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बाल विकास परियोजनाओं में मुख्य सेविकाओं ने काली पट्टी बांध निबटाएं विभागीय कार्य
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मुख्य सेविकाओं ने काली पट्टी बांधकर किया कार्य
बिजनौर। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में मुख्य सेविकाओं के पद से सीडीपीओ पद पर पदोन्नति न होने एवं एसीपी स्वीकृति के लिए पिछले पांच वर्षों से बैठक न होने से आक्रोशित जनपद की मुख्य सेविकाओं ने विरोधा स्वरूप काली पट्टी बांधकर विभागीय कार्य निपटाए।
सुपरवाइजर्स एसोसिएशन उप्र. के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर 6 से 8 दिसंबर तक चलने वाले विरोध कार्यक्रम के अनुसार जनपद में बाल विकास परियोजना कार्यालयों पर तैनात तमाम मुख्य सेविकाओं ने अपने-अपने कार्यालयों में काली पट्टी बांधकर विभागीय कार्यों का निपटारा किया। ऐसोसिएशन की अध्यक्ष शारा रानी एवं सचिव भावना भारद्वाज ने बताया कि विभाग में करीब 12 वर्षों से मुख्य सेविकाओं की पदोन्नति बाल विकास परियोजना अधिकारी के पदों पर नहीं की गई है, जबकि प्रदेश में तमाम बाल विकास परियोजना अधिकारियों के पद रिक्त हैं। सीडीपीओ का कार्य भी मुख्य सेविकाओं से लिया जा रहा है। इसके अलावा शासनादेश के अनुसार मिलने वाली एसीपी वित्तीय स्तरोन्नयन वेतनमान स्वीकृति के लिए होने वाली बैठक भी वर्ष 2016 के बाद से नहीं हुई, जिसके चलते तमाम मुख्य सेविकाओं को वित्तीय नुकसान हो रहा है। इसके अलावा तमाम मुख्य सेविकाएं वित्तीय स्तरोन्नयन के लाभ एवं पदोन्नति मिले बिना ही सेवानिवृत्त हो रही है।
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बिजनौर। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में मुख्य सेविकाओं के पद से सीडीपीओ पद पर पदोन्नति न होने एवं एसीपी स्वीकृति के लिए पिछले पांच वर्षों से बैठक न होने से आक्रोशित जनपद की मुख्य सेविकाओं ने विरोधा स्वरूप काली पट्टी बांधकर विभागीय कार्य निपटाए।
सुपरवाइजर्स एसोसिएशन उप्र. के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर 6 से 8 दिसंबर तक चलने वाले विरोध कार्यक्रम के अनुसार जनपद में बाल विकास परियोजना कार्यालयों पर तैनात तमाम मुख्य सेविकाओं ने अपने-अपने कार्यालयों में काली पट्टी बांधकर विभागीय कार्यों का निपटारा किया। ऐसोसिएशन की अध्यक्ष शारा रानी एवं सचिव भावना भारद्वाज ने बताया कि विभाग में करीब 12 वर्षों से मुख्य सेविकाओं की पदोन्नति बाल विकास परियोजना अधिकारी के पदों पर नहीं की गई है, जबकि प्रदेश में तमाम बाल विकास परियोजना अधिकारियों के पद रिक्त हैं। सीडीपीओ का कार्य भी मुख्य सेविकाओं से लिया जा रहा है। इसके अलावा शासनादेश के अनुसार मिलने वाली एसीपी वित्तीय स्तरोन्नयन वेतनमान स्वीकृति के लिए होने वाली बैठक भी वर्ष 2016 के बाद से नहीं हुई, जिसके चलते तमाम मुख्य सेविकाओं को वित्तीय नुकसान हो रहा है। इसके अलावा तमाम मुख्य सेविकाएं वित्तीय स्तरोन्नयन के लाभ एवं पदोन्नति मिले बिना ही सेवानिवृत्त हो रही है।
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