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Bijnor News: जिला पंचायत अध्यक्ष और विधायक के बीच वार-पलटवार
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विधायक के पति के रिश्तेदार को नहीं मिली जमीन तो लगाए आरोप : साकेंद्र चौधरी
एक दिन पहले सदर विधायक की ओर से पत्र जारी कर लगाए गए थे आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। कॉलोनियों की शिकायत से शुरू हुआ सदर विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष का विवाद अब निजी आरोपों तक पहुंच गया है। एक दिन पहले जहां सदर विधायक सुचि चौधरी ने पत्र जारी कर कई आरोप लगाए थे। वहीं, मंगलवार को जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र चौधरी ने भी पत्र जारी कर आरोपों पर पलटवार किया।
मंगलवार को जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र चौधरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इसमें सदर विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों पर जवाब दिया। पत्र में आरोप लगाया कि कुछ दिन पूर्व हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्ष के लोग उनके पास आए थे। उन्होंने बताया कि प्राचीन काली मंदिर के पास कुछ जमीन मुस्लिम समुदाय के लोगों की थी। जिसे सदर विधायक के पति के रिश्तेदार जो प्रापर्टी डीलर हैं, डरा-धमकाकर खरीदना चाहते हैं। कुछ जमीन वह पहले भी वहां खरीद चुके हैं। उन्हें कॉलोनी विकसित करने के लिए जमीन नहीं दी और खुद कॉलोनी विकसित की। इस बात से नाराज विधायक पति ने कमिश्नर से इसकी झूठी शिकायत की।
पत्र में आगे कहा कि यदि भूमि अवैध है तो एसडीएम के यहां से उसकी धारा 80 (2) कैसे हुई। रही बात हिंदू-मुस्लिम की तो उसमें कई हिंदुओं ने भी प्लॉट खरीदे थे। आगे विधायक पर आरोप लगाया कि उनके पति के रिश्तेदार को जमीन न मिलने पर द्वेष भावना के कारण उस काॅलोनी पर रोक लगवाई गई। आगे कहा कि अफसरों से बात हुई तो उन्होंने अधिकांश कॉलोनी इसी तरह की होने की बात बताई, जिस पर मैंने एक जैसे नियम लागू होने की बात कही।
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आम जनता से कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। यह कार्रवाई केवल पैसे लेकर मूलभूत सुविधा न देने वाले कॉलोनाइजर के खिलाफ है। आगे सदर विधायक के बिजनौर प्राधिकरण बोर्ड के लिए हुई बैठकों में न पहुंचने और उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही नगर के आसपास 30-40 अन्य कॉलोनियों की जांच न कराने और एक ही कॉलोनी को चुनकर शिकायत करने पर सवाल उठाए।
रिश्तेदार दोषी तो कार्रवाई क्यों नहीं कराई: सुचि चौधरी
बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र चौधरी द्वारा लगाए आरोपों पर सदर विधायक ने भी पलटवार किया। विधायक सुचि चौधरी ने आरोपों के जवाब में कहा कि यदि हमारे रिश्तेदारों ने गलत किया है तो उनके खिलाफ शिकायत क्यों नहीं की। कमिश्नर के यहां जिस शिकायत की बात कही जा रही है, वह सही थी इसलिए कार्रवाई हुई। आगे कहा कि जानकर हैरानी हुई की जिला पंचायत अध्यक्ष यह भी स्वीकार रहे हैं कि जिसकी हमने शिकायत की थी, उस भूमि के वे स्वयं कॉलोनाइजर बन गए। अगर मेरे पति का रिश्तेदार कोई डरा-धमका कर जमीन ले रहा था तो उसके खिलाफ एफआईआर करवाते। विधायक ने इसके अलावा यह आरोप भी लगाया कि जिपं अध्यक्ष के पिता के द्वारा भी एक ब्राह्मण समाज के व्यक्ति का प्लॉट कब्जाया गया, जिसमें उन्हें जमानत करानी पड़ी थी। इसके अलावा एनआरआई की जमीन उनके परिजनों के नाम होने और ईडी द्वारा दाखिल खारिज पर रोक लगाने की बात भी कही। इसके अलावा कमिश्नर के यहां शिकायत करने वाले से जिला पंचायत अध्यक्ष की नजदीकी होने और उनके साथ घूमने का अभी आरोप लगाया। इसके आगे उनके द्वारा किए गए जनसेवा के काम न करने के आरोप लगाए। आगे कहा कि आगे भी नियमों को ताक पर रखकर किसी को भी अवैध काम नहीं करने दिया जाएगा।
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एक दिन पहले सदर विधायक की ओर से पत्र जारी कर लगाए गए थे आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। कॉलोनियों की शिकायत से शुरू हुआ सदर विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष का विवाद अब निजी आरोपों तक पहुंच गया है। एक दिन पहले जहां सदर विधायक सुचि चौधरी ने पत्र जारी कर कई आरोप लगाए थे। वहीं, मंगलवार को जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र चौधरी ने भी पत्र जारी कर आरोपों पर पलटवार किया।
मंगलवार को जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र चौधरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इसमें सदर विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों पर जवाब दिया। पत्र में आरोप लगाया कि कुछ दिन पूर्व हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्ष के लोग उनके पास आए थे। उन्होंने बताया कि प्राचीन काली मंदिर के पास कुछ जमीन मुस्लिम समुदाय के लोगों की थी। जिसे सदर विधायक के पति के रिश्तेदार जो प्रापर्टी डीलर हैं, डरा-धमकाकर खरीदना चाहते हैं। कुछ जमीन वह पहले भी वहां खरीद चुके हैं। उन्हें कॉलोनी विकसित करने के लिए जमीन नहीं दी और खुद कॉलोनी विकसित की। इस बात से नाराज विधायक पति ने कमिश्नर से इसकी झूठी शिकायत की।
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पत्र में आगे कहा कि यदि भूमि अवैध है तो एसडीएम के यहां से उसकी धारा 80 (2) कैसे हुई। रही बात हिंदू-मुस्लिम की तो उसमें कई हिंदुओं ने भी प्लॉट खरीदे थे। आगे विधायक पर आरोप लगाया कि उनके पति के रिश्तेदार को जमीन न मिलने पर द्वेष भावना के कारण उस काॅलोनी पर रोक लगवाई गई। आगे कहा कि अफसरों से बात हुई तो उन्होंने अधिकांश कॉलोनी इसी तरह की होने की बात बताई, जिस पर मैंने एक जैसे नियम लागू होने की बात कही।
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आम जनता से कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। यह कार्रवाई केवल पैसे लेकर मूलभूत सुविधा न देने वाले कॉलोनाइजर के खिलाफ है। आगे सदर विधायक के बिजनौर प्राधिकरण बोर्ड के लिए हुई बैठकों में न पहुंचने और उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही नगर के आसपास 30-40 अन्य कॉलोनियों की जांच न कराने और एक ही कॉलोनी को चुनकर शिकायत करने पर सवाल उठाए।
रिश्तेदार दोषी तो कार्रवाई क्यों नहीं कराई: सुचि चौधरी
बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र चौधरी द्वारा लगाए आरोपों पर सदर विधायक ने भी पलटवार किया। विधायक सुचि चौधरी ने आरोपों के जवाब में कहा कि यदि हमारे रिश्तेदारों ने गलत किया है तो उनके खिलाफ शिकायत क्यों नहीं की। कमिश्नर के यहां जिस शिकायत की बात कही जा रही है, वह सही थी इसलिए कार्रवाई हुई। आगे कहा कि जानकर हैरानी हुई की जिला पंचायत अध्यक्ष यह भी स्वीकार रहे हैं कि जिसकी हमने शिकायत की थी, उस भूमि के वे स्वयं कॉलोनाइजर बन गए। अगर मेरे पति का रिश्तेदार कोई डरा-धमका कर जमीन ले रहा था तो उसके खिलाफ एफआईआर करवाते। विधायक ने इसके अलावा यह आरोप भी लगाया कि जिपं अध्यक्ष के पिता के द्वारा भी एक ब्राह्मण समाज के व्यक्ति का प्लॉट कब्जाया गया, जिसमें उन्हें जमानत करानी पड़ी थी। इसके अलावा एनआरआई की जमीन उनके परिजनों के नाम होने और ईडी द्वारा दाखिल खारिज पर रोक लगाने की बात भी कही। इसके अलावा कमिश्नर के यहां शिकायत करने वाले से जिला पंचायत अध्यक्ष की नजदीकी होने और उनके साथ घूमने का अभी आरोप लगाया। इसके आगे उनके द्वारा किए गए जनसेवा के काम न करने के आरोप लगाए। आगे कहा कि आगे भी नियमों को ताक पर रखकर किसी को भी अवैध काम नहीं करने दिया जाएगा।