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िटकट घोटाले में आठ रोडवेज कंडक्टरों पर गिरी गाज
बिजनौर/अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Tue, 09 Oct 2018 12:51 AM IST
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रोडवेज बस
- फोटो : file photo
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बिजनौर। अलीगढ़ और आगरा में हुए टिकट घोटाले की आंच बिजनौर तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बिजनौर डिपो में कार्यरत 14 परिचालक टिकट फर्जीवाड़े में फंस गए हैं। एक परिचालक को निलंबित और सात की संविदा सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। छह के खिलाफ जांच चल रही है। आरोप है कि एक ही टिकट को 800 बार तक जारी कर निगम को चूना लगाया गया है।
बिजनौर डिपो में 122 बसें हैं। इनमें 29 निगम की तथा 93 अनुबंधित हैं। इन पर नियमित और संविदा पर चालक-परिचालक कार्यरत हैं। आगरा और अलीगढ़ परिक्षेत्र में टिकट घोटाला प्रकाश में आने के बाद परिचालकों से लेकर अफसरों तक अफरातफरी है। शासन से सख्ती के चलते अफसर भी सतर्क हो उठे।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि घोटाले में लिप्त परिचालक एक यूज टिकट को 800 बार तक ईटीएम से जारी करते थे। इससे प्रतिदिन निगम को लाखों रुपये की चपत लगाई जा रही थी। फिलहाल बिजनौर डिपो में 14 कंडक्टरों द्वारा टिकटों में हेराफेरी का मामला प्रकाश में आया है। इनमें आशुतोष, रतनलाल, गुणप्रकाश व उसका पुत्र विकल्प, विवेक चौधरी, मनोज, रवि, सुनील, शर्मेंद्र, रजत गौड़, अंकित, हरिओम, दिलीप शामिल हैं।
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उधर, इस मामले के बारे में एआरएम वीके मौर्य ने बताया कि इस मामले में निगम के परिचालक आशुतोष को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा लापरवाही और फर्जीवाड़े के मामले में कार्रवाई करते हुए रतनलाल, विकल्प, विवेक चौधरी, मनोज, रवि, अंकित, हरिओम, दिलीप की संविदा समाप्त कर दी गई है। शेष के खिलाफ जांच जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मशीन को किया जाता था सेट
नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि यूज टिकट को बार-बार निकालने के लिए एक परिचालक द्वारा सेट किया जाता था। उसने अपने अन्य साथियों को इसके बारे में बताया था। उच्चस्तर पर मामला प्रकाश में आने के बाद इस फर्जीवाड़े की कलई खुली।
चेकिंग टीम के साथ करते थे मारपीट
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि घोटालेबाज परिचालकों ने गिरोह बना रखा था। चेकिंग टीम के साथ मारपीट भी करते थे। ऐसा ही एक मामला कोतवाली देहात में 21 जुलाई को हुआ था, जब कोतवाली देहात में परिचालकों ने चेकिंग टीम के साथ मारपीट की थी।
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बिजनौर डिपो में 122 बसें हैं। इनमें 29 निगम की तथा 93 अनुबंधित हैं। इन पर नियमित और संविदा पर चालक-परिचालक कार्यरत हैं। आगरा और अलीगढ़ परिक्षेत्र में टिकट घोटाला प्रकाश में आने के बाद परिचालकों से लेकर अफसरों तक अफरातफरी है। शासन से सख्ती के चलते अफसर भी सतर्क हो उठे।
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विभागीय सूत्र बताते हैं कि घोटाले में लिप्त परिचालक एक यूज टिकट को 800 बार तक ईटीएम से जारी करते थे। इससे प्रतिदिन निगम को लाखों रुपये की चपत लगाई जा रही थी। फिलहाल बिजनौर डिपो में 14 कंडक्टरों द्वारा टिकटों में हेराफेरी का मामला प्रकाश में आया है। इनमें आशुतोष, रतनलाल, गुणप्रकाश व उसका पुत्र विकल्प, विवेक चौधरी, मनोज, रवि, सुनील, शर्मेंद्र, रजत गौड़, अंकित, हरिओम, दिलीप शामिल हैं।
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उधर, इस मामले के बारे में एआरएम वीके मौर्य ने बताया कि इस मामले में निगम के परिचालक आशुतोष को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा लापरवाही और फर्जीवाड़े के मामले में कार्रवाई करते हुए रतनलाल, विकल्प, विवेक चौधरी, मनोज, रवि, अंकित, हरिओम, दिलीप की संविदा समाप्त कर दी गई है। शेष के खिलाफ जांच जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मशीन को किया जाता था सेट
नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि यूज टिकट को बार-बार निकालने के लिए एक परिचालक द्वारा सेट किया जाता था। उसने अपने अन्य साथियों को इसके बारे में बताया था। उच्चस्तर पर मामला प्रकाश में आने के बाद इस फर्जीवाड़े की कलई खुली।
चेकिंग टीम के साथ करते थे मारपीट
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि घोटालेबाज परिचालकों ने गिरोह बना रखा था। चेकिंग टीम के साथ मारपीट भी करते थे। ऐसा ही एक मामला कोतवाली देहात में 21 जुलाई को हुआ था, जब कोतवाली देहात में परिचालकों ने चेकिंग टीम के साथ मारपीट की थी।