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Bijnor News: बाल हठ से जगेगी श्रीअन्न के उत्पादन, लाभ की अलख

Tue, 10 Sep 2024 11:15 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2024 11:15 PM IST
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Child's stubbornness will awaken the desire for food production and profit
-कृषि विभाग की ओर से परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। अब बाल हठ से किसानों में श्रीअन्न के उपयोग, बुवाई, उत्पादन के बारे में अलख जगाई जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में गुरुजी श्रीअन्न का पाठ पढ़कर अन्य साथियों व छात्रों को पढ़ाएंगे। छात्र अपने किसान अभिभावकों को इसके लाभ, उत्पादन, बुवाई के बारे में बताएंगे। बाकी छात्र-छात्राएं श्रीअन्न के प्रयोग से शरीर के होने वाले लाभों की अलख जगाएंगे।
-प्रशिक्षण के बाद यह शिक्षक अन्य शिक्षकों के साथ छात्र छात्राओं को श्रीअन्न का पाठ पढ़ाएंगे ताकि बालक अपने अभिभावकों को उत्पादन के लिए प्रेरित करें। इसके लिए कृषि विभाग जनपद के सभी बीआरसी केंद्रों पर 60-60 शिक्षक-शिक्षिकाओं को श्रीअन्न योजना कार्यक्रम के तहत श्रीअन्न यानी मिलेट्स उत्पादन एवं उपभोग प्रबंधन का पाठ पढ़ रहे हैं।
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-दिया गया शिक्षकों को प्रशिक्षण
बिजनौर। उप्र श्रीअन्न (मिलेट्स) पुनरोद्धार कार्यक्रम वर्ष 2024-25 के तहत विकास खण्ड स्तर पर ब्लाॅक संसाधन केंद्र (बीआरसी) मौपुर देवमल, नूरपुर, स्योहारा, कोतवाली एवं नजीबाबाद पर अध्यापकों काे प्रशिक्षण दिया गया। मौपुर देवमल के जमालपुर बीआरसी में आदित्यवीर कुमार विषय वस्तु विशेषज्ञ, बीआरसी, नूरपुर पर सोमपाल सिंह विषय वस्तु विशेषज्ञ, स्योहारा में जितेन्द्र कुमार विषय वस्तु विशेषज्ञ ने प्रशिक्षण दिया।
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श्रीअन्न (मिलेट्स) की उन्नतशील खेती, उनके विभिन्न उत्पादों के विषय में विस्तृत रूप से अवगत कराया। श्रीअन्न जैसे बाजरा, ज्वार, सांवा, रागी (मड़ुआ), कोदो, रामदाना, चेना, कंगनी, कुटकी एवं कुट्टू से बनने वाले विभिन्न उत्पादों एवं उनकी गुणवत्ता के विषय में उपस्थित अध्यापकों को जानकारी दी जा रही है। साथ ही बाजरा की खेती, उपयोगिता के विषय में बताया गया।

-गिरीश चंद उप कृषि निदेशक



-मनुष्यों के लिए सांवा एक आदर्श आहार
विषय वस्तु विशेषज्ञ हरज्ञान सिंह ने बताया कि आजकल बढ़ते हुए मधुमेह को देखते हुए सांवा का एक आदर्श आहार है। कहा कि श्री अन्न (मिलेट्स) की खेती एवं उनसे बनने वाले उत्पादों के बारे में अध्यापकों को विस्तृत रूप से अवगत कराया जा रहा है।
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