{"_id":"594ac0ca4f1c1b72618b4660","slug":"171498071242-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नएचएम घोटाले में पैसे लेनी वाली फर्मो ने की सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नएचएम घोटाले में पैसे लेनी वाली फर्मो ने की सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर
Updated Thu, 22 Jun 2017 12:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएम
घोटाले में मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
स्वास्थ्य विभाग में तीन करोड़ दस लाख रुपये घोटाले के आरोप लगे थे। विभाग ने बिना सामान खरीद के ही चार फर्मो को यह भुगतान किया था। न्यायालय बिजनौर ने अप्रैल 2017 में चार फर्मों के संचालकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके खिलाफ फर्मों के संचालकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में रिट डाली थी, जो निरस्त हो गई थी। फर्म संचालकों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से घोटाले के मामले में जवाब मांगा है।
एनएचएम में जून व जुलाई 2016 में तीन करोड़ दस लाख रुपये घोटाले का खुलासा हुआ था। एनएचएम की ओर से बिना किसी सामान की खरीद के दस बार में भुगतान किया गया था। तत्कालीन एसीएमओ एनएचएम ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच की थी तो चारों फर्म अस्तिव में नहीं पाई गई थीं। घोटाले में एनएचएम के एक लिपिक व एक लेखाकार को जेल भेजा जा चुका है। बिजनौर न्यायालय ने चारो फर्मों के संचालकों के खिलाफ अप्रैल 2017 में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
फैसले को चुनौती देते हुए फर्म के संचालकों ने हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। इसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर संचालकों ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर कर कहा है कि उनको गिरफ्तार नही किया जाए। संचालकों को कहना है कि वे वर्ष 2014 से स्वास्थ्य विभाग बिजनौर को सामान सप्लाई कर रहे हैं। इसी का भुगतान उन्होंने लिया था। साथ ही बिजनौर की गणपति फर्म का पैसा उनके खाते में आ गया था, जिसे उन्होंने वापस कर दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है। सीएमओ डॉ. सुखवीर सिंह का कहना है कि घोटाले के मामले में फर्म संचालकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विभाग से जबाव मांगा है। इसे भेजने की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
घोटाले में मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
स्वास्थ्य विभाग में तीन करोड़ दस लाख रुपये घोटाले के आरोप लगे थे। विभाग ने बिना सामान खरीद के ही चार फर्मो को यह भुगतान किया था। न्यायालय बिजनौर ने अप्रैल 2017 में चार फर्मों के संचालकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके खिलाफ फर्मों के संचालकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में रिट डाली थी, जो निरस्त हो गई थी। फर्म संचालकों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से घोटाले के मामले में जवाब मांगा है।
एनएचएम में जून व जुलाई 2016 में तीन करोड़ दस लाख रुपये घोटाले का खुलासा हुआ था। एनएचएम की ओर से बिना किसी सामान की खरीद के दस बार में भुगतान किया गया था। तत्कालीन एसीएमओ एनएचएम ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच की थी तो चारों फर्म अस्तिव में नहीं पाई गई थीं। घोटाले में एनएचएम के एक लिपिक व एक लेखाकार को जेल भेजा जा चुका है। बिजनौर न्यायालय ने चारो फर्मों के संचालकों के खिलाफ अप्रैल 2017 में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
विज्ञापन
फैसले को चुनौती देते हुए फर्म के संचालकों ने हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। इसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर संचालकों ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर कर कहा है कि उनको गिरफ्तार नही किया जाए। संचालकों को कहना है कि वे वर्ष 2014 से स्वास्थ्य विभाग बिजनौर को सामान सप्लाई कर रहे हैं। इसी का भुगतान उन्होंने लिया था। साथ ही बिजनौर की गणपति फर्म का पैसा उनके खाते में आ गया था, जिसे उन्होंने वापस कर दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है। सीएमओ डॉ. सुखवीर सिंह का कहना है कि घोटाले के मामले में फर्म संचालकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विभाग से जबाव मांगा है। इसे भेजने की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन