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जान खतरे में डालकर करते हैं ड्यूटी

Sat, 09 Jan 2021 11:26 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jan 2021 11:26 PM IST
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Do duty by risking life
जान खतरे में डालकर करते हैं ड्यूटी
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बिजनौर। वन विभाग में फोरेस्ट गार्ड व दरोगा को तो शस्त्र दे दिए गए लेकिन वॉचर आज भी डंडे के सहारे ड्यूटी कर रहे हैं। वॉचर को अब भी शस्त्र नहीं दिए गए हैं। वन विभाग का स्टाफ भी बिना शस्त्र के ही ड्यूटी करता है। शासन ने अब तक इन्हें ड्यूटी करने के लिए शस्त्र देने का प्रावधान नहीं किया है।
वन विभाग की बिजनौर डिविजन में 50 कर्मचारी तैनात हैं। इन कर्मचारियों का काम केवल लकड़ी की चोरी रोकना ही नहीं बल्कि शिकारियों को पकड़ने और वनों में गश्त करना भी है। डिविजन के अधिकतर कर्मचारी डंडे के सहारे ही ड्यूटी करते हैं। डिविजन में केवल दस बंदूक, दस राइफल और एक रिवॉल्वर है। विभाग में करीब 50 वॉचर तैनात हैं। यानि हर पांच में से दो कर्मचारियों को ही ड्यूटी के लिए बंदूक या राइफल मिलती है। वनों की सुरक्षा में लगे वॉचर को शिकारियों के साथ-साथ वन्य जीवों से भी खुद की रक्षा करनी होती है। ये वनों में केवल डंडे के सहारे ही ड्यूटी करते हैं। ड्यूटी के दौरान डंडे से ज्यादा आपस की तालमेल से ही ये खुद को सुरक्षित रखते हैं।
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बाघ ने मार डाला था वॉचर
अमानगढ़ वन रेंज से सटे जिम कार्बेट की ढिकाला रेंज में एक बाघ ने वॉचर के झुंड पर हमला बोल दिया था। कई वॉचर के सामने ही बाघ एक वॉचर को खींचकर ले गया था और मार डाला था। वॉचर वैसे भी वन्यजीवों के हमलों में अक्सर घायल हो जाते हैं।
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रहते हैं सतर्क
एसडीओ हरि सिंह के अनुसार जो शस्त्र शासन से उपलब्ध कराए जाते हैं उनसे ही कर्मचारी ड्यूटी करते हैं। वॉचर नियमित कर्मचारी नहीं होता है। उसे शस्त्र देने का प्रावधान नहीं है। ड्यूटी के दौरान सभी सतर्क रहते हैं।
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