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छाने लगी है दिल्ली के स्मॉग की परत
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बिजनौर। सर्दियों की आहट के साथ ही जिले के आसमान में दिल्ली के स्मॉग का असर बढ़ रहा है। दीपावली पर यह स्मॉग और बढ़ सकता है। अगर स्मॉग ज्यादा बढ़ता है तो इससे सांस के रोगियों की परेशानी बढ़ सकती है।
हवा की गुणवत्ता उसमे शामिल धूल व धुएं के कणों की मात्रा पर निर्भर करती है। प्रति घन मीटर वायुमंडल में अगर धुल व धुएं के कणों की संख्या 100 माइक्रोग्राम तक रहती है तो इसका मतलब होता है कि हवा संतोषजनक है। जिले की हवा में धूल व धुएं के कणों की संख्या औसतन 60 से 70 माइक्रोग्राम तक रहती है। लेकिन दिल्ली का स्मॉग जिले की हवा को खराब करता है। इस साल लॉकडाउन की वजह से वाहनों के पहिये थमे रहे। इससे जिले की हवा में भी धूल व धुएं के कण की संख्या 65 तक रह गई थी। लेकिन सर्दी बढ़ने और दिल्ली के स्मॉग की वजह से जिले की हवा में फिर से धुंधलाने लगी है। जिले में इस समय हवा में धूल व धुएं के कण की संख्या 88 तक हो गई है। हालांकि यह अब भी संतोषजनक है लेकिन दिल्ली की हवा और खराब हुई तो जिले की हवा पर भी असर पड़ेगा।
ऐसे आता है स्मॉग
स्मॉग जिले में हवा के चलने के सिद्धांत की वजह से आता है। धूल व धुएं के कण हवा में रहते हैं। सर्दी में वायुमंडल में नमी होने की वजह से धूल के कण नमी को सोखने लगते हैं। इससे ये फूलकर मोटे हो जाते हैं और एक परत का रूप ले लेते हैं। ये हवा के साथ बहकर आसपास के इलाकों में जाते हैं। धीरे धीरे ये मोटे होकर जमीन पर बैठ जाते हैं।
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बारिश है कारगर
स्मॉग को खत्म करने का सबसे कारगर तरीका बारिश होती है। बारिश हवा में धूल व धुएं के कण को नीचे बैठा देती है और हवा को एकदम साफ कर देती है। लेकिन अगस्त के बाद से जिले में बारिश की बूंद नहीं पड़ी है।
कोट
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य के अनुसार जिले की हवा काफी अच्छी है। दिल्ली की हवा ज्यादा प्रदूषित होने पर ही यहां पर वहां का स्मॉग आ सकता है।
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हवा की गुणवत्ता उसमे शामिल धूल व धुएं के कणों की मात्रा पर निर्भर करती है। प्रति घन मीटर वायुमंडल में अगर धुल व धुएं के कणों की संख्या 100 माइक्रोग्राम तक रहती है तो इसका मतलब होता है कि हवा संतोषजनक है। जिले की हवा में धूल व धुएं के कणों की संख्या औसतन 60 से 70 माइक्रोग्राम तक रहती है। लेकिन दिल्ली का स्मॉग जिले की हवा को खराब करता है। इस साल लॉकडाउन की वजह से वाहनों के पहिये थमे रहे। इससे जिले की हवा में भी धूल व धुएं के कण की संख्या 65 तक रह गई थी। लेकिन सर्दी बढ़ने और दिल्ली के स्मॉग की वजह से जिले की हवा में फिर से धुंधलाने लगी है। जिले में इस समय हवा में धूल व धुएं के कण की संख्या 88 तक हो गई है। हालांकि यह अब भी संतोषजनक है लेकिन दिल्ली की हवा और खराब हुई तो जिले की हवा पर भी असर पड़ेगा।
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ऐसे आता है स्मॉग
स्मॉग जिले में हवा के चलने के सिद्धांत की वजह से आता है। धूल व धुएं के कण हवा में रहते हैं। सर्दी में वायुमंडल में नमी होने की वजह से धूल के कण नमी को सोखने लगते हैं। इससे ये फूलकर मोटे हो जाते हैं और एक परत का रूप ले लेते हैं। ये हवा के साथ बहकर आसपास के इलाकों में जाते हैं। धीरे धीरे ये मोटे होकर जमीन पर बैठ जाते हैं।
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बारिश है कारगर
स्मॉग को खत्म करने का सबसे कारगर तरीका बारिश होती है। बारिश हवा में धूल व धुएं के कण को नीचे बैठा देती है और हवा को एकदम साफ कर देती है। लेकिन अगस्त के बाद से जिले में बारिश की बूंद नहीं पड़ी है।
कोट
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य के अनुसार जिले की हवा काफी अच्छी है। दिल्ली की हवा ज्यादा प्रदूषित होने पर ही यहां पर वहां का स्मॉग आ सकता है।