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हत्यारोपी को नहीं मिली पैरोल
Updated Sat, 10 Mar 2018 12:27 AM IST
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बिजनौर। पिता के दफीना में शामिल होने के लिए हत्या के आरोप में मुरादाबाद जेल में बंद एक बंदी की पैरोल की याचिका को अदालत ने निरस्त कर दिया है। बंदी ने पिता के दफीना में शामिल होने के लिए पैरोल की मांग की थी। कोर्ट ने बंदी के हत्या में नामजद होने को गंभीरतम अपराध मानते हुए यह फैसला दिया है।
बिजनौर जेल में हत्या के अपराध में बंद हल्दौर थाना क्षेत्र निवासी मुल्ला शरीफ की बृहस्पतिवार को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। मृतक का बेटा दानिश भी हत्या के आरोप में मुरादाबाद जेल में बंद है। शुक्रवार को दानिश को सुनवाई के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो प्रमोद कुमार गंगवार की अदालत में लाया गया था। दानिश की ओर से कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि उसके पिता भी उपरोक्त मुकदमे में बंदी थे। आज न्यायालय में मौजूद है, इसलिए उसे शाम आठ बजे तक का पैरोल दिया जाए। इस पर अपर जिला शासकीय अधिवक्ता महफूज चौधरी के अनुसार अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियुक्त जिला कारागार में निरुद्ध है। अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा प्रार्थना पत्र में पैरोल दिए जाने का कोई विधिक प्रावधान अंकित नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में हत्या जैसे गंभीरतम अपराध में निरूद्ध अभियुक्त को पैरोल दिए जाने का कोई औचित्य आधार प्रतीत नहीं होता है। अभियुक्त का प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है।
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बिजनौर जेल में हत्या के अपराध में बंद हल्दौर थाना क्षेत्र निवासी मुल्ला शरीफ की बृहस्पतिवार को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। मृतक का बेटा दानिश भी हत्या के आरोप में मुरादाबाद जेल में बंद है। शुक्रवार को दानिश को सुनवाई के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो प्रमोद कुमार गंगवार की अदालत में लाया गया था। दानिश की ओर से कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि उसके पिता भी उपरोक्त मुकदमे में बंदी थे। आज न्यायालय में मौजूद है, इसलिए उसे शाम आठ बजे तक का पैरोल दिया जाए। इस पर अपर जिला शासकीय अधिवक्ता महफूज चौधरी के अनुसार अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियुक्त जिला कारागार में निरुद्ध है। अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा प्रार्थना पत्र में पैरोल दिए जाने का कोई विधिक प्रावधान अंकित नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में हत्या जैसे गंभीरतम अपराध में निरूद्ध अभियुक्त को पैरोल दिए जाने का कोई औचित्य आधार प्रतीत नहीं होता है। अभियुक्त का प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है।
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