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नदियों में जल नहीं संस्कृति बहती है:ओपी सिंह
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नदियों में जल नहीं संस्कृति बहती है: यूपी सिंह
बिजनौर। गंगा बैराज पर बने हैदरपुर वेटलैंड में वर्ल्ड वेटलैंड-डे पर बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल का आयोजन किया गया। फेस्टिवल मेें देशभर से आए बर्ड वॉचर प्रवासी व क्षेत्रीय पक्षियों की गिनती में लग गए हैं। जलशक्ति मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने हैदरपुर वेटलैंड में बर्ड वॉचर की टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर गंगा की धारा में 51 कछुए भी छोड़े गए।
डब्ल्यूडब्ल्यूूएफ मुजफ्फरनगर वन विभाग द्वारा बिजनौर बैराज के शीशमहल प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में जलशक्ति मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने कहा कि पहले केवल गंगा सफाई की बात होती थी संरक्षण की नहीं। पहले केवल गंगा पर घाट बनाने या सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने पर जोर दिया जाता था। नदियों के लिए सबसे जरूरी पानी होता है। अगर नदी में जल प्रवाह नहीं तो वह नदी नहीं। दिल्ली में यमुना में आठ महीने पानी नहीं रहता है। गंगा में पानी लाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए भूगर्भ जल संरक्षित होना चाहिए। कहा कि वर्षा के दिनों की संख्या घटी है। बारिश के पानी को वाटर हार्वेस्टिंग से सहेजना होगा। जिस क्षेत्र में बाढ़ का पानी आता है वहां पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। ऐसे क्षेत्र में पानी रिसकर जमीन में जाता है। आजादी के समय प्रति व्यक्ति जितना पानी था अब उसकी उपलब्धता एक चौथाई रह गई है। जलस्त्रोत खत्म हो रहे हैं। हमारे देश में जल को जगदीश माना जाता है। इसे बचाने के लिए सबको आगे आना होगा। नदियों में जल नहीं संस्कृतियां बहती हैं। जैव विविधता वाले क्षेत्रों को सब बचाएं। अगर ऐसा न हुआ तो भविष्य में भयंकर परिणाम झेलने होंगे।
चीफ कंजरवेटर वीके जैन ने कहा कि सीमित संसाधनों में भी हैदरपुर वेटलैंड को विकसित करने के प्रयास किए गए हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सीईओ रवि सिंह ने कहा कि हैदरपुर वेटलैंड पक्षियों के पड़ाव के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हैदरपुर वेटलैंड को इसी तरह विकसित किया गया तो अगले साल और चिड़िया दिखेंगी। उन्होंने कुछ दिन पहले यहां अपनी टीम भेजी थी तो एक ही दिन में पक्षियों की 170 प्रजाति दिखीं थीं। यहां पर मगरमच्छ, कछुए, बारहसिंगा आदि भी हैं। डा.बृजपाल ने कहा कि मछलियां भी पानी की मुख्य धारा के बजाए वेटलैंड के उथले पानी में ही अंडे देती हैं। इनसे निकले बच्चे बाद में नदी की मुख्य धारा में आ जाते हैं। वेटलैंड जल जीवन के लिए बहुत जरूरी होता है। वेटलैंड बनाने में सराहनीय योगदान देने वाले आशीष लोया, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना निदेशक संजीव यादव व शाहनवाज आदि को कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। इस मौके पर डीएफओ मुजफ्फरनगर सूरज ने सभी अतिथियों को उपहार में पौधे दिए। इस दौरान डीएफओ डा.एम सेम्मारन, गंगा विचार मंच नमामि गंगे के जिला संयोजक सौरभ सिंघल, सीडीओ केपी सिंह, जोएल लायल आदि मौजूद रहे।
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वेटलैंड को और किया जाएगा विकसित
बिजनौर के डीएम रमाकांत पांडेय ने कहा कि वेटलैंड को और विकसित किया जाएगा। कहा कि किसी जीव की एक भी प्रजाति खत्म होने से पूरा सिस्टम डिस्टर्ब होता है।
वेटलैंड में शिकार और अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा
सहारनपुर कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि अच्छी सोच से अच्छे काम होते हैं। कहा कि वेटलैंड को विकसित किया जाएगा, लेकिन इसकी प्राकृतिक अवस्था का भी ध्यान रखा जाएगा। वेटलैंड में शिकार, अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा। वेटलैंड तो स्वत: विकसित क्षेत्र है। यह गंगा और सोनाली नदी के पानी से बना है।
शपथ दिलाई
कार्यक्रम में हैदरपुर वेटलैंड से जुड़ी पुस्तिका, पोस्टर व स्टीकर का विमोचन किया गया। जलशक्ति मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने सभी को जैव विविधता, गंगा संरक्षण व पानी की बचत की शपथ दिलाई।
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बिजनौर। गंगा बैराज पर बने हैदरपुर वेटलैंड में वर्ल्ड वेटलैंड-डे पर बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल का आयोजन किया गया। फेस्टिवल मेें देशभर से आए बर्ड वॉचर प्रवासी व क्षेत्रीय पक्षियों की गिनती में लग गए हैं। जलशक्ति मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने हैदरपुर वेटलैंड में बर्ड वॉचर की टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर गंगा की धारा में 51 कछुए भी छोड़े गए।
डब्ल्यूडब्ल्यूूएफ मुजफ्फरनगर वन विभाग द्वारा बिजनौर बैराज के शीशमहल प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में जलशक्ति मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने कहा कि पहले केवल गंगा सफाई की बात होती थी संरक्षण की नहीं। पहले केवल गंगा पर घाट बनाने या सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने पर जोर दिया जाता था। नदियों के लिए सबसे जरूरी पानी होता है। अगर नदी में जल प्रवाह नहीं तो वह नदी नहीं। दिल्ली में यमुना में आठ महीने पानी नहीं रहता है। गंगा में पानी लाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए भूगर्भ जल संरक्षित होना चाहिए। कहा कि वर्षा के दिनों की संख्या घटी है। बारिश के पानी को वाटर हार्वेस्टिंग से सहेजना होगा। जिस क्षेत्र में बाढ़ का पानी आता है वहां पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। ऐसे क्षेत्र में पानी रिसकर जमीन में जाता है। आजादी के समय प्रति व्यक्ति जितना पानी था अब उसकी उपलब्धता एक चौथाई रह गई है। जलस्त्रोत खत्म हो रहे हैं। हमारे देश में जल को जगदीश माना जाता है। इसे बचाने के लिए सबको आगे आना होगा। नदियों में जल नहीं संस्कृतियां बहती हैं। जैव विविधता वाले क्षेत्रों को सब बचाएं। अगर ऐसा न हुआ तो भविष्य में भयंकर परिणाम झेलने होंगे।
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चीफ कंजरवेटर वीके जैन ने कहा कि सीमित संसाधनों में भी हैदरपुर वेटलैंड को विकसित करने के प्रयास किए गए हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सीईओ रवि सिंह ने कहा कि हैदरपुर वेटलैंड पक्षियों के पड़ाव के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हैदरपुर वेटलैंड को इसी तरह विकसित किया गया तो अगले साल और चिड़िया दिखेंगी। उन्होंने कुछ दिन पहले यहां अपनी टीम भेजी थी तो एक ही दिन में पक्षियों की 170 प्रजाति दिखीं थीं। यहां पर मगरमच्छ, कछुए, बारहसिंगा आदि भी हैं। डा.बृजपाल ने कहा कि मछलियां भी पानी की मुख्य धारा के बजाए वेटलैंड के उथले पानी में ही अंडे देती हैं। इनसे निकले बच्चे बाद में नदी की मुख्य धारा में आ जाते हैं। वेटलैंड जल जीवन के लिए बहुत जरूरी होता है। वेटलैंड बनाने में सराहनीय योगदान देने वाले आशीष लोया, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना निदेशक संजीव यादव व शाहनवाज आदि को कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। इस मौके पर डीएफओ मुजफ्फरनगर सूरज ने सभी अतिथियों को उपहार में पौधे दिए। इस दौरान डीएफओ डा.एम सेम्मारन, गंगा विचार मंच नमामि गंगे के जिला संयोजक सौरभ सिंघल, सीडीओ केपी सिंह, जोएल लायल आदि मौजूद रहे।
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वेटलैंड को और किया जाएगा विकसित
बिजनौर के डीएम रमाकांत पांडेय ने कहा कि वेटलैंड को और विकसित किया जाएगा। कहा कि किसी जीव की एक भी प्रजाति खत्म होने से पूरा सिस्टम डिस्टर्ब होता है।
वेटलैंड में शिकार और अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा
सहारनपुर कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि अच्छी सोच से अच्छे काम होते हैं। कहा कि वेटलैंड को विकसित किया जाएगा, लेकिन इसकी प्राकृतिक अवस्था का भी ध्यान रखा जाएगा। वेटलैंड में शिकार, अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा। वेटलैंड तो स्वत: विकसित क्षेत्र है। यह गंगा और सोनाली नदी के पानी से बना है।
शपथ दिलाई
कार्यक्रम में हैदरपुर वेटलैंड से जुड़ी पुस्तिका, पोस्टर व स्टीकर का विमोचन किया गया। जलशक्ति मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने सभी को जैव विविधता, गंगा संरक्षण व पानी की बचत की शपथ दिलाई।

बिजनौर में गंगा बैराज पर अठखेलियां करते प्रवासी पक्षी।- फोटो : BIJNOR

वेटलेंड में मिली पेंडूलाइन टिट।- फोटो : BIJNOR