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पटकथा थी तैयार, युवती को बताया कत्ल का कारण
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 27 Feb 2017 11:55 PM IST
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जहर खाने के बाद संजय को अस्पताल ले जाते परिजन और ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर पुलिस सोमवार को विशाल मर्डर केस के खुलासे की तैयारी में थी। प्रेम प्रसंग को हत्या का कारण दर्शाया जाना था। संजय के जहर खाने के बाद पुलिस एकाएक बैकफुट पर आ गयी। इसके बाद जिनको हत्याभियुक्त बनाया जाना था, उनको रिहा कर दिया गया। इसके बाद पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लग गया है।
सोमवार को पकडे़ गए युवकों को निर्दोष बताते हुए ग्रामीण जाट नेता चौधरी शूरवीर सिंह, जिला पंचायत सदस्य साकेंद्र चौधरी, पूर्व प्रधान विनोद, वीरेंद्र सिंह समेत कई नेताओं के साथ एसपी से मिलने के लिए उनके कार्यालय पहुंच गए। एसपी ने शूरवीर सिंह समेत कई नेताओं को वार्ता के लिए अंदर बुला लिया। विशाल के पिता संजय समेत बाकी लोग बाहर रहे। शूरवीर सिंह के मुताबिक, वार्ता के दौरान एसपी हिरासत में लिए गए तीनों युवकों को इस केस का दोषी बताने लगे। उनका कहना था कि एक युवती को लेकर यह घटना हुई है। विशाल और हिरासत में लिए गए युवक मोबाइल पर युवती से बात करते थ्रे।
संजय के जहर खाने के बाद ग्रामीण इस केस के खुलासे में लगे अमरोहा के इंस्पेक्टर आरआर कठेरिया से भिड़ गए। उन्होंने उन पर हिरासत में लिए युवकों को विशाल के मर्डर में झूठा फंसाने का आरोप लगाया। आरआर कठेरिया को ग्रामीणों ने खूब खरी-खोटी सुनाई। इस घटना को लेकर काफी देर तक हंगामा मचा रहा। कठेरिया के वहां से जाने पर ही ग्रामीण शांत हुए।
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जिस निजी अस्पताल में संजय को भर्ती कराया गया, उसके बाहर सीओ सिटी असित श्रीवास्तव, शहर कोतवाल शैलेंद्र गौतम, नहटौर के प्रभारी निरीक्षक प्रेमवीर राणा पुलिस और पीएसी के साथ मौजूद रहे। एसडीएम अनुज सिंह ने निजी अस्पताल पहुंच कर संजय के बयान दर्ज किए। संजय व उनके भाई ने आरोप लगाया कि पुलिस एक विधायक के दबाव में काम कर रही है। नामजद आरोपियों को बचाकर निर्दोष युवकों को इस केस में फंसा रही है। एसडीएम अनुज सिंह के मुताबिक, संजय की हालत में सुधार है और वे खतरे से बाहर हैं। संजय सिंह नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। बाद में लगभग 3.30 बजे मंडावर थाने में बंद इन युवकों को भी रिहा कर दिया गया। हालांकि एसपी देहात डा. धर्मवीर से जब ये पूछा गया अगर पुलिस सही थी तो युवकों को रिहा कैसे कर दिया गया तो उनका कहना था कि ग्रामीणों की सुपुर्दगी में दिया गया है, रिहा नहीं किया गया।
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सोमवार को पकडे़ गए युवकों को निर्दोष बताते हुए ग्रामीण जाट नेता चौधरी शूरवीर सिंह, जिला पंचायत सदस्य साकेंद्र चौधरी, पूर्व प्रधान विनोद, वीरेंद्र सिंह समेत कई नेताओं के साथ एसपी से मिलने के लिए उनके कार्यालय पहुंच गए। एसपी ने शूरवीर सिंह समेत कई नेताओं को वार्ता के लिए अंदर बुला लिया। विशाल के पिता संजय समेत बाकी लोग बाहर रहे। शूरवीर सिंह के मुताबिक, वार्ता के दौरान एसपी हिरासत में लिए गए तीनों युवकों को इस केस का दोषी बताने लगे। उनका कहना था कि एक युवती को लेकर यह घटना हुई है। विशाल और हिरासत में लिए गए युवक मोबाइल पर युवती से बात करते थ्रे।
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संजय के जहर खाने के बाद ग्रामीण इस केस के खुलासे में लगे अमरोहा के इंस्पेक्टर आरआर कठेरिया से भिड़ गए। उन्होंने उन पर हिरासत में लिए युवकों को विशाल के मर्डर में झूठा फंसाने का आरोप लगाया। आरआर कठेरिया को ग्रामीणों ने खूब खरी-खोटी सुनाई। इस घटना को लेकर काफी देर तक हंगामा मचा रहा। कठेरिया के वहां से जाने पर ही ग्रामीण शांत हुए।
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जिस निजी अस्पताल में संजय को भर्ती कराया गया, उसके बाहर सीओ सिटी असित श्रीवास्तव, शहर कोतवाल शैलेंद्र गौतम, नहटौर के प्रभारी निरीक्षक प्रेमवीर राणा पुलिस और पीएसी के साथ मौजूद रहे। एसडीएम अनुज सिंह ने निजी अस्पताल पहुंच कर संजय के बयान दर्ज किए। संजय व उनके भाई ने आरोप लगाया कि पुलिस एक विधायक के दबाव में काम कर रही है। नामजद आरोपियों को बचाकर निर्दोष युवकों को इस केस में फंसा रही है। एसडीएम अनुज सिंह के मुताबिक, संजय की हालत में सुधार है और वे खतरे से बाहर हैं। संजय सिंह नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। बाद में लगभग 3.30 बजे मंडावर थाने में बंद इन युवकों को भी रिहा कर दिया गया। हालांकि एसपी देहात डा. धर्मवीर से जब ये पूछा गया अगर पुलिस सही थी तो युवकों को रिहा कैसे कर दिया गया तो उनका कहना था कि ग्रामीणों की सुपुर्दगी में दिया गया है, रिहा नहीं किया गया।