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Bijnor News: रखा नहीं गोवंश का ध्यान, कानूनी दायरे में फंसे किसान
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बिजनौर में गोवंश
- फोटो : BIJNOR
अचल चौधरी
बिजनौर। हीरा और मोती, मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी को आधुनिकता का यह दौर झुठलाने पर तुला हुआ है। या यूं कहें कि गोधन से अब आत्मीयता नहीं रही। जिन्होंने गोवंश का पालन किया, वे ही अब उन्हें बेसहारा छोड़ रहे हैं। इसे तस्दीक करने के लिए थानों में दर्ज हुए 13 केस ही काफी हैं। अब तक 53 पशुपालकों को पशु क्रूरता अधिनियम के तहत आरोपी बनाया जा चुका है। मामला अदालत में सही साबित हुआ, तो तीन साल तक जेल भी हो सकती है।
सरकार की मंशा के तहत जिले में गोशाला और गो आश्रय स्थल बनाए गए। मकसद था कि कोई भी गोवंश सड़क पर निराश्रित न घूमें। लेकिन ज्यों ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता ही गया। गोशाला भी फुल हो गई और सड़कों पर गोवंश के निराश्रित घूमने का सिलसिला भी नहीं थम सका। जब किसान ज्यादा परेशान हो गए, तो सरकारी कार्यालयों तक में गोवंश को ले जाकर बांध दिया गया। आखिरकार प्रशासन को नजर टेढ़ी करनी पड़ी। पशुओं को यूं ही छोड़ देने वाले किसानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करानी शुरू कर दी गई। पिछले एक सप्ताह में अलग अलग थानों में 13 केस दर्ज कराए गए हैं। पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 3/11 में रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। हालांकि यह जमानती धारा है, जिसमें गिरफ्तारी नहीं है। फिर भी अगर अदालत में मामला सही पाया जाता है, तो तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
गोधन होता था संपन्नता का प्रतीक
गांव कोकापुर के रहने वाले मास्टर विजय पाल सिंह ने बताया कि जिसके पास जितनी गाय होती थी, उसे उतना ही बड़ा आदमी माना जाता था। गाय का धन सबसे बड़ा धन माना जाता था। बीते चालीस साल से महत्ता कम होने लगी है। जिसका एक कारण गाय का दूध सबसे सस्ता होना भी है। उधर बैल की उपयोगिता को तकनीक ने घटा दिया है। अब ट्रैक्टर और मशीनरी से खेती हो रही है, ऐसे में बैल की जरूरत नहीं रही।
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पशुओं की बिक्री का चक्र बंद होने से बढ़ी समस्या
भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष नितिन सिरोही ने बताया कि पशु किसान का धन होता था, पशु के मरने पर आस पड़ोस के लोग भी खबर लेने आते थे, अब यह धन बिकता नहीं। अब किसान क्या करें, दूध कम रेट पर बिक रहा है। इस वजह से किसान मजबूर हो गया है। वहीं दिन प्रतिदिन दिन चारे की समस्या बनती जा रही है। ऐसे में किसान कहां तक पशुओं को पालेगा क्योंकि पशुओं का प्रजनन तो थमता नहीं है। एक प्रक्रिया चल रही थी, पशु बड़े होकर बिक रहे थे, अब यह चक्र बंद हो गया है।
4653 को मिला आश्रय
निराश्रित घूमने वाले 5120 पशुओं को पकड़ने का लक्ष्य था। अब तक 4653 पशुओं को पकड़ कर आश्रय स्थलों में पहुंचाया गया है। वहीं लक्ष्य पूरा करने के लिए 700 पशुओं को आश्रय देना बाकी है।
अलग अलग ब्लॉक क्षेत्र में खंड विकास अधिकारियों की ओर से 13 केस दर्ज कराए गए हैं। जिन पशुओं को टैग लगे हुए थे और उन्हें छोड़ा गया, ऐसे पशुओं के 53 पालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। ...एस कृष्णा, डीडीओ
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बिजनौर। हीरा और मोती, मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी को आधुनिकता का यह दौर झुठलाने पर तुला हुआ है। या यूं कहें कि गोधन से अब आत्मीयता नहीं रही। जिन्होंने गोवंश का पालन किया, वे ही अब उन्हें बेसहारा छोड़ रहे हैं। इसे तस्दीक करने के लिए थानों में दर्ज हुए 13 केस ही काफी हैं। अब तक 53 पशुपालकों को पशु क्रूरता अधिनियम के तहत आरोपी बनाया जा चुका है। मामला अदालत में सही साबित हुआ, तो तीन साल तक जेल भी हो सकती है।
सरकार की मंशा के तहत जिले में गोशाला और गो आश्रय स्थल बनाए गए। मकसद था कि कोई भी गोवंश सड़क पर निराश्रित न घूमें। लेकिन ज्यों ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता ही गया। गोशाला भी फुल हो गई और सड़कों पर गोवंश के निराश्रित घूमने का सिलसिला भी नहीं थम सका। जब किसान ज्यादा परेशान हो गए, तो सरकारी कार्यालयों तक में गोवंश को ले जाकर बांध दिया गया। आखिरकार प्रशासन को नजर टेढ़ी करनी पड़ी। पशुओं को यूं ही छोड़ देने वाले किसानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करानी शुरू कर दी गई। पिछले एक सप्ताह में अलग अलग थानों में 13 केस दर्ज कराए गए हैं। पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 3/11 में रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। हालांकि यह जमानती धारा है, जिसमें गिरफ्तारी नहीं है। फिर भी अगर अदालत में मामला सही पाया जाता है, तो तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
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गोधन होता था संपन्नता का प्रतीक
गांव कोकापुर के रहने वाले मास्टर विजय पाल सिंह ने बताया कि जिसके पास जितनी गाय होती थी, उसे उतना ही बड़ा आदमी माना जाता था। गाय का धन सबसे बड़ा धन माना जाता था। बीते चालीस साल से महत्ता कम होने लगी है। जिसका एक कारण गाय का दूध सबसे सस्ता होना भी है। उधर बैल की उपयोगिता को तकनीक ने घटा दिया है। अब ट्रैक्टर और मशीनरी से खेती हो रही है, ऐसे में बैल की जरूरत नहीं रही।
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पशुओं की बिक्री का चक्र बंद होने से बढ़ी समस्या
भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष नितिन सिरोही ने बताया कि पशु किसान का धन होता था, पशु के मरने पर आस पड़ोस के लोग भी खबर लेने आते थे, अब यह धन बिकता नहीं। अब किसान क्या करें, दूध कम रेट पर बिक रहा है। इस वजह से किसान मजबूर हो गया है। वहीं दिन प्रतिदिन दिन चारे की समस्या बनती जा रही है। ऐसे में किसान कहां तक पशुओं को पालेगा क्योंकि पशुओं का प्रजनन तो थमता नहीं है। एक प्रक्रिया चल रही थी, पशु बड़े होकर बिक रहे थे, अब यह चक्र बंद हो गया है।
4653 को मिला आश्रय
निराश्रित घूमने वाले 5120 पशुओं को पकड़ने का लक्ष्य था। अब तक 4653 पशुओं को पकड़ कर आश्रय स्थलों में पहुंचाया गया है। वहीं लक्ष्य पूरा करने के लिए 700 पशुओं को आश्रय देना बाकी है।
अलग अलग ब्लॉक क्षेत्र में खंड विकास अधिकारियों की ओर से 13 केस दर्ज कराए गए हैं। जिन पशुओं को टैग लगे हुए थे और उन्हें छोड़ा गया, ऐसे पशुओं के 53 पालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। ...एस कृष्णा, डीडीओ