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रमजान की पाक रस्म में बच्चे भी हो रहे शामिल
अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर
Updated Wed, 08 Jun 2016 11:39 PM IST
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बिजनौर में रमजान के पाक महीने का मंगलवार से आगाज हो चुका है। मुसलमान रोजे रखकर अल्लाह की शान में तरावीह पढ़ रहे हैं। मुस्लिम धर्म की इस सबसे पाक रस्म में बच्चे भी शामिल हो चुके हैं। भीषण गर्मी में भी रोजे रखकर वे दूसरों के सामने मिसाल बन रहे हैं।
अनवार उल हक सादिक की पांच साल की बेटी साफिया फरहत, मौलाना अनवारूल के छह साल के बेटे शाहजेब सादिक ने इस बार पहली बार रोजा रखा है। दोनों बच्चों ने रमजान में सभी रोजे रखने का फैसला किया है। हालांकि उनकी कम उम्र को देखते हुए परिजनों ने दोनों से रोजा खोलने को कहा। दुकान से चीज खिलाने का लालच भी दिया, लेकिन दोनों टस से मस नहीं हुए।
शाम को रोजे का समय पूरा होने पर ही दोनों ने रोजा खोला। हाजी मोहम्मद असलम के बेटे मोहम्मद अकरम ने भी पहली बार रोजा रखा है। सुलेमान की पांच साल की बेटी उमामा ने भी पहली बार रोजा रखा है।
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इनके अलावा जिले में पांच साल तक के हजारों बच्चे ऐसे होंगे, जिन्होंने पहली बार रोजा रखा होगा। गांव गजरौला शिव निवासी अब्दुल वाहिद के नौ साल के बेटे शाईन ने भी पहली बार रोजा रखा है। शाईन के अनुसार वो सारे रोजे रखेगा। चाहशीरी के जामा मस्जिद इमाम मौलाना अनवारूल हक के मुताबिक गर्मी में भी रोजा रखने वाले बच्चे सभी के लिए एक मिसाल हैं। ऐसे लोग जो स्वस्थ होने व सभी सुविधाओं से युक्त होकर भी रोजा नहीं रखते हैं, उनको ऐसे बच्चों से कुछ सीख लेनी चाहिए।
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अनवार उल हक सादिक की पांच साल की बेटी साफिया फरहत, मौलाना अनवारूल के छह साल के बेटे शाहजेब सादिक ने इस बार पहली बार रोजा रखा है। दोनों बच्चों ने रमजान में सभी रोजे रखने का फैसला किया है। हालांकि उनकी कम उम्र को देखते हुए परिजनों ने दोनों से रोजा खोलने को कहा। दुकान से चीज खिलाने का लालच भी दिया, लेकिन दोनों टस से मस नहीं हुए।
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शाम को रोजे का समय पूरा होने पर ही दोनों ने रोजा खोला। हाजी मोहम्मद असलम के बेटे मोहम्मद अकरम ने भी पहली बार रोजा रखा है। सुलेमान की पांच साल की बेटी उमामा ने भी पहली बार रोजा रखा है।
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इनके अलावा जिले में पांच साल तक के हजारों बच्चे ऐसे होंगे, जिन्होंने पहली बार रोजा रखा होगा। गांव गजरौला शिव निवासी अब्दुल वाहिद के नौ साल के बेटे शाईन ने भी पहली बार रोजा रखा है। शाईन के अनुसार वो सारे रोजे रखेगा। चाहशीरी के जामा मस्जिद इमाम मौलाना अनवारूल हक के मुताबिक गर्मी में भी रोजा रखने वाले बच्चे सभी के लिए एक मिसाल हैं। ऐसे लोग जो स्वस्थ होने व सभी सुविधाओं से युक्त होकर भी रोजा नहीं रखते हैं, उनको ऐसे बच्चों से कुछ सीख लेनी चाहिए।