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Bijnor News: चंदक - बाढ़ की निशानियों में आजीविका तलाशने की लगी होड़

Fri, 18 Aug 2023 12:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Fri, 18 Aug 2023 12:36 AM IST
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Competition to find livelihood in the signs of flood
- बालावाली के पास खादर में कम हुआ गंगा की बाढ़ का पानी
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- गंगा में बहकर आई कीमती लकड़ियों को ढो रहे सैकड़ों लोग
फोटो
विनित चौधरी
चंदक। खादर में गंगा की बाढ़ तबाही के निशान छोड़ गई है। दरअसल हजारों बीघा फसल चौपट हो चुकी है लेकिन फसलों की तबाही के इस मंजर के बीच आजीविका तलाशने की होड़ लगी है। जी हां, गंगा के तेज बहाव में पहाड़ों से बहकर आई कीमतियां लकड़ी जहां तहां बिखरी पड़ी हैं। जिन्हें लोग इकट्ठा कर ढोने में लगे हैं। इन लकड़ियों को बेचकर कुछ पैसे जुटाने की जद्दोजहद में हर कोई जुटा है।
गंगा नदी में इस सप्ताह में सर्वाधिक पानी आया। बाढ़ को लेकर गंगा किनारे बसे गावों के ग्रामीणों को भारी समस्या का सामना करना पड़ा। गंगा नदी के पानी ने किनारे बसे गावों बाढ़ के हालात पैदा कर दिए। वहीं खेतों में पानी भरा रहा। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में वन संपदा को बहाकर मैदानी इलाकों में लेकर आता है। गंगा के पानी बहकर पहुंची कीमती लकड़ियां एवं अन्य सामान पानी कम होने पर खेतो में ही फंस जाते हैं। अब इस बार भी पानी के साथ बहकर आई कीमती लकड़ियां गंगा किनारे बसे हजारों लोगों के लिए जीविका का साधन बनकर आयी हैं।
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मंडावर थाना क्षेत्र के बालाबाली स्थित गंगा घाट के समीप गन्ने की फसल गंगा के पानी से पूरी तरह से जलमग्न हो गई थी। अब पानी कम हुआ तो कीमती लकड़ी खेतो में ही पड़ी दिखाई देने लगी। इन लकड़ियों को ढोने के लिए गंगा के आस पास खेतों में लोगाें का तांता पिछले कई दिनों से लगा हुआ है। बाकायदा ट्रैक्टर ट्राली और बुग्गी से लोग पहुंच रहे हैं। बालक, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग लकड़ी ढूंढने में लगे हैं। हर रोज सुबह से ही अपनी ट्रैक्टर ट्राली, बुग्गी, अन्य साधन लेकर गंगा किनारे लकड़ी इकट्ठा करने पहुच जाते है, जो शाम तक बड़ी मात्रा में कीमती लकड़ी इकठा करते हैं। इन्हें देखकर ऐसे लगा कि लकड़ी बीनने के बाद उन्हें बेचकर गुजारा करने का सिलसिला खादरवासियों की तकदीर में लिखा गया हो। (संवाद)
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जगह जगह बिखरे पड़े हैं पशुओं के शव
खादर में जहां पानी कम हुआ है, उन खेतों में जगह जगह पशुओं के शव बिखरे पड़े हैं। बताया जा रहा है कि बाढ़ में बहकर आए पशुओं के शव अब खेतों में पड़े हैं।
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