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जिला अस्पताल में एक रुपये में होगी डायलिसिस
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जिला अस्पताल में एक रुपये में होगी डायलिसिस
बिजनौर। अब हेपेटाइटिस और एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की भी जिला अस्पताल में मात्र एक रुपये में डायलिसिस हो सकेगी। जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट को हेपेटाइटिस और एचआईवी पॉजिटिव पीड़ित मरीजों के लिए भी डायलिसिस यूनिट में दो मशीनें लगाई गई हैं। इससे पहले यहां केवल सामान्य मरीजों की डायलिसिस होती थी। डायलिसिस के लिए जिला अस्पताल में पहले से ही चार मशीनें हैं। अब पॉजिटिव मरीजों के लिए दो मशीनें मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी।
जिला अस्पताल के सीएमएस ज्ञानचंद के अनुसार एक साल पहले डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई थी। केवल एक रुपये की पर्ची बनवाकर संबंधित मरीज जिला अस्पताल में अपनी डायलिसिस करा सकता है। अब तक अस्पताल में चार डायलिसिस की मशीनें थीं। इनसे केवल सामान्य मरीजों की ही डायलिसिस की जाती थी। हेपेटाइटिस और एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की डायलिसिस के लिए हायर सेंटर करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। जिले में पॉजिटिव मरीजों के लिए डायलिसिस की सुविधा नहीं थी। डॉक्टर ज्ञानचंद ने बताया कि सामान्य मरीजों वाली मशीन से पॉजिटिव मरीजों की डायलिसिस करने से उनमें वायरस फैलने का खतरा रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अलग मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है।
डायलिसिस की प्रक्रिया
दरअसल, जब गुर्दे ढंग से काम नहीं करते है तो डायलिसिस प्रक्रिया के जरिए मानव शरीर से अपशिष्ट और अत्यधिक द्रव को बाहर निकाला जाता है। गुर्दे में खराबी आने के कारण मूत्राशय में परेशानी होने लगती है। इस के कारण शरीर से अतिरिक्त पानी को बाहर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया को डायलिसिस कहा जाता है।
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बिजनौर। अब हेपेटाइटिस और एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की भी जिला अस्पताल में मात्र एक रुपये में डायलिसिस हो सकेगी। जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट को हेपेटाइटिस और एचआईवी पॉजिटिव पीड़ित मरीजों के लिए भी डायलिसिस यूनिट में दो मशीनें लगाई गई हैं। इससे पहले यहां केवल सामान्य मरीजों की डायलिसिस होती थी। डायलिसिस के लिए जिला अस्पताल में पहले से ही चार मशीनें हैं। अब पॉजिटिव मरीजों के लिए दो मशीनें मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी।
जिला अस्पताल के सीएमएस ज्ञानचंद के अनुसार एक साल पहले डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई थी। केवल एक रुपये की पर्ची बनवाकर संबंधित मरीज जिला अस्पताल में अपनी डायलिसिस करा सकता है। अब तक अस्पताल में चार डायलिसिस की मशीनें थीं। इनसे केवल सामान्य मरीजों की ही डायलिसिस की जाती थी। हेपेटाइटिस और एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की डायलिसिस के लिए हायर सेंटर करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। जिले में पॉजिटिव मरीजों के लिए डायलिसिस की सुविधा नहीं थी। डॉक्टर ज्ञानचंद ने बताया कि सामान्य मरीजों वाली मशीन से पॉजिटिव मरीजों की डायलिसिस करने से उनमें वायरस फैलने का खतरा रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अलग मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है।
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डायलिसिस की प्रक्रिया
दरअसल, जब गुर्दे ढंग से काम नहीं करते है तो डायलिसिस प्रक्रिया के जरिए मानव शरीर से अपशिष्ट और अत्यधिक द्रव को बाहर निकाला जाता है। गुर्दे में खराबी आने के कारण मूत्राशय में परेशानी होने लगती है। इस के कारण शरीर से अतिरिक्त पानी को बाहर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया को डायलिसिस कहा जाता है।
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