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नारनौर मेले पर संकट, हस्तिनापुर पुलिस ने नहीं दी अनुमति
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चांदपुर-जलीलपुर क्षेत्र में नारनौर गंगा घाट पर होती गंगा स्नान पर मेले की तैयारी।
- फोटो : BIJNOR
नारनौर मेले पर संकट, हस्तिनापुर पुलिस ने नहीं दी अनुमति
जलीलपुर/चांदपुर (बिजनौर)। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा घाट नारनौर पर लगने वाला मेला सीमा विवाद में फंसता दिखाई दे रहा है। मेला आयोजन समिति ने रास्ता, बिजली, पानी आदि की व्यवस्था दुरुस्त कर ली है। दुकानदार पहुंचने शुरू हो गए हैं। मेला लगने वाला स्थान जिला मेरठ की सीमा में है, जिसे लेकर विवाद है। हस्तिनापुर पुलिस ने मेले की अनुमति नहीं दी है।
जलीलपुर क्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर नारनौर गंगा घाट पर दशकों से मेला लगता रहा है। प्रत्येक वर्ष बिना प्रशासनिक व्यवस्थाओं के ही गंगा स्नान मेला लगता रहा है। मेला में बिजली, पानी व रास्ता आदि की व्यवस्था ग्राम पंचायत नारनौर के लोग अन्य ग्रामीणों के सहयोग से करते हैं। मेला आयोजन समिति के सदस्यों ने रास्ता, बिजली, पानी आदि की व्यवस्था कर दी है। स्नान घाट की व्यवस्था की जा रही है। मेला स्थल पर दुकानदारों का पहुंचना शुरू हो गया है। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले आदि लग रहे हैं।
इस सबके बीच शनिवार को मेरठ के थाना हस्तिनापुर पुलिस ने आकर मोटर बोट से मेला स्थल आकर आपत्ति की। मेला आयोजन समिति के कार्यालय पर मौजूद आकाश कुमार, विजय पाल सिंह सैनी, रणवीर सिंह, धर्मेंद्र सिंह आदि दर्जनों लोगों ने बताया हस्तिनापुर पुलिस मोटर बोट से अपने साथ चार लोगों को ले गई है। मेला लगने वाला स्थान मेरठ जनपद की सीमा में है, जबकि अधिकांश श्रद्धालु बिजनौर जनपद के पहुंचते हैं। थाना प्रभारी हस्तिनापुर ने बताया मेला लगाने की अनुमति नहीं ली गई है।
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आस्था को सीमा में बांधने का प्रयास
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर जलीलपुर क्षेत्र में सबसे बड़ा गंगा स्नान मेला नारनौर घाट पर लगता रहा है। मेला बिना प्रशासनिक व्यवस्थाओं के कई दशकों से लगता है। 80 वर्षीय पंडित ईश्वर दयाल शर्मा ने बताया नारनौर गंगा घाट पर शताब्दियों से गंगा स्नान मेला लगता आ रहा। 70 वर्षीय रघुवर दयाल ने बताया नारनौर गंगा घाट का मेला बहुत पुराना है, बुजुर्ग बताते थे सैकड़ों साल से नारनौर गंगा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर जाकर श्रद्धालु गंगा स्नान करते थे। पिछले कुछ वर्षों से ग्राम पंचायत नारनौर के लोग अन्य लोगों के सहयोग से मेला की व्यवस्था कर रहे हैं। जिसमें बिजली, पानी, रास्ता आदि की सुविधा दी जाती है। इस बार आस्था को सीमा में बांधने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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जलीलपुर/चांदपुर (बिजनौर)। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा घाट नारनौर पर लगने वाला मेला सीमा विवाद में फंसता दिखाई दे रहा है। मेला आयोजन समिति ने रास्ता, बिजली, पानी आदि की व्यवस्था दुरुस्त कर ली है। दुकानदार पहुंचने शुरू हो गए हैं। मेला लगने वाला स्थान जिला मेरठ की सीमा में है, जिसे लेकर विवाद है। हस्तिनापुर पुलिस ने मेले की अनुमति नहीं दी है।
जलीलपुर क्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर नारनौर गंगा घाट पर दशकों से मेला लगता रहा है। प्रत्येक वर्ष बिना प्रशासनिक व्यवस्थाओं के ही गंगा स्नान मेला लगता रहा है। मेला में बिजली, पानी व रास्ता आदि की व्यवस्था ग्राम पंचायत नारनौर के लोग अन्य ग्रामीणों के सहयोग से करते हैं। मेला आयोजन समिति के सदस्यों ने रास्ता, बिजली, पानी आदि की व्यवस्था कर दी है। स्नान घाट की व्यवस्था की जा रही है। मेला स्थल पर दुकानदारों का पहुंचना शुरू हो गया है। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले आदि लग रहे हैं।
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इस सबके बीच शनिवार को मेरठ के थाना हस्तिनापुर पुलिस ने आकर मोटर बोट से मेला स्थल आकर आपत्ति की। मेला आयोजन समिति के कार्यालय पर मौजूद आकाश कुमार, विजय पाल सिंह सैनी, रणवीर सिंह, धर्मेंद्र सिंह आदि दर्जनों लोगों ने बताया हस्तिनापुर पुलिस मोटर बोट से अपने साथ चार लोगों को ले गई है। मेला लगने वाला स्थान मेरठ जनपद की सीमा में है, जबकि अधिकांश श्रद्धालु बिजनौर जनपद के पहुंचते हैं। थाना प्रभारी हस्तिनापुर ने बताया मेला लगाने की अनुमति नहीं ली गई है।
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आस्था को सीमा में बांधने का प्रयास
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर जलीलपुर क्षेत्र में सबसे बड़ा गंगा स्नान मेला नारनौर घाट पर लगता रहा है। मेला बिना प्रशासनिक व्यवस्थाओं के कई दशकों से लगता है। 80 वर्षीय पंडित ईश्वर दयाल शर्मा ने बताया नारनौर गंगा घाट पर शताब्दियों से गंगा स्नान मेला लगता आ रहा। 70 वर्षीय रघुवर दयाल ने बताया नारनौर गंगा घाट का मेला बहुत पुराना है, बुजुर्ग बताते थे सैकड़ों साल से नारनौर गंगा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर जाकर श्रद्धालु गंगा स्नान करते थे। पिछले कुछ वर्षों से ग्राम पंचायत नारनौर के लोग अन्य लोगों के सहयोग से मेला की व्यवस्था कर रहे हैं। जिसमें बिजली, पानी, रास्ता आदि की सुविधा दी जाती है। इस बार आस्था को सीमा में बांधने के प्रयास किए जा रहे हैं।