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मंडावर थाने में किसान ने खुद को लगाई आग
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sun, 16 Apr 2017 12:03 AM IST
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जिला अस्पताल में झुलसे किसान धर्मवीर से पूछताछ करते एसपी।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में इंसाफ नहीं मिलने से आजिज एक दलित किसान ने शनिवार को मंडावर थाने में समाधान दिवस के दौरान खुद पर मिट्टी का तेल उड़ेलकर आग लगा ली। आनन -फानन में पुलिस गंभीर रूप से झुलसे किसान को लेकर जिला अस्पताल की ओर दौड़ी। घटना की सूचना से पुलिस अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। एसपी समेत तमाम अफसरों ने जिला अस्पताल पहुंचकर झुलसे किसान से घटना की जानकारी ली। किसान को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया है।
मंडावर थाने के गांव राजारामपुर खादर निवासी 50 साल के दलित किसान धर्मवीर सिंह का गांव रघुनाथपुर निवासी उदयवीर सिंह चौहान से पट्टे की भूमि को लेकर विवाद है। धर्मवीर के मुताबिक, उसके नाम खादर क्षेत्र में 15 बीघा जमीन का पट्टा हैं। इसमें आठ बीघे पर धर्मवीर ने गन्ना बो रखा है। पट्टे की जमीन पर उदयवीर हक जता रहा था और धर्मवीर को गन्ना नहीं काटने दे रहा था। धर्मवीर गन्ना काटने के लिए कई माह से अफसरों के चक्कर काट रहा था।
12 अप्रैल को हलका लेखपाल उमाशंकर मिश्रा ने पुलिस के साथ मंडावर थाने में दोनों के बीच लिखित समझौता करा दिया था।
विवादित आठ बीघा जमीन में से दोनों को चार-चार बीघा जमीन दी गई थी। धर्मवीर के मुताबिक, उसने तीन बीघा गन्ना ही काटा था। शुक्रवार को वह एक बीघा गन्ना काटने पहुंचा तो उदयवीर ने धमकाकर भगा दिया। इस पर धर्मवीर करीब 12 बजे मंडावर थाने में चल रहे समाधान दिवस में इंसाफ की गुहार लेकर पहुंचा।
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उसने थाने में प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन उसकी शिकायत को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। धर्मवीर ने प्रभारी निरीक्षक के दफ्तर के पीछे जाकर बोतल से खुद पर मिट्टी का तेल उडे़लकर आग लगा ली। धर्मवीर की चीखें सुनकर पुलिसकर्मी दौड़े। उन्होंने धर्मवीर के ऊपर रेत व कंबल डालकर आग बुझाई। आनन फानन में पुलिस धर्मवीर को लेकर जिला अस्पताल दौड़ी।
उधर, थाने में किसान के आग लगाने की सूचना से अफसरों में अफरा-तफरी फैल गई। एसपी अजय साहनी, सीओ सिटी असित श्रीवास्तव समेत तमाम अफसर जिला अस्पताल पहुंचे और धर्मवीर से घटना की जानकरी ली। डॉक्टरों ने धर्मवीर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया है। धर्मवीर के चार बच्चों में एक पुत्री व तीन पुत्र हैं। एसपी अजय साहनी के मुताबिक, धर्मवीर के यह कदम उठाने के कारण की जांच की जाएगी।
खादर की जमीन पर माफिया का राज
बिजनौर में खादर की जमीन पर माफिया हावी रहते हैं। जमीन का सीमांकन नहीं होने के कारण दूसरे राज्य उत्तराखंड के अलावा मुजफ्फरनगर , मेरठ के लोगों से जमीन को लेकर जिले के किसानों का टकराव होता रहता है। यह टकराव कभी भी खूनी खेल में बदल सकता है। हर साल गंगा के खादर क्षेत्र में गंगा की धारा रुख बदलती रहती है। बाढ़ आने पर तो किसी को पता नहीं रहता कि उसके खेत कहां हैं। यही विवाद की वजह बनता है। आत्मदाह की कोशिश करने वाले धर्मवीर व उदयवीर चौहान के बीच भी ऐसा ही विवाद था।
दोनों एक ही जमीन को अपनी बता रहे थे। पुलिस और लेखपाल ने दोनेां के बीच समझौता तो करा दिया, पर इसे लागू नहीं करा पाए। सीओ सिटी असित श्रीवास्तव के मुताबिक, मंडावर के खादर क्षेत्र में उत्तराखंड के लोगों से भी जमीन को लेकर विवाद की शिकायतें मिलती हैं।
कपड़ों में छिपाकर लाया था बोतल
धर्मवीर पूरी तैयारी के साथ थाने में आया था। मिटटी के तेल की बोतल उसने कपड़ों में छिपा रखी थी। किसी को भी उसके इरादों का अंदाजा नहीं था। उसने जान देने के लिए दिन भी थाने में समाधान दिवस वाला चुना। उसकी चीखें सुनकर पुलिसकर्मियों ने समय से उसे अस्पताल पहुंचा दिया। धर्मवीर ने अफसरों को बताया कि उदयवीर के धमकी देने के बाद उसने लेखपाल से शिकायत की थी, पर उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद उसने जान देने का फैसला ले लिया।
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मंडावर थाने के गांव राजारामपुर खादर निवासी 50 साल के दलित किसान धर्मवीर सिंह का गांव रघुनाथपुर निवासी उदयवीर सिंह चौहान से पट्टे की भूमि को लेकर विवाद है। धर्मवीर के मुताबिक, उसके नाम खादर क्षेत्र में 15 बीघा जमीन का पट्टा हैं। इसमें आठ बीघे पर धर्मवीर ने गन्ना बो रखा है। पट्टे की जमीन पर उदयवीर हक जता रहा था और धर्मवीर को गन्ना नहीं काटने दे रहा था। धर्मवीर गन्ना काटने के लिए कई माह से अफसरों के चक्कर काट रहा था।
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12 अप्रैल को हलका लेखपाल उमाशंकर मिश्रा ने पुलिस के साथ मंडावर थाने में दोनों के बीच लिखित समझौता करा दिया था।
विवादित आठ बीघा जमीन में से दोनों को चार-चार बीघा जमीन दी गई थी। धर्मवीर के मुताबिक, उसने तीन बीघा गन्ना ही काटा था। शुक्रवार को वह एक बीघा गन्ना काटने पहुंचा तो उदयवीर ने धमकाकर भगा दिया। इस पर धर्मवीर करीब 12 बजे मंडावर थाने में चल रहे समाधान दिवस में इंसाफ की गुहार लेकर पहुंचा।
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उसने थाने में प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन उसकी शिकायत को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। धर्मवीर ने प्रभारी निरीक्षक के दफ्तर के पीछे जाकर बोतल से खुद पर मिट्टी का तेल उडे़लकर आग लगा ली। धर्मवीर की चीखें सुनकर पुलिसकर्मी दौड़े। उन्होंने धर्मवीर के ऊपर रेत व कंबल डालकर आग बुझाई। आनन फानन में पुलिस धर्मवीर को लेकर जिला अस्पताल दौड़ी।
उधर, थाने में किसान के आग लगाने की सूचना से अफसरों में अफरा-तफरी फैल गई। एसपी अजय साहनी, सीओ सिटी असित श्रीवास्तव समेत तमाम अफसर जिला अस्पताल पहुंचे और धर्मवीर से घटना की जानकरी ली। डॉक्टरों ने धर्मवीर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया है। धर्मवीर के चार बच्चों में एक पुत्री व तीन पुत्र हैं। एसपी अजय साहनी के मुताबिक, धर्मवीर के यह कदम उठाने के कारण की जांच की जाएगी।
खादर की जमीन पर माफिया का राज
बिजनौर में खादर की जमीन पर माफिया हावी रहते हैं। जमीन का सीमांकन नहीं होने के कारण दूसरे राज्य उत्तराखंड के अलावा मुजफ्फरनगर , मेरठ के लोगों से जमीन को लेकर जिले के किसानों का टकराव होता रहता है। यह टकराव कभी भी खूनी खेल में बदल सकता है। हर साल गंगा के खादर क्षेत्र में गंगा की धारा रुख बदलती रहती है। बाढ़ आने पर तो किसी को पता नहीं रहता कि उसके खेत कहां हैं। यही विवाद की वजह बनता है। आत्मदाह की कोशिश करने वाले धर्मवीर व उदयवीर चौहान के बीच भी ऐसा ही विवाद था।
दोनों एक ही जमीन को अपनी बता रहे थे। पुलिस और लेखपाल ने दोनेां के बीच समझौता तो करा दिया, पर इसे लागू नहीं करा पाए। सीओ सिटी असित श्रीवास्तव के मुताबिक, मंडावर के खादर क्षेत्र में उत्तराखंड के लोगों से भी जमीन को लेकर विवाद की शिकायतें मिलती हैं।
कपड़ों में छिपाकर लाया था बोतल
धर्मवीर पूरी तैयारी के साथ थाने में आया था। मिटटी के तेल की बोतल उसने कपड़ों में छिपा रखी थी। किसी को भी उसके इरादों का अंदाजा नहीं था। उसने जान देने के लिए दिन भी थाने में समाधान दिवस वाला चुना। उसकी चीखें सुनकर पुलिसकर्मियों ने समय से उसे अस्पताल पहुंचा दिया। धर्मवीर ने अफसरों को बताया कि उदयवीर के धमकी देने के बाद उसने लेखपाल से शिकायत की थी, पर उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद उसने जान देने का फैसला ले लिया।