते हुए कहा है कि हसीन फूलों में खुशबू उतारने वाले क्या खूब घड़ी यह प्यार की।
फिरदौस आजमी कुद्दूसी ने अपना कलाम सुनाते हुए कहा - सर अपना झुका सकते नहीं आगे किसी के हम बड़ी शान से दीवाने नबी के हम, मैं अमन पसंद हूं मेरे शहर में दंगा रहने दो, मत बांटो हरे-लाल रंग को मेरी छत पर तिरंगा रहने दो। कव्वाली मुकाबले में कव्वालों ने एक दूसरे पर जमकर कटाक्ष किए।
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जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि यहां पर सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं। यहां की संस्कृति की मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है। हजरत राहत अली शाह ने दुनिया में अमन-शांति का पैगाम दिया। उन्हीं की याद में हर साल उनकी मजार पर कव्वाली का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर रिजवान अहमद सिद्दीकी, आसिफ अली, मुजाहिद फारूकी, इमामुद्दीन हदरीसी, अमजद सिद्दीकी, हाफिज कल्लन मुदसिर आदि मौजूद थे।
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पूर्व सपा नेता एवं जिला पंचायत सदस्य इमरान अहमद ने फीता काट कर उद्घाटन किया। मुरादाबाद से आए उमर दराज मुरादाबादी ने अपने कलाम से हजरत राहत अली शाह को खिराजे अकीदत पेश की। उन्होंने कलाम सुनाते हुए कहा है कि हसीन फूलों में खुशबू उतारने वाले क्या खूब घड़ी यह प्यार की।
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फिरदौस आजमी कुद्दूसी ने अपना कलाम सुनाते हुए कहा - सर अपना झुका सकते नहीं आगे किसी के हम बड़ी शान से दीवाने नबी के हम, मैं अमन पसंद हूं मेरे शहर में दंगा रहने दो, मत बांटो हरे-लाल रंग को मेरी छत पर तिरंगा रहने दो। कव्वाली मुकाबले में कव्वालों ने एक दूसरे पर जमकर कटाक्ष किए।
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जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि यहां पर सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं। यहां की संस्कृति की मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है। हजरत राहत अली शाह ने दुनिया में अमन-शांति का पैगाम दिया। उन्हीं की याद में हर साल उनकी मजार पर कव्वाली का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर रिजवान अहमद सिद्दीकी, आसिफ अली, मुजाहिद फारूकी, इमामुद्दीन हदरीसी, अमजद सिद्दीकी, हाफिज कल्लन मुदसिर आदि मौजूद थे।