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जल्दी अमरी बनने की चाहत में मुफलिसी की दलदल में धंसता गया निर्वेश
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:11 AM IST
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किरतपुर (बिजनौर)। जल्दी अमीर बनने की चाहत में निर्वेश गरीबी की दलदल में समाता चला गया। उसने पैसा कमाने के लिए एक साथ दो-दो व्यवसाय करने चाहे। एक कंपनी में रुपये लगाए तो कंपनी रुपये लेकर भाग गई और निर्वेश कर्जदार हो गया। उसने जमीन बेचकर कर्ज उतारा और घर का खर्च चलाया। मुफलिसी से तंग आकर उसने अपने पूरे परिवार को कत्ल करने की ठान ली।
गांव वालों के अनुसार निर्वेश ने गांव में ही 15 साल में रेडीमेड गारमेंट की दुकान खोली थी। पांच साल पहले उसने रेडीमेड गारमेंट की दुकान बंद कर मेडिकल स्टोर खोल लिया। साथ ही एक चिट फंड कंपनी से जुड़ गया। एक साथ दो काम करके निर्वेश जल्दी ही अमीर बनने के सपने देखने लगा। वह गांव में कहने लगा कि वह दिन दूर नहीं जब वह हेलीकाप्टर से गांव आया करेगा, लेकिन चिट फंड कंपनी में लगा होने के कारण उसका मेडिकल स्टोर ठप हो गया। चिट फंड कंपनी भी भाग गई। इससे वह लाखों रुपये का कर्जदार हो गया। पांच बीघा जमीन बेचकर उसने अपने परिवार का खर्च चलाया व अपना कर्जा उतारा। पिछले दो सालों से निर्वेश बिल्कुल बेरोजगार था। उसने मकान पर भी किसी बैंक से कर्ज ले लिया था। गांव वालों के अनुसार आर्थिक तंगी और घर में तीन कुंवारी बेटी देखकर वह तनाव में था। उसने नशे की गोलियां भी खानी शुरू कर दीं। मंगलवार रात निर्वेश नशे की गोलियां खाकर घर के बाहर ही पड़ोसियों के साथ शतरंज खेला और रात में वारदात को अंजाम दे दिया।
पिता को मुफलिसी से निकालना चाहती थीं बेटियां
निर्वेश अपनी मुफलिसी में यह भी भूल गया था कि उसकी बेटियां उसके घर की तारणहार बन सकती हैं। उसकी बड़ी बेटी रचना बीएससी कर चुकी है और पिता का सहारा बनने की गरज से बुधवार को हरिद्वार की किसी कंपनी में इंटरव्यू देने जाने वाली थी। आराधना का एडमिशन पालीटेक्निक में होने वाला था। श्रद्धा भी इंटर में आईं थीं। तीनों बेटी अपने पिता के साथ घर के खर्च में हाथ बंटाना चाहती थीं।
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गांव वालों के अनुसार निर्वेश ने गांव में ही 15 साल में रेडीमेड गारमेंट की दुकान खोली थी। पांच साल पहले उसने रेडीमेड गारमेंट की दुकान बंद कर मेडिकल स्टोर खोल लिया। साथ ही एक चिट फंड कंपनी से जुड़ गया। एक साथ दो काम करके निर्वेश जल्दी ही अमीर बनने के सपने देखने लगा। वह गांव में कहने लगा कि वह दिन दूर नहीं जब वह हेलीकाप्टर से गांव आया करेगा, लेकिन चिट फंड कंपनी में लगा होने के कारण उसका मेडिकल स्टोर ठप हो गया। चिट फंड कंपनी भी भाग गई। इससे वह लाखों रुपये का कर्जदार हो गया। पांच बीघा जमीन बेचकर उसने अपने परिवार का खर्च चलाया व अपना कर्जा उतारा। पिछले दो सालों से निर्वेश बिल्कुल बेरोजगार था। उसने मकान पर भी किसी बैंक से कर्ज ले लिया था। गांव वालों के अनुसार आर्थिक तंगी और घर में तीन कुंवारी बेटी देखकर वह तनाव में था। उसने नशे की गोलियां भी खानी शुरू कर दीं। मंगलवार रात निर्वेश नशे की गोलियां खाकर घर के बाहर ही पड़ोसियों के साथ शतरंज खेला और रात में वारदात को अंजाम दे दिया।
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पिता को मुफलिसी से निकालना चाहती थीं बेटियां
निर्वेश अपनी मुफलिसी में यह भी भूल गया था कि उसकी बेटियां उसके घर की तारणहार बन सकती हैं। उसकी बड़ी बेटी रचना बीएससी कर चुकी है और पिता का सहारा बनने की गरज से बुधवार को हरिद्वार की किसी कंपनी में इंटरव्यू देने जाने वाली थी। आराधना का एडमिशन पालीटेक्निक में होने वाला था। श्रद्धा भी इंटर में आईं थीं। तीनों बेटी अपने पिता के साथ घर के खर्च में हाथ बंटाना चाहती थीं।
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