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हत्याभियुक्तों को मासूम पर नहीं आया तरस

Tue, 30 Aug 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Tue, 30 Aug 2016 12:14 AM IST
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Htyabhiyukton did not spare the innocent
बिजनौर में वासु की आत्म की शांति के लिए शहर में निकाला कैंडल मार्च। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में मासूम छात्र वासु का कत्ल करते समय हत्याभियुक्तों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। वासु का कत्ल उसे निर्वस्त्र करके किया गया था। सोमवार को जंगल से परिजनों को वासु की शर्ट , टाई का आधा हिस्सा, नेकर व एक मौजा मिला है। ये कपडे़ जहां जंगल में शव दबा था, वहां से  कुछ दूरी पर पड़े मिले हैं। वासु  के सभी कपड़े परिजनों ने पुलिस को सौंप दिए है।  
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 वासु का शव मिलने के बाद उसके कत्ल की रोज नई कहानी सामने आ रही है। वासु का कत्ल हत्याभियुक्तों  ने बड़े निर्दयी तरीके से किया है। हत्यारोपियों को कत्ल करते समय वासु पर कोई तरस नहीं आया। सोमवार को वासु के  परिजन रिश्तेदारों के साथ गांव बांकपुर के जंगल में उस जगह गए, जहां वासु का कत्ल करके शव दबाया गया था। ये लोग आसपास के क्षेत्र को खंगालने में जुट गए। इस बीच कुछ दूरी पर जंगल से इन लोगों को वासु की शर्ट , नेकर , टाई का आधा हिस्सा, एक मौजा हाथ व पैर की हड्डी पड़ी मिली है। वासु की पैंट, बनियान  और बेल्ट नहीं मिली है। वासु के कपड़े मिलने से परिजन हक्के बक्के रहे गए। परिजनों को भी कपड़े मिलने से लग रहा है कि क्रूरता के साथ वासु का मर्डर किया गया। वासु के कपड़े मिलने से साफ है कि उसे कत्ल करने से पहले निर्वस्त्र करके किया गया। पुलिस  के मुताबिक हत्याभियुक्तों ने सोचा होगा कि कपड़ों से कही वासु की पहचान न हो जाए । इसलिए उसे निर्वस्त्र करके मार डाला। सुनील के मुताबिक बेटे वासु का कंकाल मिलने के बाद वह कपड़ों के बारे मे  सोच रहे थे। आठ दस लोग सोमवार को जंगल में गए थे। वासु के कपडे़ व हड्डी मिली है। वे भी मानते है कि शव की पहचान  न हो जाए।
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पहले दिन ही आ गया था शक के दायरे में  
बिजनौर में छात्र वासु के अपहरण के अगले दिन ही नजर राजकुमार पर पड़ गई थी। पुलिस ने उसे दबोच भी लिया था। वासु के परिजनों ने आईजी से मिलकर राजकुमार को छुड़ा लिया था। 
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 14 जुलाई को छात्र वासु का अपहरण की रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस हरकत में आ गई थी। तत्कालीन शहर कोतवाली के प्रभारी सुरेंद्र सिंह पचौरी ने वासु को दबोचने के लिए पुलिस की आठ टीम गठित की थी। हर टीम को वासु को बरामद करने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। सुरेंद्र सिंह पचौरी को शुरू में ही वासु के अपहरण करने में राजकुमार व एक अन्य रिश्तेदार पर शक गया था। पुलिस ने दोनों को दबोच लिया। पूछताछ करने के लिए दोनों को थाने ले आई। पुलिस ने दोनों से पूछताछ शुरू भी नहीं की थी। इस बीच वासु के परिजनों ने ही उन्हें छोड़ने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया। बिजनौर आए आईजी बरेली जोन विजय सिंह मीणा से वासु के परिजनों ने मुलाकात की। आरोप लगाया कि उनका बेटा ही अगवा हुआ है और उन्हें ही पुलिस परेशान कर रही है।  उनके ही दो रिश्तेदार राजकुमार व एक अन्य को पुलिस ने पकड़ लिया है, जबकि इन दोनों का वासु के अपहरण से कोई लेनादेना नहीं है। अफसरों के आदेश पर पुलिस ने दोनों को छोड़ दिया। 

घटना से पांच दिन पहले बुना था ताना-बाना 
वासु के अपहरण का ताना-बाना राजकुमार ने अपने साथियों के साथ अपहरण करने से पांच दिन पहले ही बुना था। दोनों साथियों को अपहरण के बदले मोटी रकम देने का लालच दिया था। राजकुमार की वासु पर पहले से ही नजर थी। वासु के अपहरण करने का राजकुमार मौका तलाश रहा था। बीबीए तक की पढ़ाई किए राजकुमार गांव में सबसे ज्यादा राहुल से घुला मिला रहता था। राजकुमार ने सबसे पहले राहुल के साथ मिलकर वासु के अपहरण करने की साजिश रची। इसके बाद लोकेश को भी अपने साथ कर लिया। दोनों को वासु की फिरौती में मिलने वाली मोटी रकम का बड़ा हिस्सा देने का राजकुमार ने उन्हें लालच दिया था। उसकी बातों में दोनों आ गए। राजकुमार के मुताबिक अपहरण से पांच दिन पहले ही वासु का अगवा करने की साजिश रची थी।  
डर की वजह से नहीं खोली जुबान
राजकुमार ने अगले दिन ही गांव जाकर लोकेश को बता दिया था कि उसने वासु को मार डाला है। यह बात लोकेश छिपाए रहा। उसने अपने पिता से जरूर इस बात का जिक्र किया था। पिता और बेटे दोनों अपना मुंह बंद किए रहे। वासु के अगवा करने के बाद राजकुमार व राहुल जब वासु को अपने साथ कार में ले गए, तो लोकेश उनसे अलग हो गया। बिजनौर में रह रहे अपने मामा के घर चला गया। लोकेश अगले दिन गांव गया तो उसे वहां राजकुमार मिला। लोकेश ने राजकुमार से अगवा बालक वासु के बारे में मालूम किया। इस पर राजकुमार ने उसे बता दिया कि उसे मार डाला है। पुुलिस के मुताबिक लोकेश ने यह बात अपने पिता को भी बताई थी। लोकेश के मुताबिक उसने डर की वजह से अपना मुंह नहीं खोला था। उसे लगा था कि वह फंस जाएगा।

हत्याभियुक्तों को कड़ी सजा दो
 शिवसेना ने वासु के हत्यारोपियों पर रासुका लगाने व उनको फांसी देने की मांग की है। इस संबंध में डीएम बी चंद्रकला को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में सदस्यों ने कहा कि हम लोगों को ऐसे अपराधियों का सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लेना चाहिए। सदस्यों ने वकीलों से भी इन अपराधियों की पैरवी नहीं करने की अपील की है। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने वासु की मौत पर दुख जताते हुए उसकी  आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। जिला प्रमुख वीर सिंह,  संदीप, निपेंद्र चौहान, देवेश राणा, शुभम तोमर, राजीव तोमर, बब्लू प्रधान, भीम सिंह प्रधान आदि मौजूद रहे।

रासुका में निरुद्ध होंगे  
वासु के हत्याभियुक्त रासुका में निरुद्ध होंगे। प्रशासन आरोपियों को वासु मर्डर में कड़ी से कड़ी दिलाने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहता है। एसपी उमेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक वासु के आरोपियों पर रासुका लगेगी। पुलिस को इस बारे में निर्देश दिए गए हैं। 
धमकी दी थी 
वासु के पिता सुनील के मुताबिक दस साल से राजकुमार के परिवार से उनके अच्छे संबध नहीं थे। दस साल में राजकुमार केवल दस बार उनके घरा आया होगा। केवल उन्हें नमस्ते करता था। बाकी कोई बात उससे नहीं होती थी। एक साल पहले  राजकुमार के परिजनों से विवाद हो गया था। तब राजकुमार ने उन्हें देख लेने की धमकी दी थी। धमकी को उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया। 

बाइक पर घूमने के शौक में गई जान 
 वासु को बाइक पर घूमने का शौक उसकी जान की दुश्मन बन बैठा। हत्यारोपी फुफेरे भाई को मालूम था कि वासु को बाइक पर घूमने का बेहद शौक है। वासु कार में नहीं बाइक पर बैठना ज्यादा पसंद करता है। इसलिए अपहरण के दौरान कार के साथ राजकुमार अपने साथी लोकेश की बाइक लेकर भी आया था।  
पुलिस पूछताछ में हत्यारोपी राजकुमार ने बताया कि वासु को बचपन से बाइक पर घूमने का बेहद शौक था। वासु के परिजनों के साथ उसके घर आने वाले वासु की इस कमजोरी से अच्छी तरह वाकिफ थे। वासु का फुफेरा भाई राजकुमार भी जानता था कि बाइक के लालच में वह कहीं भी जा सकता है। राजकुमार ने पहले कार से वासु के अपहरण करने की साजिश रची थी। राजकुमार ने सोचा कि वासु कार में मुश्किल से बैठेगा। बाइक पर उसके कहने से एकदम बैठ जाएगा। राजकुमार ने साथी लोकेश को उसकी बाइक के साथ बुलाया। लोकेश को अपने साथ कार में बैठा लिया और बाइक राहुल के हवाले कर दी। 

रास्ते में राजकुमार ने कार में बैैैठे हुए राहुल की बाइक पर बैठने को वासु को इशारा किया वह  ई रिक्शा रुकवाकर राहुल के साथ बाइक पर बैठ गया। रास्ते में जब वासु को राजकुमार ने घर ले जाने को झांसा देकर कार में बैठाने की  कोशिश, तो तैयार नहीं हुआ। वासु बाइक से घर जाने की जिद करता रहा। राजकुमार ने घर जाने के लिए वासु को कार में बैठाने के लिए राजी कर लिया। तीनों हत्यारोपियों ने सारी बातें पुलिस को बताई।
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