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शहजाद हत्याकांड में दानिश को उम्रकैद की सजा

Wed, 17 Aug 2022 12:48 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Aug 2022 12:48 AM IST
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Danish gets life imprisonment in Shahzad murder case
बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायधीश एमपी सिंह ने शहजाद हत्याकांड में मोहम्मद दानिश को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस मामले में दो आरोपियों जहीन व इमरान को दोष सिद्ध न होने पर बरी कर दिया है। मिथ्या साक्ष्य देने पर चिकित्सक का नोटिस जारी किया है।
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जिला शासकीय अधिवक्ता वरूण राजपूत के अनुसार चादंपुर निवासी नौशाद ने थाना चांदपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका भाई शहजाद चांदपुर की फीना बस्ती कॉलोनी में रहता है। जबकि मोहम्मद दानिश तरकोली थाना नहटौर में रहता है। नौशाद के बड़े भाई शकील की मौत हो गई थी। दानिश ने शकील की पत्नी गुलशन से शादी कर ली। ये लोग शकील की जायदाद में हिस्सा मांग रहे थे। जिसका मुकदमा गुलशन व दानिश हार गए।
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इसी रजिंश में 21 सितंबर 2012 की रात साढ़े आठ बजे नौशाद व बहन मुनिया व शहजाद मोटरसाइकिल से अपने घर फीना बस्ती जा रहे थे। गुलाबी मार्केट काजी जादगान के पास पहुंचे तभी अचानक मोहम्मद दानिश, गुलशन, जहीन व इमरान सामने से आए और मोटरसाइकिल रुकवा ली। दानिश ने तमंचा निकालकर शहजाद को गोली मार दी, जिससे शहजाद की मौके पर ही मौत हो गई। पेश किए गए साक्ष्यों व दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने दानिश को शहजाद की हत्या का व अवैध तमंचा रखने का दोषी पाते हुए सजा सुनाई। गुलशन की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। जबकि संदेह का लाभ देते हुए इमरान व जहीन को बरी कर दिया।
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मिथ्या साक्ष्य पर डॉक्टर को नोटिस जारी
जिला एवं सत्र न्यायधीश एमपी सिंह ने शहजाद हत्याकांड में मृतक शहजाद का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. भोजराज पर वाद दर्ज कर धारा 344 के तहत नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि डॉ. भोजराज ने न्यायालय के समक्ष ऐसे तथ्य बताए हैं, जो उनके द्वारा तैयार की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मुख्य परीक्षा में दिए कथानक से भिन्न है। वे एक सरकारी अधिकारी हैं, इस प्रकार स्पष्ट है कि डॉ. भोजराज ने किसी न किसी स्तर पर असत्य साक्ष्य दिया है। इसलिए उनके विरुद्ध नोटिस जारी किया गया है।
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