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कुपोषण दूर करने के लिए बांट दीं कुपोषित गाय
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बिजनौर के गांव माधोवाला में गौवंश के पास खड़ा प्रियांशु।
- फोटो : BIJNOR
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कुपोषण दूर करने के लिए बांट दीं कुपोषित गाय
बिजनौर। कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार ने बच्चों के लिए गाय दान तो दीं, लेकिन इन गायों ने दूध नहीं दिया। जिले में पौने पांच हजार अतिकुपोषित बच्चों में से दो बच्चों को दी गईं गाय छटांक भर भी दूध नहीं दे रही हैं। बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए लाई गईं गायों का कुपोषण बच्चों के परिजनों को ही दूर करना पड़ रहा है। अब तक वे गायों के उपचार पर हजारों रुपये भी खर्च कर चुके हैं, लेकिन गाय दूध नहीं दे रही हैं।
कुपोषण को खत्म करने के लिए तमाम अभियान चलाए जा रहे हैं। कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार ने उन्हें गौशालाओं में बंधी गाय दान देने का एलान किया था। गाय को गोद लेने वाले को उसके भरण पोषण के लिए 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भी देने की बात कही गई थी। किसानों की ओर से रात के अंधेरे में छोड़े जा रहे गोवंश लोगों की परेशानी का कारण बने हुए थे। इन गोवंश को बच्चों के परिवार को देने के लिए सरकार ने यह योजना बनाई थी। सरकार की मंशा थी कि गायों के दूध से बच्चों का कुपोषण दूर होगा और गायों को भी आसरा मिल जाएगा। जिले में करीब पौने पांच हजार अतिकुपोषित बच्चे हैं। जबकि जिले की गोशालाओं में 400 से ज्यादा गाय हैं। ये सभी गोवंश अतिकुपोषित बच्चों को दिए जा सकते हैं, लेकिन केवल दो परिवारों से ही गाय के लिए आवेदन आए। खास बात यह है कि 400 गायों में से केवल दो ही दूध दे रही थीं। गायों को गोद लेने के बाद भी इन परिवारों के कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को दूध की बूंद नसीब नहीं हुई। इनके परिवार अब भी बच्चों को 40 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदकर दूध पिला रहे हैं।
केवल बछड़े को मिल रहा दूध
दोनों गोवंश को अफजलगढ़ ब्लॉक के गांव माधोवाला में करीब दो महीने पहले गोद लिया गया था। चंद्रपाल सिंह का चार साल का बेटा प्रियांशु अतिकुपोषण का शिकार है। प्रियांशु की सेहत दुुरुस्त करने के लिए परिवार वालों ने गाय गोद ली। उस समय गाय गाभिन थी। प्रसव के समय गाय को तकलीफ हो गई थी। चंद्रपाल सिंह बताते हैं कि गाय की बीमारी में चार से पांच हजार रुपये लग गए। गाय जो दूध देती है, उसका बछड़ा ही पी जाता है। प्रियांशु को एक बूंद भी दूध नसीब नहीं हुआ। गाय के आगे गाभिन होने की उम्मीद भी नहीं रही।
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100 ग्राम दूध दे रही गाय
गांव के ही सोनू का बेटा कौशल शारीरिक रूप से बहुत कमजोर है। उन्होंने बेटे की सेहत सुधारने के लिए गाय गोद ली। गाय ने घर आकर दोनों समय में 200 ग्राम दूध दिया। उन्हें लगा कि वे उसे दाना पानी खिलाएंगे तो दूध बढ़ जाएगा, लेकिन बाद में गाय बीमार हो गई। गाय की बीमारी में बहुत पैसा लग गया। अब गाय 100 ग्राम दूध दे रही है। उसका दूध बछड़े को ही पिला दिया जाता है। कौशल को गांव में ही खरीदकर दूध पिला रहे हैं। परिवार के पास थोड़ी जमीन है। गाय और उसका बछड़ा लेने का कोई फायदा नहीं मिला।
गौशाला गाय गौशाला गाय
शेरकोट 26 अफजलगढ़ 13
छाछरीमोड़ 200 साहनपुर 13
चांदपुर 12 कोटकादर 08
किरतपुर 17 लालवाला 04
झालू 28 रावली 05
मंडावर 15 भगवानपुर 15
नूरपुर 31 नजीबाबाद 11
जलालाबाद 17 बिजनौर 25
नहटौर 04
नोट : आंकड़े पशुपालन विभाग से लिए गए हैं।
परियोजना कुल बच्चे अतिकुपोषित कुपोषित
बिजनौर 8400 84 279
देवमल 26105 286 2593
हल्दौर 9575 157 487
खारी झालू 12799 203 897
जलीलपुर 28108 492 1404
नूरपुर 28220 605 4471
स्योहारा 21412 283 1696
अफजलगढ़ 24440 256 914
धामपुर 29682 361 2080
नहटौर 22175 431 1729
कोतवाली 42698 374 1699
किरतपुर 23615 313 3141
नजीबाबाद 37182 943 5643
योग 3114411 4788 27033
नोट : आंकड़े विकास भवन से लिए गए हैं।
मामले को दिखवाया जाएगा : जिला कार्यक्रम अधिकारी
जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार जिन परिवारों को गाय दी गईं थीं उन्होंने अपनी मर्जी से ली थीं। अगर गाय बीमार हुई हैं तो इस मामले को दिखवाया जाएगा। इस तरह की कोई शिकायत अभी तक विभाग के पास नहीं आई है।
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बिजनौर। कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार ने बच्चों के लिए गाय दान तो दीं, लेकिन इन गायों ने दूध नहीं दिया। जिले में पौने पांच हजार अतिकुपोषित बच्चों में से दो बच्चों को दी गईं गाय छटांक भर भी दूध नहीं दे रही हैं। बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए लाई गईं गायों का कुपोषण बच्चों के परिजनों को ही दूर करना पड़ रहा है। अब तक वे गायों के उपचार पर हजारों रुपये भी खर्च कर चुके हैं, लेकिन गाय दूध नहीं दे रही हैं।
कुपोषण को खत्म करने के लिए तमाम अभियान चलाए जा रहे हैं। कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार ने उन्हें गौशालाओं में बंधी गाय दान देने का एलान किया था। गाय को गोद लेने वाले को उसके भरण पोषण के लिए 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भी देने की बात कही गई थी। किसानों की ओर से रात के अंधेरे में छोड़े जा रहे गोवंश लोगों की परेशानी का कारण बने हुए थे। इन गोवंश को बच्चों के परिवार को देने के लिए सरकार ने यह योजना बनाई थी। सरकार की मंशा थी कि गायों के दूध से बच्चों का कुपोषण दूर होगा और गायों को भी आसरा मिल जाएगा। जिले में करीब पौने पांच हजार अतिकुपोषित बच्चे हैं। जबकि जिले की गोशालाओं में 400 से ज्यादा गाय हैं। ये सभी गोवंश अतिकुपोषित बच्चों को दिए जा सकते हैं, लेकिन केवल दो परिवारों से ही गाय के लिए आवेदन आए। खास बात यह है कि 400 गायों में से केवल दो ही दूध दे रही थीं। गायों को गोद लेने के बाद भी इन परिवारों के कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को दूध की बूंद नसीब नहीं हुई। इनके परिवार अब भी बच्चों को 40 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदकर दूध पिला रहे हैं।
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केवल बछड़े को मिल रहा दूध
दोनों गोवंश को अफजलगढ़ ब्लॉक के गांव माधोवाला में करीब दो महीने पहले गोद लिया गया था। चंद्रपाल सिंह का चार साल का बेटा प्रियांशु अतिकुपोषण का शिकार है। प्रियांशु की सेहत दुुरुस्त करने के लिए परिवार वालों ने गाय गोद ली। उस समय गाय गाभिन थी। प्रसव के समय गाय को तकलीफ हो गई थी। चंद्रपाल सिंह बताते हैं कि गाय की बीमारी में चार से पांच हजार रुपये लग गए। गाय जो दूध देती है, उसका बछड़ा ही पी जाता है। प्रियांशु को एक बूंद भी दूध नसीब नहीं हुआ। गाय के आगे गाभिन होने की उम्मीद भी नहीं रही।
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100 ग्राम दूध दे रही गाय
गांव के ही सोनू का बेटा कौशल शारीरिक रूप से बहुत कमजोर है। उन्होंने बेटे की सेहत सुधारने के लिए गाय गोद ली। गाय ने घर आकर दोनों समय में 200 ग्राम दूध दिया। उन्हें लगा कि वे उसे दाना पानी खिलाएंगे तो दूध बढ़ जाएगा, लेकिन बाद में गाय बीमार हो गई। गाय की बीमारी में बहुत पैसा लग गया। अब गाय 100 ग्राम दूध दे रही है। उसका दूध बछड़े को ही पिला दिया जाता है। कौशल को गांव में ही खरीदकर दूध पिला रहे हैं। परिवार के पास थोड़ी जमीन है। गाय और उसका बछड़ा लेने का कोई फायदा नहीं मिला।
गौशाला गाय गौशाला गाय
शेरकोट 26 अफजलगढ़ 13
छाछरीमोड़ 200 साहनपुर 13
चांदपुर 12 कोटकादर 08
किरतपुर 17 लालवाला 04
झालू 28 रावली 05
मंडावर 15 भगवानपुर 15
नूरपुर 31 नजीबाबाद 11
जलालाबाद 17 बिजनौर 25
नहटौर 04
नोट : आंकड़े पशुपालन विभाग से लिए गए हैं।
परियोजना कुल बच्चे अतिकुपोषित कुपोषित
बिजनौर 8400 84 279
देवमल 26105 286 2593
हल्दौर 9575 157 487
खारी झालू 12799 203 897
जलीलपुर 28108 492 1404
नूरपुर 28220 605 4471
स्योहारा 21412 283 1696
अफजलगढ़ 24440 256 914
धामपुर 29682 361 2080
नहटौर 22175 431 1729
कोतवाली 42698 374 1699
किरतपुर 23615 313 3141
नजीबाबाद 37182 943 5643
योग 3114411 4788 27033
नोट : आंकड़े विकास भवन से लिए गए हैं।
मामले को दिखवाया जाएगा : जिला कार्यक्रम अधिकारी
जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार जिन परिवारों को गाय दी गईं थीं उन्होंने अपनी मर्जी से ली थीं। अगर गाय बीमार हुई हैं तो इस मामले को दिखवाया जाएगा। इस तरह की कोई शिकायत अभी तक विभाग के पास नहीं आई है।

बिजनौर के गांव माधोवाला में गौवंश के पास अपनी मां की गोद में कौशल।- फोटो : BIJNOR