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धामपुर मिल में इस्राइली तकनीक से शुद्ध होगा पानी
Sun, 09 Jun 2019 12:01 AM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Sun, 09 Jun 2019 12:01 AM IST
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धामपुर मिल में पानी साफ करने के लिए बनाया जा रहा प्लांट।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में धामपुर चीनी मिल में प्रयोग हुए पानी को इस्राइली तकनीक से साफ किया जाएगा। इस्राइल से लाए गए पेड़-पौधे पानी को साफ करेंगे। पानी को साफ करने में किसी तरह के बैक्टीरिया या मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पानी को केवल प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाएगा। इसमें इस्तेमाल होने वाले पत्थर आदि सामान भी इस्राइल से आएगा। धामपुर चीनी मिल में इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है।
चीनी मिलों, डिस्टलरी प्लांट व अन्य फैक्ट्रियों में गन्ना व अन्य सामान बनाने की प्रक्रिया में काफी पानी इस्तेमाल होता है। इस पानी को बाद में मशीनों या फिर बैक्टीरिया की मदद से साफ किया जाता है। यह पानी अधिकतर चीनी मिल अपने ही खेतों में सिंचाई में प्रयोग करती हैं। कई बार किसान चीनी मिलों व अन्य फैक्ट्रियों पर गंदा पानी उनके खेतों व सड़क किनारे डालने का आरोप लगाते हैं। जिले की धामपुर चीनी मिल ने मिल में प्रयोग होकर गंदे हुए इस पानी को साफ करने के लिए इस्राइली तकनीक अपनाने की तैयारी शुरू की है। इस तकनीक में पानी को मशीन के बजाए पेड़-पौधों, पत्थरों से प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाएगा। पानी को इस्तेमाल करने में किसी भी तरह के केमिकल या फिर मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
इस्राइली तकनीक से साफ होने के बाद यह पानी खेतों व फसलों के लिए किसी भी तरीके से नुकसानदायक नहीं होगा। यह पानी किसानों को सिंचाई के लिए देने के अलावा मकान बनाने आदि कार्यों में भी प्रयोग लाया जा सकता है।
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जल्दी शुरू होगा काम
धामपुर चीनी मिल के जीएम केमिकल आनंद प्रकाश मिश्रा के अनुसार चीनी मिल में इस्राइली तकनीक से पानी को साफ करने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया है। कुछ दिनों में इस्राइल के पौधे व पत्थर भी लाकर लगा दिए जाएंगे। मिल पहले भी बैक्टीरिया से पानी साफ करती थी। पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दृष्टि से मिल ने यह प्रोजेक्ट शुरू किया है।
इस तरह करेगा काम
धामपुर चीनी मिल में तीन ब्लॉक बनाए जाएंगे। हर ब्लॉक में पत्थरों की परत बिछाई जाएगी और जगह-जगह इजरायल से आए पेड़ लगाए जाएंगे। एक ब्लॉक में एक दिन का पानी छोड़ा जाएगा। यह पानी अपने ब्लॉक में बनी नालियों में व पेड़ों की जड़ में घूमता रहेगा। तीसरे दिन इस पानी के सभी हानिकारक तत्व निष्क्रिय हो जाएंगे।
यह है पानी शुद्ध होने का कारण
पहाड़ों से आने वाली नदियां े खनिज वाले पत्थरों से टकराकर बहती हैं। पानी में हानिकारक तत्व हों तो खनिज उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं। कई प्रकार के पेड़-पौधे भी पानी में हानिकारक तत्वों को निष्क्रिय करते हैं।
हर रोज साफ होगा डेढ़ लाख लीटर पानी
धामपुर चीनी मिल में हर रोज 1500 क्यूबिक पानी निकलता है। एक क्यूबिक में एक हजार लीटर होते हैं। यानि हर रोज करीब डेढ़ लाख लीटर पानी इस्तेमाल किया जाता है। धामपुर मिल शुरुआत में दो एकड़ जमीन में यह प्लांट लगाएगी। यहां पर पानी को साफ किया जाएगा।
तकनीक से किया दंग
कुछ समय पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्राइल का दौरा किया तो वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यनाहू ने प्रधानमंत्री को समुद्र का ही पानी पिलाया था। उस पानी को वहां मौके पर ही एक जीप पर लगी मशीन से साफ किया गया था। यह तकनीक देखकर सभी दंग रह गए थे। हाल ही में भारत सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए इजरायल के साथ मिलकर काम करने की बात कही है। प्रदूषण को कम करने के लिए इजरायली तकनीक अपनाई जाएगी।
समुद्र के पानी को करता है साफ
इजरायल समुद्र किनारे बसा है। उसकी अधिकांश जरूरतें समुद्र के खारे पानी से ही पूरी होती हैं। समुद्र के खारे पानी को खत्म करने के लिए इजरायल नए-नए तरीके इजाद करता रहता है। वह अपनी इन तकनीकों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
बंगलूरू में बनी है नर्सरी
इस्राइल से आने वाले पेड़ पौधों को, फैक्टरियों की सप्लाई करने के लिए बंगलूरू में एक नर्सरी बनाई गई है। यहीं से धामपुर चीनी मिल पौधे मंगवा रही है। फिलहाल बहुत गर्मी को देखते हुए वहां से पौधे नहीं मंगवाए गए हैं।
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चीनी मिलों, डिस्टलरी प्लांट व अन्य फैक्ट्रियों में गन्ना व अन्य सामान बनाने की प्रक्रिया में काफी पानी इस्तेमाल होता है। इस पानी को बाद में मशीनों या फिर बैक्टीरिया की मदद से साफ किया जाता है। यह पानी अधिकतर चीनी मिल अपने ही खेतों में सिंचाई में प्रयोग करती हैं। कई बार किसान चीनी मिलों व अन्य फैक्ट्रियों पर गंदा पानी उनके खेतों व सड़क किनारे डालने का आरोप लगाते हैं। जिले की धामपुर चीनी मिल ने मिल में प्रयोग होकर गंदे हुए इस पानी को साफ करने के लिए इस्राइली तकनीक अपनाने की तैयारी शुरू की है। इस तकनीक में पानी को मशीन के बजाए पेड़-पौधों, पत्थरों से प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाएगा। पानी को इस्तेमाल करने में किसी भी तरह के केमिकल या फिर मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
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इस्राइली तकनीक से साफ होने के बाद यह पानी खेतों व फसलों के लिए किसी भी तरीके से नुकसानदायक नहीं होगा। यह पानी किसानों को सिंचाई के लिए देने के अलावा मकान बनाने आदि कार्यों में भी प्रयोग लाया जा सकता है।
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जल्दी शुरू होगा काम
धामपुर चीनी मिल के जीएम केमिकल आनंद प्रकाश मिश्रा के अनुसार चीनी मिल में इस्राइली तकनीक से पानी को साफ करने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया है। कुछ दिनों में इस्राइल के पौधे व पत्थर भी लाकर लगा दिए जाएंगे। मिल पहले भी बैक्टीरिया से पानी साफ करती थी। पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दृष्टि से मिल ने यह प्रोजेक्ट शुरू किया है।
इस तरह करेगा काम
धामपुर चीनी मिल में तीन ब्लॉक बनाए जाएंगे। हर ब्लॉक में पत्थरों की परत बिछाई जाएगी और जगह-जगह इजरायल से आए पेड़ लगाए जाएंगे। एक ब्लॉक में एक दिन का पानी छोड़ा जाएगा। यह पानी अपने ब्लॉक में बनी नालियों में व पेड़ों की जड़ में घूमता रहेगा। तीसरे दिन इस पानी के सभी हानिकारक तत्व निष्क्रिय हो जाएंगे।
यह है पानी शुद्ध होने का कारण
पहाड़ों से आने वाली नदियां े खनिज वाले पत्थरों से टकराकर बहती हैं। पानी में हानिकारक तत्व हों तो खनिज उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं। कई प्रकार के पेड़-पौधे भी पानी में हानिकारक तत्वों को निष्क्रिय करते हैं।
हर रोज साफ होगा डेढ़ लाख लीटर पानी
धामपुर चीनी मिल में हर रोज 1500 क्यूबिक पानी निकलता है। एक क्यूबिक में एक हजार लीटर होते हैं। यानि हर रोज करीब डेढ़ लाख लीटर पानी इस्तेमाल किया जाता है। धामपुर मिल शुरुआत में दो एकड़ जमीन में यह प्लांट लगाएगी। यहां पर पानी को साफ किया जाएगा।
तकनीक से किया दंग
कुछ समय पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्राइल का दौरा किया तो वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यनाहू ने प्रधानमंत्री को समुद्र का ही पानी पिलाया था। उस पानी को वहां मौके पर ही एक जीप पर लगी मशीन से साफ किया गया था। यह तकनीक देखकर सभी दंग रह गए थे। हाल ही में भारत सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए इजरायल के साथ मिलकर काम करने की बात कही है। प्रदूषण को कम करने के लिए इजरायली तकनीक अपनाई जाएगी।
समुद्र के पानी को करता है साफ
इजरायल समुद्र किनारे बसा है। उसकी अधिकांश जरूरतें समुद्र के खारे पानी से ही पूरी होती हैं। समुद्र के खारे पानी को खत्म करने के लिए इजरायल नए-नए तरीके इजाद करता रहता है। वह अपनी इन तकनीकों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
बंगलूरू में बनी है नर्सरी
इस्राइल से आने वाले पेड़ पौधों को, फैक्टरियों की सप्लाई करने के लिए बंगलूरू में एक नर्सरी बनाई गई है। यहीं से धामपुर चीनी मिल पौधे मंगवा रही है। फिलहाल बहुत गर्मी को देखते हुए वहां से पौधे नहीं मंगवाए गए हैं।