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बाघ की खाल, हड्डी के साथ दो पकड़े

Wed, 09 May 2018 11:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Wed, 09 May 2018 11:30 PM IST
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Tiger skins, holding two with bone
बाघ की खाल के साथ पकड़े गए तस्कर। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में एसटीएफ मेरठ व वन विभाग बिजनौर की टीम ने बावरिया गैंग के दो सदस्यों को बाघ की खाल और हड्डी के साथ दबोचा है। खाल व हड्डी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की योजना थी। पुलिस अब गैंग के बाकी सदस्यों की   तलाश में जुट गई है। 
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वन्यजीवों के लिए काम करने वाली एक संस्था वाइल्ड लाइफ एसओएस को सामाजिक वानिकी प्रभाग बिजनौर में बाघ का शिकार होने की सूचना मिली। संस्था ने एसटीएफ मेरठ को इसके बारे में बताया। बुधवार सुबह एसटीएफ व वन विभाग की टीम ने बढ़ापुर के वन क्षेत्र से नगीना बॉर्डर के पास एक नाले से दो व्यक्तियों को पकड़ा। दोनों के पास एक बैग से बाघ की खाल व हड्डी बरामद हुई। बाघ की खाल करीब दस फुट लंबी व चार फुट चौड़ी है। 
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इसके अलावा 17.6 किलो हड्डी भी बरामद की है। आरोपियों ने अपने नाम हरियाणा के जिंद जिले की तहसील हंसी निवासी रोहताश व दास बताया है। उन्होंने एसटीएफ को बताया कि उन्हें गांव के ही गुलाब ने फोन कर बाघ की हड्डी और खाल के बारे में बताया था। कुछ दिन पहले उन्हें बता दिया गया था कि बाघ की हड्डी व खाल कहां पर रखी है। रोहताश एक बार आकर जगह देख भी गया था। 
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सात मई को रोहताश और दास ट्रेन से नगीना पहुंचे। रात को जंगल में रुके। बुधवार को वे मौका देखकर बाघ की खाल व हड्डी लेकर जा रहे थे। बाघ का शिकार किसने किया उन्होंने इसके बारे में जानकारी होने से इंकार कर दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाघ की हड्डी और खाल की कीमत  करीब तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है। एसटीएफ ने आरोपियों का चालान कर दिया है। आरोपियों से गैंग के बाकी सदस्यों के बारे में पूछताछ की जा रही है। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक दास के पिता के भी बावरिया गैंग से जुड़े होने का पता चला है। 


डंडों से पीटकर करते हैं बाघ का शिकार
बिजनौर में बाघों के शिकार से इनकी संख्या दिनोंदिन घटती जा रही है। बावरिया गैंग के सदस्य डंडों से पीटकर ही बाघ को मौत के घाट उतार देते हैं। वन क्षेत्र में बाघ निर्भय होकर घूमता है। जंगल में जानवरों द्वारा ही बनाई गई पगडंडियों पर बाघ चलते हैं। बावरिया गैंग के सदस्य जंगल में ही बाघ के पंजों को पहचानकर उनकी रेकी करते रहते हैं। बाघ जहां से अधिक गुजरता है, वहां पर खटका (जानवरों के पैर को एक झटके से पकड़ने वाली लोहे की वस्तु) लगा देते हैं। बाघ खटके में फंस जाते हैं। जहां भी खटका लगाया जाता है, वहां पर बावरिया गैंग के सदस्य नजर रखते हैं। गैंग के सदस्य स्थानीय लोगों को भी कुछ रुपये देकर अपने पक्ष में कर लेते हैं। जब बाघ खटके में फंस जाता है तो उसके सिर पर डंडों से वार किया जाता है। डंडों से पीट पीटकर ही बाघ को मौत के घाट उतार दिया जाता है। उसकी खाल, मांस और हड्डी को बहुत ही बारीकी से अलग किया जाता है। यह माल यहां से नेपाल भेज दिया जाता है। बाघ की खाल को रईस लोग शोपीस बनाकर रखते हैं। इसकी हड्डी को शराब में डाल दिया जाता है। कुछ समय बाद हड्डी निकाल देने से यह शराब पी जाती है। इस तरह बनी शराब बहुत महंगी होती है। यह भी माना जाता है कि बाघ की हड्डी पीसकर इसका सेवन करने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। 
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