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कोटावाली और कठियारी नदी के बीच बसा है गांव प्रीतमगढ़, आवाजाही के लिए नहीं है रास्ता
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भागूवाला के गांव पीतमगढ़ में आवाजाही के लिए नदी पर रास्ता बनाते ग्रामीण।
- फोटो : NAZIBABAD
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विकास से नहीं वास्ता, लोगों ने खुद बनाया रास्ता
भागूवाला/नजीबाबाद। रिजर्व फॉरेस्ट में कोटावाली और कठियारी नदी के बीच स्थित गांव प्रीतमगढ़ उर्फ मिर्जापुर में आज तक विकास का रास्ता नहीं खुल सका। नदी पार करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। न ही पुल बनाया जा सका और न ही रपटे का निर्माण हुआ। लोग गांव से दूसरे स्थानों पर आवागमन के लिए परेशान होने लगे। जब उनकी गुहार प्रशासन ने भी नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद ही बीड़ा उठाया और श्रमदान कर नदी पर पुल बना डाला। हालांकि यह कच्चा पुल ही बनाया है।
भागूवाला क्षेत्र के गांव प्रीतमगढ़ की करीब 1500 की आबादी को आज तक अपने गांव पहुंचने की सही राह नहीं मिल सकी। कोटावाली नदी और कठियारी नदी के बीच बसे इस गांव के लोगों को दोनों नदियों से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात में तो हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं। नदी के उफान के चलते प्रीतमगढ़ के ग्रामीण अपने घरों में कैद होकर रह जाते हैं। ग्रामीणों द्वारा आवाजाही के लिए रास्ता तो बनाया जाता है, लेकिन नदी के तेज बहाव रास्ता बह जाता है। गांव के दोनों ओर के रास्ते रिजर्व फॉरेस्ट में होने के कारण आज तक विकास नहीं हो सका और न ही नदी पार करने के लिए कठियारी नदी पर रपटा व पुल का निर्माण कराया गया।
प्रीतमगढ़ में पहुंचने के लिए अलग से कोई रास्ता नहीं है। बरसात में ग्रामीणों को मजबूरन कोटावाली और कठियारी नदी की लहरों से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने गांव में आवाजाही के लिए चंदा एकत्रित कर कठियारी नदी पर कच्चा मार्ग बनाया है। शुक्रवार को ग्रामीणों ने नदी के पानी की निकासी के लिए मार्ग पर ह्यूम पाइप भी डाले। मार्ग बनवाने में ग्रामीण अशोक कुमार, गोविंद सिंह, अमरपाल सिंह, नरपाल, पूरन सिंह आदि ग्रामीणों का सहयोग रहा।
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भागूवाला/नजीबाबाद। रिजर्व फॉरेस्ट में कोटावाली और कठियारी नदी के बीच स्थित गांव प्रीतमगढ़ उर्फ मिर्जापुर में आज तक विकास का रास्ता नहीं खुल सका। नदी पार करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। न ही पुल बनाया जा सका और न ही रपटे का निर्माण हुआ। लोग गांव से दूसरे स्थानों पर आवागमन के लिए परेशान होने लगे। जब उनकी गुहार प्रशासन ने भी नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद ही बीड़ा उठाया और श्रमदान कर नदी पर पुल बना डाला। हालांकि यह कच्चा पुल ही बनाया है।
भागूवाला क्षेत्र के गांव प्रीतमगढ़ की करीब 1500 की आबादी को आज तक अपने गांव पहुंचने की सही राह नहीं मिल सकी। कोटावाली नदी और कठियारी नदी के बीच बसे इस गांव के लोगों को दोनों नदियों से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात में तो हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं। नदी के उफान के चलते प्रीतमगढ़ के ग्रामीण अपने घरों में कैद होकर रह जाते हैं। ग्रामीणों द्वारा आवाजाही के लिए रास्ता तो बनाया जाता है, लेकिन नदी के तेज बहाव रास्ता बह जाता है। गांव के दोनों ओर के रास्ते रिजर्व फॉरेस्ट में होने के कारण आज तक विकास नहीं हो सका और न ही नदी पार करने के लिए कठियारी नदी पर रपटा व पुल का निर्माण कराया गया।
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प्रीतमगढ़ में पहुंचने के लिए अलग से कोई रास्ता नहीं है। बरसात में ग्रामीणों को मजबूरन कोटावाली और कठियारी नदी की लहरों से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने गांव में आवाजाही के लिए चंदा एकत्रित कर कठियारी नदी पर कच्चा मार्ग बनाया है। शुक्रवार को ग्रामीणों ने नदी के पानी की निकासी के लिए मार्ग पर ह्यूम पाइप भी डाले। मार्ग बनवाने में ग्रामीण अशोक कुमार, गोविंद सिंह, अमरपाल सिंह, नरपाल, पूरन सिंह आदि ग्रामीणों का सहयोग रहा।
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