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गति नहीं पकड़ रहा मेरठ-पौड़ी फोरलेन का निर्माण
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मेरठ- पौडी हाइवे को फोरलेन बनाने का कछुआ गति से होता निर्माण कार्य।
- फोटो : BIJNOR
गति नहीं पकड़ रहा मेरठ-पौड़ी फोरलेन का निर्माण
बिजनौर। चीन की सीमा को जोड़ने वाले मेरठ-पौड़ी हाईवे को फोरलेन बनाने का कार्य गति नहीं पकड़ रहा है। अभी सड़क के चौड़ीकरण का काम शुरू नहीं हुआ है। सड़क के दोनों ओर के केवल पेड़ काटकर जमीन पर कब्जे की कार्रवाई चल रही है। चीन से चल रही तनातनी के बीच ये मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग के बनने से चीन सीमा पर सेना के साजो सामान पहुंचाने में आसानी होगी। लेकिन अभी तक केवल 54 किलोमीटर मार्ग बनाया जा रहा है। बाकी मार्ग बनाने में अभी उलझन है। बिजनौर से बहसूमा के बीच हस्तिनापुर सेंक्चुरी का क्षेत्र होने के कारण यहां पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिल पा रही है।
भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मेरठ-पौड़ी हाईवे को फोरलेन बनाने की पिछले दो साल से कवायद चल रही है। लेकिन टेंडर नहीं होने के कारण इसका निर्माण अटका हुआ था। टेंडर के लिए हर बार मुकदमे की तरह तारीख लगती रही, लेकिन टेंडर नहीं होता था। चार माह पहले बमुश्किल सड़क के लिए टेंडर हुआ। इसके बाद सड़क बनाने का काम शुरू हुआ। टेंडर निकलने के बाद बिजनौर से नजीबाबाद तक सड़क के दोनों ओर केवल पेड़ काटकर जमीन पर कब्जा लिया जा रहा है। फोरलेने के लिए जमीन पहले ही किसानो से ले ली गई है। मेरठ से नजीबाबाद तक 100 किलोमीटर लंबा यह मार्ग फोरलेन बनाने के लिए मंजूर हुआ है। अभी केवल बिजनौर से नजीबाबाद व बहसूमा से मेरठ तक 54 किलोमीटर लंबा मार्ग ही फोरलेन बनाया जा रहा है। बहसूमा से लेकर बिजनौर तक का हिस्सा हस्तिनापुर सेंक्चुरी में आने के कारण सड़क के इतने हिस्से में निर्माण नहीं हो सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी जरूरी है। इसकी कवायद भी चल रही है। केंद्र सरकार से इस हिस्से में सड़क बनाने के लिए अभी मंजूरी नहीं मिली है। इसका प्रस्ताव बनाकर एनएच मेरठ व वन विभाग के अधिकारियों ने केंद्र सरकार को भेज रखा है। एनएच मेरठ के प्रोजेक्ट इंजीनियर आयुष चौधरी के मुताबिक फोरलेन के लिए अभी जमीन पर कब्जे लिए जा रहे हैं। जल्द ही तेजी से फोरलेन का निर्माण कार्य शुरू होगा। अभी केवल बिजनौर से नजीबाबाद तक व बहसूमा से मेरठ तक फोरलेन बनाया जाएगा।
1400 करोड़ में बनेगा 54 किलोमीटर फोरलेन
एचएस मेरठ के प्रोजेक्ट इंजीनियर आयुष चौधरी के मुताबिक अभी 54 किलोमीटर में फोरलेन बनाने को 1400 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। 22 से 23 महीने के अंदर ये फोरलेन बनकर तैयार हो जाएगा। अभी फोरलेन बनाने की शुरूआत हुई है।
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अमर उजाला ने गडकरी के सामने उठाया था मुद्दा
आठ जून को अमर उजाला की ओर से आयोजित वेबिनार में यह मुद्दा उठाया गया था। उस समय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। उनकी जानकारी में नहीं है। वे दिखवाएंगे कि निर्माण का मामला कहां अटका है। इसके बाद भी फोरलेन का निर्माण कछुआ गति से चल रहा है। इसमें कोई तेजी नहीं आई है।
गंगा बैराज पर बनेगा नया पुल
मेरठ-दिल्ली हाईवे पर फोरलेन बनाने के दौरान गंगा बैराज पर भी दूसरा नया पुल बनेगा। गंगा बैराज का क्षेत्र हस्तिनापुर सेंक्चुरी में आने के कारण पुल का मामला अभी अटका हुआ है। मेरठ-पौड़ी हाईवे फोरलेन होने से चीन की सीमा पर सेना के लिए साजो सामान पहुंचाने में तो आसानी होगी ही। साथ ही सेना के जवान भी इस रास्ते से सीमा पर जल्द पहुंच सकेंगे। उन्हें इस फोरलेन के बनने से सीमा तक पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
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बिजनौर। चीन की सीमा को जोड़ने वाले मेरठ-पौड़ी हाईवे को फोरलेन बनाने का कार्य गति नहीं पकड़ रहा है। अभी सड़क के चौड़ीकरण का काम शुरू नहीं हुआ है। सड़क के दोनों ओर के केवल पेड़ काटकर जमीन पर कब्जे की कार्रवाई चल रही है। चीन से चल रही तनातनी के बीच ये मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग के बनने से चीन सीमा पर सेना के साजो सामान पहुंचाने में आसानी होगी। लेकिन अभी तक केवल 54 किलोमीटर मार्ग बनाया जा रहा है। बाकी मार्ग बनाने में अभी उलझन है। बिजनौर से बहसूमा के बीच हस्तिनापुर सेंक्चुरी का क्षेत्र होने के कारण यहां पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिल पा रही है।
भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मेरठ-पौड़ी हाईवे को फोरलेन बनाने की पिछले दो साल से कवायद चल रही है। लेकिन टेंडर नहीं होने के कारण इसका निर्माण अटका हुआ था। टेंडर के लिए हर बार मुकदमे की तरह तारीख लगती रही, लेकिन टेंडर नहीं होता था। चार माह पहले बमुश्किल सड़क के लिए टेंडर हुआ। इसके बाद सड़क बनाने का काम शुरू हुआ। टेंडर निकलने के बाद बिजनौर से नजीबाबाद तक सड़क के दोनों ओर केवल पेड़ काटकर जमीन पर कब्जा लिया जा रहा है। फोरलेने के लिए जमीन पहले ही किसानो से ले ली गई है। मेरठ से नजीबाबाद तक 100 किलोमीटर लंबा यह मार्ग फोरलेन बनाने के लिए मंजूर हुआ है। अभी केवल बिजनौर से नजीबाबाद व बहसूमा से मेरठ तक 54 किलोमीटर लंबा मार्ग ही फोरलेन बनाया जा रहा है। बहसूमा से लेकर बिजनौर तक का हिस्सा हस्तिनापुर सेंक्चुरी में आने के कारण सड़क के इतने हिस्से में निर्माण नहीं हो सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी जरूरी है। इसकी कवायद भी चल रही है। केंद्र सरकार से इस हिस्से में सड़क बनाने के लिए अभी मंजूरी नहीं मिली है। इसका प्रस्ताव बनाकर एनएच मेरठ व वन विभाग के अधिकारियों ने केंद्र सरकार को भेज रखा है। एनएच मेरठ के प्रोजेक्ट इंजीनियर आयुष चौधरी के मुताबिक फोरलेन के लिए अभी जमीन पर कब्जे लिए जा रहे हैं। जल्द ही तेजी से फोरलेन का निर्माण कार्य शुरू होगा। अभी केवल बिजनौर से नजीबाबाद तक व बहसूमा से मेरठ तक फोरलेन बनाया जाएगा।
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1400 करोड़ में बनेगा 54 किलोमीटर फोरलेन
एचएस मेरठ के प्रोजेक्ट इंजीनियर आयुष चौधरी के मुताबिक अभी 54 किलोमीटर में फोरलेन बनाने को 1400 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। 22 से 23 महीने के अंदर ये फोरलेन बनकर तैयार हो जाएगा। अभी फोरलेन बनाने की शुरूआत हुई है।
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अमर उजाला ने गडकरी के सामने उठाया था मुद्दा
आठ जून को अमर उजाला की ओर से आयोजित वेबिनार में यह मुद्दा उठाया गया था। उस समय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। उनकी जानकारी में नहीं है। वे दिखवाएंगे कि निर्माण का मामला कहां अटका है। इसके बाद भी फोरलेन का निर्माण कछुआ गति से चल रहा है। इसमें कोई तेजी नहीं आई है।
गंगा बैराज पर बनेगा नया पुल
मेरठ-दिल्ली हाईवे पर फोरलेन बनाने के दौरान गंगा बैराज पर भी दूसरा नया पुल बनेगा। गंगा बैराज का क्षेत्र हस्तिनापुर सेंक्चुरी में आने के कारण पुल का मामला अभी अटका हुआ है। मेरठ-पौड़ी हाईवे फोरलेन होने से चीन की सीमा पर सेना के लिए साजो सामान पहुंचाने में तो आसानी होगी ही। साथ ही सेना के जवान भी इस रास्ते से सीमा पर जल्द पहुंच सकेंगे। उन्हें इस फोरलेन के बनने से सीमा तक पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं होगी।