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दो चीनी मिलों की बढ़ेगी पेराई क्षमता
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दो चीनी मिलों की बढ़ेगी पेराई क्षमता
बिजनौर। जिले की दो चीनी मिलों बरकातपुर और बुंदकी की पेराई क्षमता इस साल बढ़ाई जाएगी। दोनों मिलों की पेराई क्षमता बढ़ने से इनसे जुड़े हजारों किसानों को फायदा होगा। किसानों को गन्ना पर्ची समय से मिलेगी और खेत भी जल्दी खाली होंगे। गन्ना रकबा लगातार बढ़ने पर मिलों को भी गन्ना पेराई करने में परेशानी हो रही थी। अब चीनी मिलों और किसानों दोनों की समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
गन्ना जिले के किसानों की मुख्य फसल है। पिछले सालों में किसान लगातार गन्ने का रकबा बढ़ा रहे हैं। दस सालों में गन्ने का रकबा 38 हजार हेक्टेयर तक बढ़ चुका है। गन्ना रकबा बढ़ने के साथ-साथ गन्ने की पैदावार भी पिछले सालों में बहुत ज्यादा हो गई है। रकबा और पैदावार दोनों तो बढ़ गए, लेकिन चीनी मिलों की पेराई क्षमता पहले की ही तरह रही। इससे गन्ना पेराई सत्र नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू हो जाने के बाद भी मई के आखिरी तक चल जाता है। इससे किसान भी परेशान रहते हैं। नजीबाबाद, बिजनौर, चांदपुर, बरकातपुर, बुंदकी आदि से जुड़े किसान मिलों की पेराई क्षमता बढ़ाने की मांग काफी समय से कर रहे थे। उनकी ये मांग अब पूरी होने जा रही है।
बरकातपुर और बुंदकी चीनी मिल की पेराई क्षमता इस साल दस-दस हजार क्विंटल प्रतिदिन तक बढ़ाई जा रही है। इसके लिए शासन को पत्र लिख दिया गया है। शासन के निर्देशानुसार ही आगे का काम होगा। बिजनौर चीनी मिल में भी इस बार काफी परिवर्तन किए गए हैं। पहले सफाई मरम्मत के समय मिल में 35 घंटे तक पेराई बंद रहती थी। इस बार मिल में दो टर्बाइन लगाई गई हैं और गन्ना पेरने की व्यवस्था में भी थोड़ा बदलाव किया गया है। इससे मिल में अब सफाई और मरम्मत का काम केवल सात से आठ घंटे में ही हो जाएगा। बुंदकी चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक रमेश परशुरामपुरिया के अनुसार पेराई क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। शासन के निर्देश के अनुसार ही पेराई की जाएगी।
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चीनी मिल पेराई क्षमता
धामपुर 140000
स्योहारा 130000
बिलाई 90000
बहादरपुर 75000
बरकातपुर 70000
बुंदकी 65000
चांदपुर 45000
बिजनौर 35000
नजीबाबाद 30000
कुल 680000
(नोट : पेराई की क्षमता क्विंटल प्रतिदिन में है।)
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बिजनौर। जिले की दो चीनी मिलों बरकातपुर और बुंदकी की पेराई क्षमता इस साल बढ़ाई जाएगी। दोनों मिलों की पेराई क्षमता बढ़ने से इनसे जुड़े हजारों किसानों को फायदा होगा। किसानों को गन्ना पर्ची समय से मिलेगी और खेत भी जल्दी खाली होंगे। गन्ना रकबा लगातार बढ़ने पर मिलों को भी गन्ना पेराई करने में परेशानी हो रही थी। अब चीनी मिलों और किसानों दोनों की समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
गन्ना जिले के किसानों की मुख्य फसल है। पिछले सालों में किसान लगातार गन्ने का रकबा बढ़ा रहे हैं। दस सालों में गन्ने का रकबा 38 हजार हेक्टेयर तक बढ़ चुका है। गन्ना रकबा बढ़ने के साथ-साथ गन्ने की पैदावार भी पिछले सालों में बहुत ज्यादा हो गई है। रकबा और पैदावार दोनों तो बढ़ गए, लेकिन चीनी मिलों की पेराई क्षमता पहले की ही तरह रही। इससे गन्ना पेराई सत्र नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू हो जाने के बाद भी मई के आखिरी तक चल जाता है। इससे किसान भी परेशान रहते हैं। नजीबाबाद, बिजनौर, चांदपुर, बरकातपुर, बुंदकी आदि से जुड़े किसान मिलों की पेराई क्षमता बढ़ाने की मांग काफी समय से कर रहे थे। उनकी ये मांग अब पूरी होने जा रही है।
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बरकातपुर और बुंदकी चीनी मिल की पेराई क्षमता इस साल दस-दस हजार क्विंटल प्रतिदिन तक बढ़ाई जा रही है। इसके लिए शासन को पत्र लिख दिया गया है। शासन के निर्देशानुसार ही आगे का काम होगा। बिजनौर चीनी मिल में भी इस बार काफी परिवर्तन किए गए हैं। पहले सफाई मरम्मत के समय मिल में 35 घंटे तक पेराई बंद रहती थी। इस बार मिल में दो टर्बाइन लगाई गई हैं और गन्ना पेरने की व्यवस्था में भी थोड़ा बदलाव किया गया है। इससे मिल में अब सफाई और मरम्मत का काम केवल सात से आठ घंटे में ही हो जाएगा। बुंदकी चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक रमेश परशुरामपुरिया के अनुसार पेराई क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। शासन के निर्देश के अनुसार ही पेराई की जाएगी।
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चीनी मिल पेराई क्षमता
धामपुर 140000
स्योहारा 130000
बिलाई 90000
बहादरपुर 75000
बरकातपुर 70000
बुंदकी 65000
चांदपुर 45000
बिजनौर 35000
नजीबाबाद 30000
कुल 680000
(नोट : पेराई की क्षमता क्विंटल प्रतिदिन में है।)