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Bijnor News: बिना टेंडर आउटलेट का निर्माण, मौखिक आदेश पर भुगतान
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बिजनौर। यूं तो एक लाख से अधिक के निर्माण पर टेंडर प्रक्रिया अपनाए जाने का नियम हैं मगर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में तैनात अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखते हुए बिना टेंडर ही 34 लाख के दो आउटलेट बनवा डाले। बिना एस्टीमेट बनवाए गए आउटलेट का भुगतान मिशन के प्रबंधकों ने मौखिक आदेश पर ही कराया। इस घोटाले की परतों को खोलने के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव की गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समूहों का गठन किया गया था। समूहों को जोड़कर ग्राम संगठन और ग्राम संगठनों के बाद कलस्टर लेबल फेडरेशन (सीएलएफ) बनाए गए। सरकार इन्हें भरपूर पैसा दे रही है ताकि महिलाएं अपना रोजगार कर सकें। मगर अफसरों और एनआरएलएम में तैनात प्रबंधकों की मनमानी ने घोटाले का दाग लगा दिया है।
बता दें कि पिछले महीने एडीओ आईएसबी ने तैमूरपुर दीपा के नमामि गंगे सीएलएफ का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में 34 लाख का घोटाला पकड़ में आया। सामने आया कि सीएलएफ द्वारा दो आउटलेट के निर्माण के लिए 17-17 लाख का भुगतान किया गया। उक्त भुगतान निर्माण करने वाली फर्म को हुआ। सीएलएफ के पास कोई एस्टीमेट नहीं मिला, न ही टेंडर की कोई प्रक्रिया अपनाई गई। सीएलएफ की पदाधिकारियों ने बताया था कि जिला मिशन प्रबंधक (डीएमएम) और ब्लॉक मिशन प्रबंधक (बीएमएम) के कहने पर भुगतान किया गया है। भुगतान का कोई लिखित आदेश भी नहीं दिया गया। ऐसे में अगर घोटाला सही साबित हुआ तो मौखिक आदेश देने वाले दोनों प्रबंधकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा जबकि सीएलएफ से जुड़ी गरीब महिलाओं की गर्दन फंस जाएगी।
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-कर्ज बताकर दी रकम, वसूली में फंसेगा पेंच
जिन दो आउटलेट के निर्माण पर 34 लाख रुपये दिया गया है, उनके आवंटियों से वसूली में भी तकनीकी पेंच फंसेगा, क्योंकि सीएलएफ से कर्ज के तौर पर रकम दिलवाई गई है। मगर उक्त रकम का भुगतान निर्माण करने वाली फर्म को करने से तकनीकी पेंच फंसेगा। अगर आवंटियों को कर्ज देना था तो उनके समूह के खाते में दिया जाता। अगर जिसके नाम पर कर्ज देना बताया जा रहा है, उनके खाते में रकम पहुंची नहीं, ऐसे में वसूली का अधिकार क्या होगा। इतना ही नहीं एक आउटलेट को निकिता स्वयं सहायता समूह के नाम पर आवंटित होना कागजों में दिखाया है। मगर धरातल पर कोई अन्य ही काबिज है। एक आउटलेट पर 17 लाख का खर्च दिखाया गया है। आउटलेट लोहे से बने हुए हैं, जबकि इतनी कीमत में तो पक्का निर्माण भी हो सकता था।
वर्जन::::
आउटलेट के निर्माण के मामले में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जो कि जांच करके अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
-मनोज वर्मा, डीसी एनआरएलएम
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव की गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समूहों का गठन किया गया था। समूहों को जोड़कर ग्राम संगठन और ग्राम संगठनों के बाद कलस्टर लेबल फेडरेशन (सीएलएफ) बनाए गए। सरकार इन्हें भरपूर पैसा दे रही है ताकि महिलाएं अपना रोजगार कर सकें। मगर अफसरों और एनआरएलएम में तैनात प्रबंधकों की मनमानी ने घोटाले का दाग लगा दिया है।
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बता दें कि पिछले महीने एडीओ आईएसबी ने तैमूरपुर दीपा के नमामि गंगे सीएलएफ का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में 34 लाख का घोटाला पकड़ में आया। सामने आया कि सीएलएफ द्वारा दो आउटलेट के निर्माण के लिए 17-17 लाख का भुगतान किया गया। उक्त भुगतान निर्माण करने वाली फर्म को हुआ। सीएलएफ के पास कोई एस्टीमेट नहीं मिला, न ही टेंडर की कोई प्रक्रिया अपनाई गई। सीएलएफ की पदाधिकारियों ने बताया था कि जिला मिशन प्रबंधक (डीएमएम) और ब्लॉक मिशन प्रबंधक (बीएमएम) के कहने पर भुगतान किया गया है। भुगतान का कोई लिखित आदेश भी नहीं दिया गया। ऐसे में अगर घोटाला सही साबित हुआ तो मौखिक आदेश देने वाले दोनों प्रबंधकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा जबकि सीएलएफ से जुड़ी गरीब महिलाओं की गर्दन फंस जाएगी।
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-कर्ज बताकर दी रकम, वसूली में फंसेगा पेंच
जिन दो आउटलेट के निर्माण पर 34 लाख रुपये दिया गया है, उनके आवंटियों से वसूली में भी तकनीकी पेंच फंसेगा, क्योंकि सीएलएफ से कर्ज के तौर पर रकम दिलवाई गई है। मगर उक्त रकम का भुगतान निर्माण करने वाली फर्म को करने से तकनीकी पेंच फंसेगा। अगर आवंटियों को कर्ज देना था तो उनके समूह के खाते में दिया जाता। अगर जिसके नाम पर कर्ज देना बताया जा रहा है, उनके खाते में रकम पहुंची नहीं, ऐसे में वसूली का अधिकार क्या होगा। इतना ही नहीं एक आउटलेट को निकिता स्वयं सहायता समूह के नाम पर आवंटित होना कागजों में दिखाया है। मगर धरातल पर कोई अन्य ही काबिज है। एक आउटलेट पर 17 लाख का खर्च दिखाया गया है। आउटलेट लोहे से बने हुए हैं, जबकि इतनी कीमत में तो पक्का निर्माण भी हो सकता था।
वर्जन::::
आउटलेट के निर्माण के मामले में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जो कि जांच करके अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
-मनोज वर्मा, डीसी एनआरएलएम